25 अगस्त 2026
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रिजिजू का विपक्ष पर प्रहार: लोकसभा मात्र 15% समय चली, संसद ठप करना संवैधानिक अधिकार नहीं

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रिजिजू का विपक्ष पर प्रहार: लोकसभा मात्र 15% समय चली, संसद ठप करना संवैधानिक अधिकार नहीं

सारांश

रिजिजू का आरोप — विपक्ष ने पहले संसद ठप की, फिर उसी बर्बादी को सरकार के खिलाफ हथियार बनाया। लोकसभा मात्र 15% समय चली। राहुल गांधी पर 17वीं लोकसभा में 8 बहसें और 99 सवालों का रिकॉर्ड उद्धृत कर संसदीय जवाबदेही पर तीखा सवाल।

मुख्य बातें

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 25 अगस्त को मानसून सत्र में हंगामे के लिए विपक्ष को जिम्मेदार ठहराया।
लोकसभा अपने निर्धारित समय के केवल 15% और राज्यसभा मात्र 33% समय ही चल पाई।
लोकसभा में 'प्रश्नकाल' तय समय के 1% और राज्यसभा में 12% समय ही संचालित हुआ।
रिजिजू के दावे के अनुसार, राहुल गांधी ने अमित शाह के साथ बहस के प्रस्ताव को 'लेक्चर' कहकर ठुकरा दिया।
17वीं लोकसभा में राहुल गांधी की उपस्थिति 51% , केवल 8 बहसें , 99 सवाल और कोई प्राइवेट मेंबर बिल नहीं — रिजिजू का दावा।
रिजिजू ने कहा — संविधान विपक्ष को 'रिमोट कंट्रोल' नहीं देता कि राजनीतिक मांगें न मानने पर संसद बंद कर दें।

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार, 25 अगस्त को मानसून सत्र के दौरान संसद में बार-बार हुए हंगामे के लिए विपक्ष को सीधे जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान विपक्ष को सरकार से सवाल पूछने का अधिकार देता है, लेकिन राजनीतिक मांगें न मानने पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का कोई अधिकार नहीं देता।

मानसून सत्र के चौंकाने वाले आँकड़े

रिजिजू ने मानसून सत्र के संसदीय आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि लोकसभा अपने निर्धारित समय के केवल 15 प्रतिशत हिस्से में ही चल पाई, जबकि राज्यसभा मात्र 33 प्रतिशत समय संचालित हो सकी। इससे भी अधिक चिंताजनक यह रहा कि लोकसभा में 'प्रश्नकाल' अपने तय समय के बमुश्किल 1 प्रतिशत और राज्यसभा में केवल 12 प्रतिशत समय ही चल पाया। रिजिजू ने इसे विपक्ष की 'नकारात्मक रणनीति' करार दिया — पहले संसद को चलने से रोको, फिर समय की बर्बादी को सरकार के खिलाफ हथियार बनाओ।

राहुल गांधी पर सीधा निशाना

रिजिजू ने दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर चर्चा के लिए सहमत हो गए थे और बहस के लिए एक विशेष समय भी तय किया गया था। उनके अनुसार, कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने यह कहते हुए इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया कि विपक्ष को गृह मंत्री के 'लेक्चर' में कोई रुचि नहीं है। रिजिजू ने कहा, "अगर किसी नेता को सच में बहस से रोका जाता है, तो वह 24 घंटे के प्रस्ताव को तुरंत स्वीकार कर लेता है। वह उसे 'लेक्चर' कहकर खारिज नहीं करता।"

उन्होंने 17वीं लोकसभा में राहुल गांधी के संसदीय कामकाज के रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाए। रिजिजू के दावे के अनुसार, राहुल गांधी की उपस्थिति 51 प्रतिशत रही, उन्होंने राष्ट्रीय औसत 46.7 बहसों के मुकाबले केवल 8 बहसों में हिस्सा लिया, औसत 210 के मुकाबले मात्र 99 सवाल पूछे और कोई भी 'प्राइवेट मेंबर बिल' पेश नहीं किया।

