9 अक्टूबर 2026
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धर्मेंद्र प्रधान का राहुल गांधी पर हमला: 'राजनीतिक अवसरवाद के ध्वजवाहक हैं नेता प्रतिपक्ष'

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धर्मेंद्र प्रधान का राहुल गांधी पर हमला: 'राजनीतिक अवसरवाद के ध्वजवाहक हैं नेता प्रतिपक्ष'

सारांश

BJP सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने राहुल गांधी को 'राजनीतिक अवसरवाद का ध्वजवाहक' बताया और कांग्रेस पर राष्ट्रीय सुरक्षा पर रुख बदलने का तीखा आरोप लगाया — यह बयान भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा है जो विपक्ष को सुरक्षा मुद्दों पर रक्षात्मक रखती है।

मुख्य बातें

BJP सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने 9 अक्टूबर 2026 को एक्स पर राहुल गांधी को 'राजनीतिक अवसरवाद का ध्वजवाहक' कहा।
प्रधान ने कांग्रेस पर राष्ट्रीय सुरक्षा के एक संवेदनशील मुद्दे पर एक साल में रुख बदलने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि भारत की नीतियाँ विदेशी दबाव या सोशल मीडिया के नैरेटिव से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों से तय होती हैं।
PM मोदी का हवाला देते हुए कहा — भारत कभी बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेगा।
कांग्रेस पर 'प्रभावशाली बाहरी ताकतों' से संसाधन पाने की चाहत रखने का तीखा सवाल उठाया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने 9 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा प्रहार करते हुए उन्हें 'राजनीतिक अवसरवाद का ध्वजवाहक' करार दिया। प्रधान ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर कांग्रेस पर राष्ट्रीय सुरक्षा के संवेदनशील मुद्दे पर अपना रुख पलटने का गंभीर आरोप लगाया।

मुख्य आरोप और बयान

प्रधान ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'अगर राजनीतिक अवसरवाद का कोई चेहरा होता तो विपक्ष के नेता राहुल गांधी उसके ध्वजवाहक होते। विदेशों में भारत के लोकतंत्र पर सवाल उठाने से लेकर खुद भारतीय सत्ता के खिलाफ लड़ाई का ऐलान करने तक, उनकी राजनीति ने बार-बार उनकी प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े किए हैं।'

उन्होंने यह भी पूछा, 'एक साल में क्या बदल गया? राजनीतिक सुविधा के लिए सिद्धांतों को छोड़ा नहीं जा सकता।' यह टिप्पणी कांग्रेस के उस बदले हुए रुख की ओर इशारा मानी जा रही है, जिस पर उसने पहले राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर विरोध जताया था।

राष्ट्रीय संप्रभुता पर जोर

प्रधान ने अपने पोस्ट में भारत की संप्रभु नीति-निर्माण की स्वायत्तता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, 'भारत एक संप्रभु राष्ट्र है, और इसकी नीतियाँ इसके अपने संस्थानों, कानूनों और राष्ट्रीय हितों से तय होती हैं, न कि विदेशी दबाव या एक्स पर चलने वाले नैरेटिव से।'

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 'कोई भी दबाव, उकसावा या राजनीतिक एजेंडा भारत को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।' गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत की विदेश नीति और आंतरिक सुरक्षा निर्णयों पर वैश्विक स्तर पर बहस जारी है।

मोदी नेतृत्व और विदेशी निवेश पर रुख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने लिखा कि 'मोदी के नेतृत्व में भारत कभी भी बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेगा।' साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत वैश्विक कंपनियों, नवाचार और निवेश का स्वागत करता है — लेकिन उन्हीं के लिए जो भारतीय कानूनों और सुरक्षा मानकों का पालन करते हों।

उन्होंने कहा, 'हम दुनिया के लिए खुले हैं, लेकिन हम कभी भी अपने देश के हितों से समझौता नहीं करेंगे।'

