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योगी सरकार की महिला योजनाएं जमीन पर दिखें: इमरान मसूद का सहारनपुर में तीखा हमला

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योगी सरकार की महिला योजनाएं जमीन पर दिखें: इमरान मसूद का सहारनपुर में तीखा हमला

सारांश

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सहारनपुर में योगी सरकार पर दोहरा हमला बोला — महिला योजनाएं चुनावी दिखावा हैं और कानून-व्यवस्था का दावा खोखला। साथ ही उन्होंने मायावती के एकला-चलो रवैये को बहुजन आंदोलन के लिए नुकसानदेह बताया।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने 27 अगस्त को सहारनपुर में योगी सरकार की महिला योजनाओं को 'देर से आई याद' बताया।
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले घोषित आर्थिक सहायता की किस्तें चुनाव के बाद अटक जाती हैं।
शामली में गायक अंकित बालियान की हत्या के बाद यूपी की कानून-व्यवस्था पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की।
मायावती के अकेले चुनाव लड़ने के फैसले को बहुजन आंदोलन के लिए कमज़ोर करने वाला बताया।
नेपाल बाढ़ पर दुख जताते हुए कहा कि प्रकृति से छेड़छाड़ के गंभीर परिणाम होते हैं।

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने 27 अगस्त को सहारनपुर में पत्रकारों से बातचीत में योगी आदित्यनाथ सरकार की महिला कल्याण योजनाओं, उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था और नेपाल की बाढ़ समेत कई अहम मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को महिलाओं की याद काफी देर से आई है और योजनाओं का असर तब तक बेमानी है जब तक वे धरातल पर नज़र न आएं।

योगी सरकार की योजनाओं पर सवाल

महिलाओं के लिए प्रस्तावित योजनाओं पर मसूद ने कटाक्ष करते हुए कहा कि योगी सरकार को महिलाओं की सुध लेने में बहुत वक्त लग गया। उन्होंने कहा कि रोज़गार, स्टार्टअप और अन्य पहलों के दावे तब तक खोखले हैं जब तक उनका परिणाम ज़मीनी स्तर पर न दिखे। चुनावों से पहले घोषित आर्थिक सहायता योजनाओं का हवाला देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के बाद किस्तों को लेकर स्थिति बदल जाती है। मसूद ने इसे वोट हासिल करने की राजनीति बताते हुए कहा कि यह परंपरा लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है।

सपा रैली और अखिलेश के 'चवन्नी' बयान पर प्रतिक्रिया

समाजवादी पार्टी की रैली रद्द होने पर मसूद ने कहा कि यह सपा का आंतरिक मामला है और इस पर सवाल पार्टी से ही किए जाने चाहिए। अखिलेश यादव के 'चवन्नी' वाले बयान के बारे में उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित नेता ने पहले कही गई बात को दोहराया था और ऐसा कोई वक्तव्य नहीं था जिससे किसी समाज का अपमान होता हो। यह पूछे जाने पर कि क्या इस बयान का राजनीतिक नुकसान अखिलेश को उठाना पड़ेगा, मसूद ने कहा कि राजनीति में इस तरह की भविष्यवाणियों का कोई विशेष महत्व नहीं होता।

व्यापक राजनीतिक परिदृश्य और मायावती पर टिप्पणी

मसूद ने कहा कि देश में इस समय दो विचारधाराओं के बीच संघर्ष चल रहा है — एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं और दूसरी तरफ कांग्रेस नेता राहुल गांधी, जिनके साथ समाजवादी पार्टी (सपा) समेत कई विपक्षी दल खड़े हैं। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती के अकेले चुनाव लड़ने के फैसले पर उन्होंने कहा कि इससे बहुजन आंदोलन कमज़ोर हुआ है और बसपा का राजनीतिक प्रभाव लगातार घटा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में दलितों के विरुद्ध अत्याचार की घटनाओं का उल्लेख करते हुए मायावती पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की तारीफ करने को लेकर भी सवाल उठाए।