सरकार की संवाद-प्रक्रिया का बचाव

रिजिजू ने विपक्ष के उस आरोप को सिरे से नकार दिया कि सरकार बात नहीं सुनती। उन्होंने 'विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक' का उदाहरण दिया, जिसे विपक्ष की चिंताओं के बाद एक संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया था। उनके अनुसार, बाद में विपक्ष ने विधेयक को पूरी तरह वापस लेने की माँग की, जो बातचीत की मूल भावना के विरुद्ध था। उन्होंने नीट परीक्षा के मुद्दे पर प्रदर्शनकारी छात्रों और भूख हड़ताल पर बैठे एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के साथ सरकार की बातचीत का भी उल्लेख किया।

संसद जनता की है, दलों की नहीं

'द इंडियन एक्सप्रेस' में प्रकाशित अपने लेख में रिजिजू ने कहा कि संसद भारत के लोगों की है, न कि राजनीतिक दलों की। उन्होंने कहा, "नागरिकों द्वारा दिए गए चुनावी जनादेश को कोई सजावटी सर्टिफिकेट नहीं माना जा सकता जिसे तब रद्द कर दिया जाए जब हारने वाले दल बहस के बजाय हंगामा करना चुनें।" उन्होंने यह भी कहा, "जो लोग बहस या वोट के जरिए सरकार को नहीं हरा सकते, उन्हें शोर-शराबे के जरिए संसद को हराने की इजाजत नहीं दी जा सकती।"

विपक्ष की भूमिका पर संवैधानिक तर्क

रिजिजू ने स्पष्ट किया कि संविधान विपक्ष को सरकार से सवाल पूछने, आलोचना करने, विरोध करने, संशोधन लाने और सरकार के खिलाफ मतदान करने का पूरा अधिकार देता है। उन्होंने कहा, "यह विपक्ष को कोई 'रिमोट कंट्रोल' नहीं देता जिससे वे अपनी राजनीतिक मांगें न मानने पर संसद को बंद कर सकें।" आगे उन्होंने कहा कि कुछ विपक्षी दलों के लिए बातचीत का अर्थ सरकार का घुटने टेकना है — यह रवैया संसदीय लोकतंत्र की भावना के विरुद्ध है। मानसून सत्र की समाप्ति के बाद यह बहस आगामी शीतकालीन सत्र की रूपरेखा तय कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिनकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि जब दोनों पक्ष एक-दूसरे पर बातचीत से इनकार का आरोप लगा रहे हों, तो संसदीय लोकतंत्र की विश्वसनीयता किसकी जिम्मेदारी है — और नागरिकों के लिए इसका उत्तर केवल आँकड़ों में नहीं, सदन के भीतर के व्यवहार में मिलेगा।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किरेन रिजिजू ने मानसून सत्र के हंगामे पर क्या कहा?
रिजिजू ने कहा कि संविधान विपक्ष को सरकार से सवाल पूछने का अधिकार देता है, लेकिन राजनीतिक मांगें न मानने पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का अधिकार नहीं देता। उन्होंने इसे विपक्ष की 'नकारात्मक रणनीति' बताया।
मानसून सत्र में लोकसभा कितने समय चली?
रिजिजू के अनुसार, लोकसभा अपने निर्धारित समय के केवल 15 प्रतिशत हिस्से में चली, जबकि राज्यसभा 33 प्रतिशत समय संचालित हो सकी। प्रश्नकाल लोकसभा में मात्र 1 प्रतिशत और राज्यसभा में 12 प्रतिशत समय चला।
रिजिजू ने राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाए?
रिजिजू ने दावा किया कि राहुल गांधी ने अमित शाह के साथ जंतर-मंतर मुद्दे पर बहस के प्रस्ताव को 'लेक्चर' कहकर ठुकरा दिया। साथ ही उन्होंने 17वीं लोकसभा में राहुल गांधी की 51% उपस्थिति, 8 बहसों में भागीदारी और 99 सवालों का हवाला दिया।
रिजिजू ने सरकार की संवाद-प्रक्रिया के क्या उदाहरण दिए?
उन्होंने 'विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक' को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने, नीट परीक्षा के प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक से संवाद के उदाहरण दिए। उनका तर्क था कि सरकार ने जायज मांगों पर हमेशा बातचीत की।
रिजिजू के अनुसार संसद किसकी है?
रिजिजू ने स्पष्ट कहा कि संसद भारत के लोगों की है, न कि किसी राजनीतिक दल की। उन्होंने कहा कि नागरिकों का चुनावी जनादेश कोई सजावटी प्रमाण-पत्र नहीं है जिसे विपक्षी दल हंगामे से रद्द कर सकें।
राष्ट्र प्रेस
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