राज्यसभा मानसून सत्र 2025 समाप्त: सभापति राधाकृष्णन ने जताई चिंता, मात्र 39% उत्पादकता
सारांश
मुख्य बातें
संसद का मानसून सत्र 2025 गुरुवार, 13 अगस्त को समाप्त हो गया। राज्यसभा के 271वें सत्र की समाप्ति पर सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदन की कार्यवाही का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया और पूरे सत्र में बार-बार हुए हंगामे तथा व्यवधान पर गहरी चिंता व्यक्त की। सदन की उत्पादकता मात्र 39.17 प्रतिशत रही और कुल कार्यवाही केवल 37 घंटे 49 मिनट तक चल सकी।
मुख्य घटनाक्रम
सभापति राधाकृष्णन ने सत्र की समाप्ति पर सदन को बताया कि लगातार व्यवधानों के कारण राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सार्थक चर्चा के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल सका। उन्होंने खेद प्रकट करते हुए कहा, 'यह खेद का विषय है कि यह सत्र लगातार अव्यवस्था और बार-बार होने वाले व्यवधान से प्रभावित रहा, जिसके कारण सदन का कामकाज कई बार पटरी से उतर गया।'
इन सबके बावजूद सदन ने अपने मूल विधायी दायित्वों को पूरा करते हुए 12 विधेयकों पर विचार किया और उन्हें पारित किया अथवा विधायी प्रक्रिया के तहत वापस लौटाया।
प्रश्नों और चर्चाओं का हाल
सभापति ने आँकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि सदस्यों को 285 तारांकित प्रश्न, 380 शून्यकाल के विषय और 380 विशेष उल्लेख उठाने का अवसर उपलब्ध था। किंतु व्यवधानों के चलते इनमें से केवल 16 प्रश्न, 52 शून्यकाल के विषय और 93 विशेष उल्लेख ही सदन में लिए जा सके। उन्होंने कहा कि उपलब्ध अवसरों का वह उपयोग नहीं हो सका जो जनता की आवाज़ को प्रभावी ढंग से सदन में उठाने के लिए आवश्यक था।
सभापति की अपील और संसदीय मर्यादा
राज्यसभा के सभापति ने इस बात पर जोर दिया कि उच्च सदन होने के नाते राज्यसभा की एक विशिष्ट जिम्मेदारी है — तर्कपूर्ण बहस, गरिमापूर्ण असहमति और विचारपूर्ण कानून निर्माण की परंपरा को अक्षुण्ण रखना। उन्होंने चेताया कि लगातार व्यवधानों का असर अंततः जनता के विश्वास और उसकी आकांक्षाओं पर पड़ता है।
उन्होंने कहा, 'हमें संसदीय आचरण के उच्चतम मानकों को बनाए रखने और इस संस्था की गरिमा एवं पवित्रता को संरक्षित करने का प्रयास करना चाहिए।' सभापति ने यह भी स्पष्ट किया कि असहमति लोकतंत्र का अनिवार्य हिस्सा है, परंतु उसे सार्थक बहस और गरिमापूर्ण तरीके से व्यक्त किया जाना चाहिए।
ओरिएंटेशन कार्यक्रम: एक सकारात्मक पहल
सत्र की एक उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में सभापति ने नवनिर्वाचित और मनोनीत सदस्यों के लिए आयोजित दो दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम का उल्लेख किया। इस कार्यक्रम में सदस्यों को संसदीय कार्यप्रणाली, प्रक्रिया और अपेक्षित आचरण के मानकों से परिचित कराया गया। वरिष्ठ मंत्रियों और अनुभवी सांसदों ने अपने संसदीय अनुभव साझा किए।
सत्र के दौरान अपनी व्यस्तताओं और राज्यों की जिम्मेदारियों के बावजूद 35 सदस्यों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। सभापति ने इसे नए सदस्यों के लिए संसदीय परंपराओं और प्रक्रियाओं को समझने का महत्वपूर्ण अवसर बताया।
आगे की राह
सत्र के समापन पर सभापति राधाकृष्णन ने सभी सदस्यों से अपील की कि भविष्य के सत्रों में सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से संचालित करने में सहयोग करें। उन्होंने याद दिलाया कि राज्यसभा की जिम्मेदारी केवल विधेयकों को पारित करना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर गंभीर और सार्थक विचार-विमर्श करना भी है। यह सत्र एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि संसदीय उत्पादकता और जवाबदेही को लेकर एक व्यापक सुधार की आवश्यकता है।