कानून-व्यवस्था और एटीएस कार्रवाई पर आरोप

शामली में गायक अंकित बालियान की हत्या के मामले में उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर पूछे गए सवाल पर मसूद ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था 'बहुत अच्छी' है। एटीएस की पूछताछ और सर्च ऑपरेशन पर उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई कथित तौर पर राजनीतिक एजेंडे के तहत लक्षित हो सकती है। उन्होंने आशंका जताई कि कुछ लोगों को आतंकवाद के आरोपों में गिरफ्तार किया जा सकता है और बाद में अदालत से रिहाई मिल सकती है, लेकिन तब तक उनका जीवन प्रभावित हो चुका होगा।

नेपाल बाढ़ और सुप्रीम कोर्ट पर बयान

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ पर मसूद ने गहरा दुख जताया और कहा कि प्रकृति तथा जल-प्रवाह के साथ छेड़छाड़ के गंभीर परिणाम होते हैं। उन्होंने मानसरोवर यात्रा से लौट रहे लोगों से जुड़े कथित वीडियो को बेहद विचलित करने वाला बताया। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची विवाद पर सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यदि न्यायालय को अनियमितता नज़र आती है तो उसे केवल सवाल पूछने तक सीमित नहीं रहना चाहिए — वह सीधे आदेश भी दे सकता है। आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर राजनीतिक बहस और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ हर दल दूसरे की कमज़ोरी को अपनी ताकत बनाने में लगा है। एटीएस कार्रवाई पर 'राजनीतिक एजेंडे' का आरोप गंभीर है, लेकिन बिना प्रमाण के यह केवल आशंका बनकर रह जाता है। असली कसौटी यही है कि विपक्ष आरोपों से आगे बढ़कर सत्यापन-योग्य विकल्प कब पेश करेगा।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इमरान मसूद ने योगी सरकार की महिला योजनाओं पर क्या कहा?
इमरान मसूद ने कहा कि योगी सरकार को महिलाओं की याद काफी देर से आई है और जब तक इन योजनाओं का असर ज़मीनी स्तर पर न दिखे, तब तक इनके दावों का कोई विशेष अर्थ नहीं है। उन्होंने चुनाव से पहले घोषित आर्थिक सहायता की किस्तें बाद में अटकने का भी आरोप लगाया।
अखिलेश यादव के 'चवन्नी' बयान पर मसूद का क्या रुख है?
मसूद ने कहा कि अखिलेश यादव ने पहले कही गई बात को दोहराया था और ऐसा कोई वक्तव्य नहीं था जिससे किसी समाज का अपमान होता हो। उन्होंने यह भी कहा कि इससे अखिलेश को राजनीतिक नुकसान होगा या नहीं, इस तरह की भविष्यवाणियाँ राजनीति में खास महत्व नहीं रखतीं।
मायावती और बसपा पर इमरान मसूद ने क्या टिप्पणी की?
मसूद ने कहा कि मायावती के अकेले चुनाव लड़ने के फैसले से बहुजन आंदोलन कमज़ोर हुआ है और बसपा का राजनीतिक प्रभाव लगातार घटा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में दलितों पर अत्याचार का मुद्दा उठाते हुए मायावती पर BJP की तारीफ करने को लेकर भी सवाल खड़े किए।
शामली में अंकित बालियान की हत्या पर मसूद ने क्या कहा?
गायक अंकित बालियान की हत्या के संदर्भ में यूपी की कानून-व्यवस्था पर पूछे जाने पर मसूद ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था 'बहुत अच्छी' है। यह टिप्पणी सरकार के कानून-व्यवस्था के दावों पर सीधा कटाक्ष थी।
नेपाल बाढ़ पर इमरान मसूद का क्या बयान रहा?
मसूद ने नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ पर गहरा दुख जताया और कहा कि प्रकृति तथा जल-प्रवाह के साथ छेड़छाड़ के गंभीर परिणाम होते हैं। उन्होंने मानसरोवर यात्रा से लौट रहे लोगों से जुड़े कथित वीडियो को बेहद विचलित करने वाला बताया।
राष्ट्र प्रेस
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