महिला आरक्षण बिल के विरोध पर योगी आदित्यनाथ से माफी की मांग: सुप्रिया श्रीनेत
सारांश
मुख्य बातें
बेंगलुरू, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश में विशेष विधानसभा सत्र को बुलाने और विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की खबरों के बीच, कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने योगी सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले सीएम योगी को महिलाओं से माफी मांगनी चाहिए।
सुप्रिया श्रीनेत ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि 2009 में योगी आदित्यनाथ ने महिला आरक्षण का विरोध किया था। इसके लिए उन्हें सबसे पहले हाथ जोड़कर आधी आबादी, नारी शक्ति से माफी मांगनी चाहिए। उत्तर प्रदेश में विशेष सत्र का आयोजन अवश्य किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हाथरस, लखीमपुर, आईआईटी बीएचयू में हुई घटनाएं, प्रदेश में महिलाओं की असुरक्षा और भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह से जुड़े मामलों में हमारी सम्मानित एथलीटों को परेशान करने के मुद्दों पर विशेष सत्र में चर्चा होनी चाहिए। यह दिखाना चाहिए कि कैसे आप ने आंखें बंद कर रखी थीं और महिलाओं पर हो रहे अपराधों के साथ खड़े रहे।
उन्होंने यह भी कहा कि वह बिल, जो सदन में पास नहीं हुआ, वास्तव में एक जबरन और अलोकतांत्रिक परिसीमन का बिल था। हमें कोई संदेह नहीं है कि अगर वह बिल फिर से आएगा तो भी यह पास नहीं होगा।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बयान पर उन्होंने कहा कि 543 सीटों की लोकसभा में एक तिहाई आरक्षण महिलाओं के लिए लागू करने के लिए पूरा विपक्ष तैयार है। तो फिर आप क्यों नहीं उस बिल को ला रहे हैं, जो 543 seats में एक-तिहाई महिलाओं को आरक्षण देता है? असलियत यह है कि महिला आरक्षण में सबसे अधिक रोड़ा पीएम मोदी ही खड़ा कर रहे हैं।
उन्होंने प्रदेश की डबल इंजन सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जहां-जहां इनकी सरकार है, वहां की स्थिति क्या है। दोनों इंजन एक-दूसरे की विपरीत दिशा में भाग रहे हैं। जब भाजपा महिलाओं की बात करती है, तो उसका प्रदर्शन कमजोर है। उनके सांसदों में से केवल 12.9 प्रतिशत महिलाएं हैं, जो लोकसभा के औसत से कम है, और विधायकों में से लगभग 9.9 प्रतिशत महिलाएं हैं, जो राष्ट्रीय औसत से भी कम है। भाजपा को पहले अपने घर को ठीक करना चाहिए।