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यूपी में भाजपा की विदाई तय — कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत का बड़ा दावा

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यूपी में भाजपा की विदाई तय — कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत का बड़ा दावा

सारांश

कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने एक साथ कई मोर्चे खोले — जाति जनगणना की खामियाँ, कंगना रनौत की पितृसत्तावादी सोच, और 1.5 लाख स्कूलों में शौचालय न होने की त्रासदी। सबसे बड़ा दावा: उत्तर प्रदेश की जनता ने तय कर लिया है — भाजपा की इस बार विदाई होगी।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने 25 अगस्त को कहा कि उत्तर प्रदेश में इस बार भाजपा की सत्ता से विदाई होगी।
जाति जनगणना में ओपन-एंडेड सवाल पर आपत्ति — एक ही जाति के अलग-अलग नामों से सटीक गणना मुश्किल।
मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने PM मोदी को जाति सर्वे पर पत्र लिखा है।
देश के करीब 1.5 लाख सरकारी स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय नहीं; लगभग 90 हज़ार स्कूल एक कमरे में एक शिक्षक से चल रहे हैं।
कंगना रनौत की अभिनेत्री के पहनावे पर टिप्पणी को श्रीनेत ने 'पितृसत्तावादी मानसिकता' करार दिया।

कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने 25 अगस्त को नई दिल्ली में जाति जनगणना, सांसद कंगना रनौत की विवादित टिप्पणी, सरकारी स्कूलों की दुर्दशा और उत्तर प्रदेश के आगामी राजनीतिक घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रदेश की जनता ने मन बना लिया है और इस बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) को उत्तर प्रदेश में सत्ता से बाहर होना पड़ेगा।

जाति जनगणना पर सरकार पर निशाना

सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जन आंदोलन के दौरान ही जातिगत सर्वे की माँग उठाई थी। उनके अनुसार, देश में सामाजिक-आर्थिक और जाति सर्वे होना अनिवार्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जाति जनगणना के मामले में पिछड़े, अति-पिछड़े और वंचित वर्गों के खिलाफ षड्यंत्र रच रही है।

श्रीनेत ने सर्वे की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सर्वे में ओपन-एंडेड प्रश्न पूछा जा रहा है — 'आपकी जाति क्या है?' — जबकि देश में एक ही जाति को अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है, जिससे सटीक गणना लगभग असंभव हो जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस विषय पर पत्र लिखा है और सरकार को उस पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।

कंगना रनौत की टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति

भाजपा सांसद कंगना रनौत की एक अभिनेत्री के पहनावे पर की गई टिप्पणी को लेकर सुप्रिया श्रीनेत ने तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि एक निर्वाचित सांसद का दायित्व है कि वे देश के ज़रूरी मुद्दों पर अपनी आवाज़ उठाएँ — न कि किसी महिला के पहनावे, उसकी दोस्ती या उसकी जीवनशैली पर टिप्पणी करें।

उन्होंने इसे 'पितृसत्तावादी मानसिकता' का प्रतीक बताया और कहा कि राहुल गांधी इसी सोच को बदलने की बात करते हैं। श्रीनेत ने यह भी कहा कि यह देखकर दुख होता है कि फिल्मी जगत में अपनी पहचान बनाने वाली एक सशक्त महिला, जो अब सांसद भी हैं, दूसरी अभिनेत्रियों के बारे में इस तरह की टिप्पणी करती हैं। इससे पहले कंगना रनौत द्वारा युवा पीढ़ी को 'जेनरेशन गटर' कहे जाने और किसानों के बारे में दिए गए बयानों का भी उन्होंने उल्लेख किया।

सरकारी स्कूलों की दुर्दशा पर गहरी चिंता

सुप्रिया श्रीनेत ने शिक्षा व्यवस्था की स्थिति पर आँकड़े सामने रखते हुए कहा कि देशभर में करीब 1.5 लाख सरकारी स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय तक नहीं हैं। इसके अलावा, लगभग 90 हज़ार स्कूल ऐसे हैं जो एक ही कमरे में मात्र एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। सरकारी स्कूलों की इमारतें जर्जर हो रही हैं और बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं।

उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था पर खर्च होना चाहिए, लेकिन शिक्षा और स्वास्थ्य को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शिक्षा पर ध्यान नहीं दिया, तो आने वाली पीढ़ी — जिसे उन्होंने 'जेन-अल्फा' कहा — पंखे, खेल मैदान और बुनियादी सुविधाओं के लिए सड़कों पर उतरेगी।

उत्तर प्रदेश में भाजपा की विदाई का दावा

उत्तर प्रदेश के राजनीतिक भविष्य पर बोलते हुए सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि असली मुकाबला यूपी की जनता और भाजपा के बीच है। उनका दावा है कि प्रदेश के लोगों ने इस बार मन बना लिया है और भाजपा को सत्ता से विदाई मिलेगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में विपक्षी दलों की रणनीति और गठबंधन की संभावनाओं पर चर्चा तेज़ है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और यहाँ की राजनीतिक दिशा राष्ट्रीय समीकरणों को गहराई से प्रभावित करती है। कांग्रेस का यह आक्रामक रुख संकेत देता है कि पार्टी 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर अभी से जनमत तैयार करने में जुट गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ज़मीनी आँकड़ों की कसौटी पर इसे परखना ज़रूरी है — 2022 में भाजपा ने 403 में से 255 सीटें जीती थीं। जाति जनगणना पर उनकी आपत्ति तकनीकी रूप से ठोस है; ओपन-एंडेड सवाल वाकई डेटा की विश्वसनीयता को कमज़ोर करता है, और यह सवाल सिर्फ विपक्ष नहीं, जनगणना विशेषज्ञ भी उठाते रहे हैं। शिक्षा पर आँकड़े — 1.5 लाख स्कूलों में शौचालय नहीं — गंभीर हैं और इन पर राष्ट्रीय बहस होनी चाहिए, चाहे सरकार किसी की भी हो। असली परीक्षा यह है कि क्या कांग्रेस इन मुद्दों को चुनावी एजेंडे में बदल पाती है, या ये बयान सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित रहते हैं।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रिया श्रीनेत ने उत्तर प्रदेश में भाजपा की विदाई का दावा क्यों किया?
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि यूपी की जनता ने इस बार मन बना लिया है और भाजपा को सत्ता से बाहर होना पड़ेगा। उनके अनुसार असली मुकाबला प्रदेश की जनता और भाजपा के बीच है।
जाति जनगणना पर कांग्रेस की क्या आपत्ति है?
कांग्रेस का कहना है कि सर्वे में ओपन-एंडेड सवाल पूछा जा रहा है जिससे सटीक जातिगत गणना संभव नहीं, क्योंकि एक ही जाति को अलग-अलग क्षेत्रों में अलग नामों से जाना जाता है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने PM मोदी को इस विषय पर पत्र भी लिखा है।
कंगना रनौत की किस टिप्पणी पर सुप्रिया श्रीनेत ने आपत्ति जताई?
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि कंगना रनौत ने एक अभिनेत्री के पहनावे पर सांसद के रूप में टिप्पणी की, जो पितृसत्तावादी सोच को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि एक निर्वाचित सांसद को देश के ज़रूरी मुद्दों पर बोलना चाहिए, न कि महिलाओं की जीवनशैली पर।
सरकारी स्कूलों की स्थिति पर सुप्रिया श्रीनेत ने क्या आँकड़े दिए?
उन्होंने कहा कि देश के करीब 1.5 लाख सरकारी स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय नहीं हैं और लगभग 90 हज़ार स्कूल एक कमरे में एक ही शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। उन्होंने सरकार से शिक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की माँग की।
उत्तर प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव कब होगा?
उत्तर प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत के बयान को इसी चुनाव की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है, जहाँ विपक्षी दल अभी से जनमत तैयार करने में जुटे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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