कांग्रेस एससी/एसटी सांसद फोरम की 29 सितंबर को बैठक, दलित-आदिवासी अत्याचार पर देशव्यापी रणनीति बनेगी
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के एससी/एसटी सांसद फोरम ने 29 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में दोपहर 2:30 बजे एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है, जिसमें दलितों और आदिवासियों के खिलाफ अत्याचार के मुद्दे पर देशव्यापी कार्ययोजना तैयार की जाएगी। यह फोरम 7 सितंबर 2026 को गठित किया गया था और अब इसे प्रतिक्रियात्मक भूमिका से आगे ले जाकर एक सक्रिय राष्ट्रीय आंदोलन का रूप देने की तैयारी है।
फोरम की पृष्ठभूमि और गठन
कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने बताया कि यह फोरम के. राजू, राजेंद्र पाल गौतम और विक्रांत भूरिया के नेतृत्व में बनाया गया था। उन्होंने कहा, 'हमारा एससी/एसटी सांसद फोरम 7 सितंबर को बना था। इसमें राज्यसभा और लोकसभा, दोनों सदनों के कांग्रेस सांसद शामिल हैं।' इस फोरम में संसद के दोनों सदनों के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के सांसद सम्मिलित हैं।
बैठक का उद्देश्य और एजेंडा
कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया ने इस फोरम को 'ऐतिहासिक कदम' बताते हुए कहा कि इसका दायरा केवल किसी एक घटना तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, 'हम इस फोरम को रिएक्टिव नहीं रखना चाहते।' भूरिया ने यह भी स्पष्ट किया कि हल्द्वानी की घटना के बाद जहाँ सांसदों की बैठक हुई, पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पर विरोध प्रदर्शन किया गया और जीरो एफआईआर दर्ज कराई गई, वहीं अब इस संघर्ष को और व्यापक बनाने का संकल्प लिया गया है।
गौरतलब है कि भूरिया ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के दौरान हुए कथित 'शुद्धिकरण हवन' का उल्लेख करते हुए इसे 'पूरे दलित और आदिवासी समुदाय का अपमान' बताया।
राहुल गांधी का समर्थन और राजनीतिक संदेश
कांग्रेस सांसद भजन लाल जाटव ने देश में एससी/एसटी वर्ग के खिलाफ बढ़ते अत्याचारों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, 'देशभर में एससी/एसटी लोगों के खिलाफ जिस तरह से अत्याचार हो रहे हैं, वे इतने बढ़ गए हैं कि कोई सुनने वाला नहीं है।' जाटव ने यह भी कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी फोरम को पूरा समर्थन दे रहे हैं और उन्होंने संकेत दिया है कि 'यह लड़ाई बहुत बड़ी हो गई है।'
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष दलित और आदिवासी मुद्दों को चुनावी और सामाजिक दोनों मोर्चों पर केंद्रीय बनाने की कोशिश कर रहा है।
आम जनता पर असर और आगे की राह
विक्रांत भूरिया के अनुसार फोरम की योजना है कि 'देश के किसी भी राज्य में जहाँ भी दलित-आदिवासी के साथ दुर्व्यवहार होगा, वहाँ एससी/एसटी के सांसद जाकर लड़ाई लड़ेंगे।' यह रुख फोरम को महज संसदीय मंच से आगे एक ज़मीनी हस्तक्षेप के औज़ार के रूप में स्थापित करने की कोशिश है।
29 सितंबर की बैठक में दोनों सदनों के एससी/एसटी सांसदों और विधायकों के भाग लेने की उम्मीद है। इस बैठक के नतीजे तय करेंगे कि फोरम का अगला कदम — चाहे वह संसद में प्रस्ताव हो, राज्यों में दौरे हों या कानूनी हस्तक्षेप — किस दिशा में जाएगा।