मानसून सत्र में लोकसभा की उत्पादकता मात्र 19%, रिजिजू बोले — विपक्ष चर्चा से भागा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 13 अगस्त 2026 को संसद के मानसून सत्र की समाप्ति के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि लोकसभा में निर्धारित समय की तुलना में केवल 19 प्रतिशत उत्पादकता हासिल हो सकी, जबकि राज्यसभा में यह आँकड़ा 39 प्रतिशत रहा। उन्होंने सत्र को 'दो नज़रियों' से देखने की बात कही — विधायी उत्पादन के लिहाज़ से सफल, किंतु संसदीय बहस की दृष्टि से निराशाजनक।
सत्र का विधायी लेखा-जोखा
रिजिजू ने बताया कि मानसून सत्र के दौरान सरकार ने कुल 12 विधेयक पारित कराए। हालाँकि, लोकसभा में केवल एक विधेयक — नकल-रोधी विधेयक — पर सार्थक चर्चा हो सकी। उन्होंने कहा, 'लोकसभा में इसके अलावा कोई अच्छी चर्चा नहीं हुई। चर्चा की दृष्टि से हम खुश नहीं।' राज्यसभा में भी विपक्षी दलों द्वारा हंगामे और वॉकआउट के कारण कार्यवाही बाधित रही।
विपक्ष के रवैये पर तीखी प्रतिक्रिया
तीन दशकों के संसदीय अनुभव का हवाला देते हुए रिजिजू ने कहा, 'ये पहली बार देखा — विपक्ष चर्चा से भाग रहा है। पहली बार सरकार कह रही है चर्चा के लिए तैयार हैं, लेकिन विपक्ष भाग गया।' उन्होंने इसे 'कल्पना से बाहर' बताया और कहा कि ऐसा दृश्य संसदीय इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया।
कांग्रेस पर सीधा निशाना
रिजिजू ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के सांसदों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उनका काम 'नारा लगाना और कार्ड लेकर हंगामा करना' रह गया है। उन्होंने कांग्रेस के नए सांसदों के प्रति सहानुभूति भी जताई और कहा, 'चर्चा नहीं होगी तो सीखेंगे कैसे।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब संसद में विपक्ष की भूमिका और संसदीय मर्यादा को लेकर बहस तेज़ होती जा रही है।
शीतकालीन सत्र से उम्मीद
केंद्रीय मंत्री ने आशा व्यक्त की कि आगामी शीतकालीन सत्र में स्थिति बेहतर होगी और सदन में वास्तविक बहस का माहौल बनेगा। गौरतलब है कि यह लगातार कई सत्रों से चली आ रही उस प्रवृत्ति का हिस्सा है जिसमें संसद की उत्पादकता और विपक्ष-सरकार के बीच टकराव दोनों एक साथ बढ़ते दिख रहे हैं।