यूपी में महिलाओं को ₹50,000 की योजना पर सपा का हमला: 'चुनाव से पहले वादे, जीत के बाद किस्त'
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) ने 13 अगस्त 2026 को लखनऊ में उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने उस चर्चित रिपोर्ट पर सवाल उठाए जिसमें दावा किया जा रहा है कि सरकार महिलाओं को स्वरोजगार के लिए ₹50,000 तक की आर्थिक सहायता देने पर विचार कर रही है। सरकार की ओर से अब तक इस संभावित योजना की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
क्या है वायरल दावा
मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं के बैंक खातों में ₹20,000 की पहली किस्त भेजी जा सकती है। शेष राशि — कथित तौर पर — भारतीय जनता पार्टी (BJP) के तीसरी बार सत्ता में लौटने की स्थिति में अन्य किस्तों में दी जाएगी। हालांकि, योगी सरकार ने इस योजना के बारे में कोई विस्तृत आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
सपा प्रवक्ता का पलटवार
सपा के प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने कहा, 'यदि सरकार की मंशा वास्तव में महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की है, तो यह योजना पहले लागू होनी चाहिए थी।' उन्होंने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ एक समान योजना के बाद महिलाओं से पैसे वापस लेने के मामले सामने आए और विवाद पुलिस थानों से अदालतों तक पहुँचे।
उदयवीर सिंह ने तर्क दिया कि BJP पिछले करीब 10 वर्षों से उत्तर प्रदेश में सत्ता में है। यदि प्रत्येक वर्ष महिलाओं को इस तरह की सहायता दी जाती, तो एक दशक में हर लाभार्थी महिला को ₹5 लाख तक का फायदा मिल सकता था। उन्होंने यह भी पूछा कि हाल ही में पारित अनुपूरक बजट में इस योजना को क्यों नहीं शामिल किया गया।
चुनावी राजनीति का आरोप
सपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि सरकार केवल चुनाव को ध्यान में रखकर योजनाओं की घोषणा करती है और जनता को वादों के जरिए आकर्षित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने विकास परियोजनाओं में अनियमितताओं का भी उल्लेख किया और सरकार की नीयत पर सवाल उठाए। यह ऐसे समय में आया है जब 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर सभी दलों की राजनीतिक सक्रियता तेज हो रही है।
अन्य मुद्दों पर सपा का रुख
झारखंड में छात्र आंदोलन पर उदयवीर सिंह ने कहा कि छात्रों की माँगों पर सरकार का संवाद करना सकारात्मक कदम है और उम्मीद है कि शेष जायज माँगें भी पूरी होंगी। आजम खान को सपा सरकार में गृह मंत्री बनाए जाने की चर्चा पर उन्होंने कहा कि आजम खान और शिवपाल सिंह यादव दोनों पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं; सरकार बनने पर वरिष्ठ नेताओं के मान-सम्मान का पूरा ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने जोड़ा कि इस तरह के सवाल जानबूझकर मीडिया में उछाले जा रहे हैं।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब चुनाव से पहले महिला-केंद्रित नकद हस्तांतरण योजनाओं की चर्चा ने राजनीतिक बहस छेड़ी हो। आने वाले हफ्तों में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस संभावित योजना पर आधिकारिक रुख स्पष्ट करती है या नहीं।