26 अगस्त 2026
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यूपी 2027 से पहले अखिलेश का बड़ा दांव: 'स्त्री सम्मान समृद्धि योजना' में हर महिला को ₹40,000 सालाना

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यूपी 2027 से पहले अखिलेश का बड़ा दांव: 'स्त्री सम्मान समृद्धि योजना' में हर महिला को ₹40,000 सालाना

सारांश

2027 के यूपी चुनाव से पहले अखिलेश यादव ने 'स्त्री सम्मान समृद्धि योजना' के तहत हर महिला को ₹40,000 सालाना देने का वादा किया — लैपटॉप, मुफ्त मेट्रो और 26,000 स्कूल खोलने के साथ। यह सपा का सबसे बड़ा महिला-केंद्रित चुनावी दांव है।

मुख्य बातें

समाजवादी पार्टी ने 26 अगस्त को 'स्त्री सम्मान समृद्धि योजना' का ऐलान किया, जिसमें हर महिला को सालाना ₹40,000 की आर्थिक सहायता का वादा है।
अखिलेश यादव ने कहा कि सत्ता में आने पर इस राशि में आगे बढ़ोतरी भी की जाएगी।
12वीं पास बेटियों को लैपटॉप, छात्राओं के लिए मेट्रो में मुफ्त यात्रा और साइकिल योजना पुनः शुरू करने का वादा।
वर्तमान सरकार द्वारा बंद 26,000 प्राथमिक स्कूलों को फिर खोलने और आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति सुधारने का ऐलान।
डिंपल यादव ने पीडीए फॉर्मूले में 'ए' को 'आधी आबादी' से जोड़ते हुए महिला सशक्तिकरण को पार्टी की प्राथमिकता बताया।
आलोचकों का कहना है कि इन वादों की वित्तीय व्यवहार्यता का विस्तृत खाका अभी सामने नहीं आया है।

समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव और मैनपुरी से सांसद डिंपल यादव ने बुधवार, 26 अगस्त को लखनऊ में एक बड़े चुनावी कार्यक्रम में 'स्त्री सम्मान समृद्धि योजना' का ऐलान किया, जिसके तहत उत्तर प्रदेश की हर महिला को सालाना ₹40,000 की आर्थिक सहायता देने का वादा किया गया है। यह घोषणा 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले सपा की महिला-केंद्रित चुनावी रणनीति का सबसे बड़ा ऐलान मानी जा रही है।

स्त्री सम्मान समृद्धि योजना: मुख्य घटनाक्रम

अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि सपा की सरकार बनने पर ₹40,000 की यह सालाना राशि केवल शुरुआत होगी और आगे इसमें बढ़ोतरी भी की जाएगी। डिंपल यादव ने पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले में 'ए' को 'आधी आबादी' से जोड़ते हुए कहा कि महिलाओं का सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण पार्टी की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने महिलाओं से पुरानी सामाजिक बंदिशों से मुक्त होकर अपने सपनों को पूरा करने की अपील की।

अन्य प्रमुख चुनावी वादे

अखिलेश यादव ने 12वीं पास बेटियों को लैपटॉप देने की योजना दोबारा शुरू करने का ऐलान किया और कहा कि पिछली समाजवादी सरकार में दिए गए लैपटॉप आज भी काम कर रहे हैं। उन्होंने छात्राओं के लिए मेट्रो में कार्ड के माध्यम से मुफ्त यात्रा, महिलाओं के लिए बेहतर परिवहन सुविधाएँ, और सार्वजनिक शौचालयों को 'इज्जतघर' का सम्मानजनक नाम देने की बात कही।

इसके अलावा, वर्तमान सरकार द्वारा बंद किए गए 26,000 प्राथमिक स्कूलों को फिर से खोलने, आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति सुधारने और साइकिल योजना को पुनः लागू करने का भी वादा किया गया।

भाजपा पर सीधा हमला

सपा अध्यक्ष ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधते हुए कहा कि 'भाजपा के लिए नारी सिर्फ एक राजनीतिक नारा बनकर रह गई है।' उन्होंने हाथरस और अन्य घटनाओं का हवाला देते हुए प्रदेश में महिलाओं के साथ कथित अन्याय का मुद्दा उठाया। उन्होंने यह भी कहा कि जब महिला आरक्षण कानून पारित हो चुका है तो उसे लागू करने में देरी क्यों की जा रही है और माँग की कि आगामी चुनाव में ही इसे लागू किया जाए।

यूपी सरकार की 'लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना' पर व्यंग्य करते हुए अखिलेश यादव ने कहा, 'हमें अपने ऑफिस को फुल शील्ड रखना होगा। हमारी योजनाएं वहां तक पहुंच रही हैं। इसी का परिणाम है कि बुजुर्ग महिलाओं के लिए बस फ्री यात्रा कर दी गई है।' उन्होंने पिछली सपा सरकार द्वारा शुरू की गई 1090 महिला हेल्पलाइन और 102 एंबुलेंस सेवा का उल्लेख करते हुए सपा के महिला-कल्याण के ट्रैक रिकॉर्ड का दावा किया।