कांग्रेस पर जवाबदेही की माँग

प्रधान ने कांग्रेस से सवाल किया कि 'क्या प्रभावशाली बाहरी ताकतों से राजनीतिक समर्थन और संसाधन पाने की चाहत, भारत के अपने संस्थानों में भरोसे से ज़्यादा अहम होती जा रही है?' उन्होंने माँग की कि कांग्रेस को राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर अपना रुख इतनी नाटकीय रूप से बदलने के लिए जवाब देना होगा।

पोस्ट के अंत में उन्होंने कहा, 'इतिहास उन लोगों को सबक सिखाता है जो राजनीतिक फायदे के लिए राष्ट्रीय हितों से समझौता करते हैं।' इस बयान के साथ उन्होंने भारत की जनता को 'सब देख रही है' कहकर विपक्ष को चेतावनी देने की कोशिश की।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

यह बयान भाजपा और कांग्रेस के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर चल रहे वाकयुद्ध की नवीनतम कड़ी है। आलोचकों का कहना है कि दोनों दल एक-दूसरे पर राजनीतिक अवसरवाद का आरोप लगाते हुए मूल नीतिगत सवालों को पृष्ठभूमि में धकेल देते हैं। कांग्रेस की ओर से अभी तक इस पोस्ट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो BJP की आजमाई हुई चुनावी युक्ति है। लेकिन वे 'एक साल में बदले रुख' का जो संदर्भ दे रहे हैं, उसे स्पष्ट किए बिना यह आरोप अधूरा है — पाठक यह नहीं जान पाते कि ठीक कौन-सा मुद्दा है और कांग्रेस ने वास्तव में क्या बदला। 'बाहरी ताकतों' का बार-बार जिक्र एक व्यापक नैरेटिव का हिस्सा लगता है, जो असहमति को देशद्रोह से जोड़ने का जोखिम उठाता है। मुख्यधारा की कवरेज इस बयान को महज राजनीतिक हमले के रूप में दिखा रही है, जबकि असली सवाल यह है कि कांग्रेस का वह 'बदला हुआ रुख' किस नीतिगत निर्णय से जुड़ा है — और क्या वह बदलाव वास्तव में गलत है।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धर्मेंद्र प्रधान ने राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाए?
BJP सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने 9 अक्टूबर 2026 को एक्स पर पोस्ट कर राहुल गांधी को 'राजनीतिक अवसरवाद का ध्वजवाहक' बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने राष्ट्रीय सुरक्षा के एक संवेदनशील मुद्दे पर एक साल के भीतर ही अपना रुख पलट लिया है।
धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय सुरक्षा पर क्या कहा?
प्रधान ने कहा कि भारत की नीतियाँ उसके अपने संस्थानों, कानूनों और राष्ट्रीय हितों से तय होती हैं — विदेशी दबाव या सोशल मीडिया के नैरेटिव से नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि PM मोदी के नेतृत्व में भारत कभी बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेगा।
प्रधान ने कांग्रेस से जवाबदेही क्यों माँगी?
प्रधान ने सवाल उठाया कि जब राजनीतिक रुख इतनी नाटकीय रूप से बदलते हैं, तो उसके पीछे के हितों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि 'प्रभावशाली बाहरी ताकतों से राजनीतिक समर्थन और संसाधन पाने की चाहत' पर कांग्रेस को सफाई देनी चाहिए।
क्या कांग्रेस ने इस बयान पर कोई प्रतिक्रिया दी?
खबर लिखे जाने तक कांग्रेस की ओर से प्रधान की इस एक्स पोस्ट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई थी।
यह विवाद BJP-कांग्रेस के बीच किस बड़े संघर्ष का हिस्सा है?
यह बयान भाजपा और कांग्रेस के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति को लेकर जारी वाकयुद्ध की नवीनतम कड़ी है। दोनों दल एक-दूसरे पर राष्ट्रीय हितों से समझौता करने का आरोप लगाते रहे हैं, खासकर तब जब कोई संवेदनशील नीतिगत निर्णय चर्चा में आता है।
राष्ट्र प्रेस
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