धर्मेंद्र प्रधान का राहुल गांधी पर हमला: 'राजनीतिक अवसरवाद के ध्वजवाहक हैं नेता प्रतिपक्ष'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने 9 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा प्रहार करते हुए उन्हें 'राजनीतिक अवसरवाद का ध्वजवाहक' करार दिया। प्रधान ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर कांग्रेस पर राष्ट्रीय सुरक्षा के संवेदनशील मुद्दे पर अपना रुख पलटने का गंभीर आरोप लगाया।
मुख्य आरोप और बयान
प्रधान ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'अगर राजनीतिक अवसरवाद का कोई चेहरा होता तो विपक्ष के नेता राहुल गांधी उसके ध्वजवाहक होते। विदेशों में भारत के लोकतंत्र पर सवाल उठाने से लेकर खुद भारतीय सत्ता के खिलाफ लड़ाई का ऐलान करने तक, उनकी राजनीति ने बार-बार उनकी प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े किए हैं।'
उन्होंने यह भी पूछा, 'एक साल में क्या बदल गया? राजनीतिक सुविधा के लिए सिद्धांतों को छोड़ा नहीं जा सकता।' यह टिप्पणी कांग्रेस के उस बदले हुए रुख की ओर इशारा मानी जा रही है, जिस पर उसने पहले राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर विरोध जताया था।
राष्ट्रीय संप्रभुता पर जोर
प्रधान ने अपने पोस्ट में भारत की संप्रभु नीति-निर्माण की स्वायत्तता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, 'भारत एक संप्रभु राष्ट्र है, और इसकी नीतियाँ इसके अपने संस्थानों, कानूनों और राष्ट्रीय हितों से तय होती हैं, न कि विदेशी दबाव या एक्स पर चलने वाले नैरेटिव से।'
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 'कोई भी दबाव, उकसावा या राजनीतिक एजेंडा भारत को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।' गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत की विदेश नीति और आंतरिक सुरक्षा निर्णयों पर वैश्विक स्तर पर बहस जारी है।
मोदी नेतृत्व और विदेशी निवेश पर रुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने लिखा कि 'मोदी के नेतृत्व में भारत कभी भी बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेगा।' साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत वैश्विक कंपनियों, नवाचार और निवेश का स्वागत करता है — लेकिन उन्हीं के लिए जो भारतीय कानूनों और सुरक्षा मानकों का पालन करते हों।
उन्होंने कहा, 'हम दुनिया के लिए खुले हैं, लेकिन हम कभी भी अपने देश के हितों से समझौता नहीं करेंगे।'
कांग्रेस पर जवाबदेही की माँग
प्रधान ने कांग्रेस से सवाल किया कि 'क्या प्रभावशाली बाहरी ताकतों से राजनीतिक समर्थन और संसाधन पाने की चाहत, भारत के अपने संस्थानों में भरोसे से ज़्यादा अहम होती जा रही है?' उन्होंने माँग की कि कांग्रेस को राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर अपना रुख इतनी नाटकीय रूप से बदलने के लिए जवाब देना होगा।
पोस्ट के अंत में उन्होंने कहा, 'इतिहास उन लोगों को सबक सिखाता है जो राजनीतिक फायदे के लिए राष्ट्रीय हितों से समझौता करते हैं।' इस बयान के साथ उन्होंने भारत की जनता को 'सब देख रही है' कहकर विपक्ष को चेतावनी देने की कोशिश की।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह बयान भाजपा और कांग्रेस के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर चल रहे वाकयुद्ध की नवीनतम कड़ी है। आलोचकों का कहना है कि दोनों दल एक-दूसरे पर राजनीतिक अवसरवाद का आरोप लगाते हुए मूल नीतिगत सवालों को पृष्ठभूमि में धकेल देते हैं। कांग्रेस की ओर से अभी तक इस पोस्ट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।