आम जनता पर असर

यदि सपा सत्ता में आती है, तो ₹40,000 की सालाना सहायता उत्तर प्रदेश की करोड़ों महिलाओं के लिए सीधी आर्थिक राहत होगी। गौरतलब है कि यह वादा देश के अन्य राज्यों में लागू महिला-केंद्रित नकद हस्तांतरण योजनाओं — जैसे मध्य प्रदेश की 'लाड़ली बहना' और तेलंगाना की 'महालक्ष्मी' — की तर्ज पर है, जो चुनावी राजनीति में निर्णायक साबित हुई हैं। यह ऐसे समय में आया है जब यूपी में महिला मतदाताओं की संख्या और उनकी भागीदारी लगातार बढ़ रही है।

क्या होगा आगे

सपा ने इन घोषणाओं को 2027 विधानसभा चुनाव में अपना प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाने के संकेत दे दिए हैं। पार्टी अब महिला मतदाताओं को सीधे साधने की रणनीति के तहत प्रदेश भर में इस योजना का प्रचार करेगी। आलोचकों का कहना है कि इन वादों की वित्तीय व्यवहार्यता और क्रियान्वयन का खाका अभी स्पष्ट नहीं किया गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 सालाना का वादा मध्य प्रदेश की 'लाड़ली बहना' योजना की सीधी नकल जैसा दिखता है — जिसने 2023 में भाजपा को सत्ता में वापस लाने में अहम भूमिका निभाई। विडंबना यह है कि सपा उसी हथियार को भाजपा के खिलाफ आजमा रही है जो भाजपा ने पहले तेज किया। असली सवाल वित्तीय है: उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में करोड़ों महिलाओं को ₹40,000 सालाना देने की लागत बजट पर भारी पड़ेगी, और सपा ने अभी तक इसका कोई ठोस वित्तीय खाका पेश नहीं किया। बिना क्रियान्वयन के रोडमैप के, यह घोषणा चुनावी वादों की उस लंबी सूची में जुड़ने का जोखिम उठाती है जो सत्ता मिलने पर 'संशोधित' हो जाती हैं।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सपा की 'स्त्री सम्मान समृद्धि योजना' क्या है?
यह समाजवादी पार्टी द्वारा 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले घोषित एक महिला-केंद्रित योजना है, जिसके तहत सपा की सरकार बनने पर उत्तर प्रदेश की हर महिला को सालाना ₹40,000 की आर्थिक सहायता देने का वादा किया गया है। अखिलेश यादव ने कहा कि भविष्य में इस राशि को और बढ़ाया जाएगा।
अखिलेश यादव ने महिलाओं के लिए और क्या वादे किए?
अखिलेश यादव ने 12वीं पास बेटियों को लैपटॉप, छात्राओं के लिए मेट्रो में कार्ड से मुफ्त यात्रा, बंद 26,000 प्राथमिक स्कूलों को फिर खोलने, साइकिल योजना की वापसी, बेहतर सार्वजनिक शौचालय ('इज्जतघर') और महिला आरक्षण को तत्काल लागू करने की माँग सहित कई वादे किए।
डिंपल यादव ने पीडीए में 'ए' को 'आधी आबादी' से क्यों जोड़ा?
डिंपल यादव ने सपा के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को विस्तार देते हुए 'ए' को 'आधी आबादी' यानी महिलाओं से जोड़ा, ताकि यह संदेश दिया जा सके कि महिलाएँ भी पार्टी के मुख्य राजनीतिक आधार का हिस्सा हैं। यह 2027 चुनाव में महिला मतदाताओं को सीधे साधने की रणनीति का हिस्सा है।
अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर क्या आरोप लगाए?
अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा के लिए नारी सिर्फ एक राजनीतिक नारा है। उन्होंने हाथरस और अन्य घटनाओं का हवाला देते हुए प्रदेश में महिलाओं के साथ कथित अन्याय का मुद्दा उठाया और महिला आरक्षण कानून लागू न करने पर केंद्र सरकार की आलोचना की।
क्या इन वादों की वित्तीय व्यवहार्यता स्पष्ट है?
आलोचकों का कहना है कि उत्तर प्रदेश की करोड़ों महिलाओं को ₹40,000 सालाना देने की लागत बेहद बड़ी होगी और सपा ने अभी तक इसका विस्तृत वित्तीय खाका सार्वजनिक नहीं किया है। यह योजना सत्ता में आने पर लागू होने की शर्त पर निर्भर है।
राष्ट्र प्रेस
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