27 सितंबर 2026
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कांग्रेस एससी/एसटी सांसद फोरम की 29 सितंबर को बैठक, दलित-आदिवासी अत्याचार पर देशव्यापी रणनीति बनेगी

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कांग्रेस एससी/एसटी सांसद फोरम की 29 सितंबर को बैठक, दलित-आदिवासी अत्याचार पर देशव्यापी रणनीति बनेगी

सारांश

कांग्रेस का एससी/एसटी सांसद फोरम 29 सितंबर को नई दिल्ली में जुटेगा — मकसद सिर्फ एक घटना पर प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि दलित-आदिवासी अत्याचार के खिलाफ देशव्यापी सक्रिय आंदोलन खड़ा करना है। राहुल गांधी के समर्थन के साथ, फोरम खुद को संसद से सड़क तक की लड़ाई का केंद्र बनाने की तैयारी में है।

मुख्य बातें

कांग्रेस एससी/एसटी सांसद फोरम की बैठक 29 सितंबर 2026 को दोपहर 2:30 बजे नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में होगी।
फोरम 7 सितंबर 2026 को के.
राजू , राजेंद्र पाल गौतम और विक्रांत भूरिया के नेतृत्व में गठित हुआ था।
बैठक का उद्देश्य दलितों और आदिवासियों के खिलाफ अत्याचार पर देशव्यापी रणनीति तैयार करना है।
सांसद भजन लाल जाटव ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी फोरम को पूरा समर्थन दे रहे हैं।
फोरम अब तक पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पर विरोध प्रदर्शन कर चुका है और जीरो एफआईआर दर्ज करा चुका है।

कांग्रेस के एससी/एसटी सांसद फोरम ने 29 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में दोपहर 2:30 बजे एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है, जिसमें दलितों और आदिवासियों के खिलाफ अत्याचार के मुद्दे पर देशव्यापी कार्ययोजना तैयार की जाएगी। यह फोरम 7 सितंबर 2026 को गठित किया गया था और अब इसे प्रतिक्रियात्मक भूमिका से आगे ले जाकर एक सक्रिय राष्ट्रीय आंदोलन का रूप देने की तैयारी है।

फोरम की पृष्ठभूमि और गठन

कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने बताया कि यह फोरम के. राजू, राजेंद्र पाल गौतम और विक्रांत भूरिया के नेतृत्व में बनाया गया था। उन्होंने कहा, 'हमारा एससी/एसटी सांसद फोरम 7 सितंबर को बना था। इसमें राज्यसभा और लोकसभा, दोनों सदनों के कांग्रेस सांसद शामिल हैं।' इस फोरम में संसद के दोनों सदनों के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के सांसद सम्मिलित हैं।

बैठक का उद्देश्य और एजेंडा

कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया ने इस फोरम को 'ऐतिहासिक कदम' बताते हुए कहा कि इसका दायरा केवल किसी एक घटना तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, 'हम इस फोरम को रिएक्टिव नहीं रखना चाहते।' भूरिया ने यह भी स्पष्ट किया कि हल्द्वानी की घटना के बाद जहाँ सांसदों की बैठक हुई, पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पर विरोध प्रदर्शन किया गया और जीरो एफआईआर दर्ज कराई गई, वहीं अब इस संघर्ष को और व्यापक बनाने का संकल्प लिया गया है।

गौरतलब है कि भूरिया ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के दौरान हुए कथित 'शुद्धिकरण हवन' का उल्लेख करते हुए इसे 'पूरे दलित और आदिवासी समुदाय का अपमान' बताया।

राहुल गांधी का समर्थन और राजनीतिक संदेश

कांग्रेस सांसद भजन लाल जाटव ने देश में एससी/एसटी वर्ग के खिलाफ बढ़ते अत्याचारों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, 'देशभर में एससी/एसटी लोगों के खिलाफ जिस तरह से अत्याचार हो रहे हैं, वे इतने बढ़ गए हैं कि कोई सुनने वाला नहीं है।' जाटव ने यह भी कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी फोरम को पूरा समर्थन दे रहे हैं और उन्होंने संकेत दिया है कि 'यह लड़ाई बहुत बड़ी हो गई है।'

यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष दलित और आदिवासी मुद्दों को चुनावी और सामाजिक दोनों मोर्चों पर केंद्रीय बनाने की कोशिश कर रहा है।

आम जनता पर असर और आगे की राह

विक्रांत भूरिया के अनुसार फोरम की योजना है कि 'देश के किसी भी राज्य में जहाँ भी दलित-आदिवासी के साथ दुर्व्यवहार होगा, वहाँ एससी/एसटी के सांसद जाकर लड़ाई लड़ेंगे।' यह रुख फोरम को महज संसदीय मंच से आगे एक ज़मीनी हस्तक्षेप के औज़ार के रूप में स्थापित करने की कोशिश है।

29 सितंबर की बैठक में दोनों सदनों के एससी/एसटी सांसदों और विधायकों के भाग लेने की उम्मीद है। इस बैठक के नतीजे तय करेंगे कि फोरम का अगला कदम — चाहे वह संसद में प्रस्ताव हो, राज्यों में दौरे हों या कानूनी हस्तक्षेप — किस दिशा में जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा इसके बाद शुरू होती है — क्या यह मंच केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस और विरोध प्रदर्शनों तक सीमित रहेगा, या ज़मीन पर दलित और आदिवासी परिवारों के लिए कानूनी और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित कर पाएगा? विपक्षी दलों में दलित-आदिवासी फोरम बनाने का इतिहास अक्सर चुनाव-केंद्रित रहा है, न कि दीर्घकालिक नीति-परिवर्तन की दिशा में। राहुल गांधी का 'समर्थन' अभी तक बयानों तक सीमित है; देखना यह होगा कि क्या यह फोरम संसद में विशिष्ट विधायी मांगों में तब्दील होता है।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांग्रेस एससी/एसटी सांसद फोरम की 29 सितंबर की बैठक में क्या होगा?
इस बैठक में दलितों और आदिवासियों के खिलाफ अत्याचार पर देशव्यापी रणनीति तैयार की जाएगी। राज्यसभा और लोकसभा दोनों सदनों के कांग्रेस के एससी/एसटी सांसद नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में दोपहर 2:30 बजे एकत्रित होंगे।
कांग्रेस का एससी/एसटी सांसद फोरम कब और किसके नेतृत्व में बना?
यह फोरम 7 सितंबर 2026 को के. राजू, राजेंद्र पाल गौतम और विक्रांत भूरिया के नेतृत्व में गठित किया गया था। इसमें कांग्रेस के दोनों सदनों के अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के सांसद शामिल हैं।
हल्द्वानी घटना का इस फोरम से क्या संबंध है?
हल्द्वानी की घटना इस फोरम की सक्रियता के तात्कालिक कारणों में से एक रही है। सांसदों ने पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पर विरोध प्रदर्शन किया और जीरो एफआईआर दर्ज कराई, लेकिन अब फोरम का उद्देश्य केवल इस घटना तक सीमित न रहकर राष्ट्रव्यापी अत्याचारों पर काम करना है।
राहुल गांधी का इस फोरम में क्या रोल है?
कांग्रेस सांसद भजन लाल जाटव के अनुसार राहुल गांधी फोरम को पूरा समर्थन दे रहे हैं और उन्होंने कहा है कि 'यह लड़ाई बहुत बड़ी हो गई है।' हालाँकि उनकी सीधी संस्थागत भूमिका का विवरण अभी स्पष्ट नहीं है।
इस फोरम से दलित और आदिवासी समुदाय को क्या फायदा होगा?
फोरम की योजना है कि देश के किसी भी राज्य में दलित या आदिवासी के साथ दुर्व्यवहार होने पर सांसद वहाँ जाकर हस्तक्षेप करेंगे। यह फोरम एक सक्रिय निगरानी और वकालत मंच के रूप में काम करने का इरादा रखता है, न कि केवल प्रतिक्रियात्मक भूमिका में।
राष्ट्र प्रेस
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