तमिलनाडु में तमिल माध्यम उम्मीदवारों को सरकारी नौकरियों में 20% कोटा, गवर्नर अर्लेकर ने दी मंजूरी
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने 26 अगस्त 2026 को तमिल माध्यम से पूरी शिक्षा प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों के लिए सरकारी नौकरियों में 20 प्रतिशत प्राथमिकता कोटा के संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी। यह प्रावधान केवल सीधी भर्ती से भरी जाने वाली रिक्तियों पर लागू होगा और पहले से नियुक्त कर्मचारियों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
पृष्ठभूमि: 2010 का कानून और अदालती पेच
तमिलनाडु सरकार ने 2010 में एक कानून के ज़रिए सीधी भर्ती की 20 प्रतिशत रिक्तियाँ तमिल-माध्यम से योग्यता प्राप्त उम्मीदवारों के लिए आरक्षित की थीं। उस समय यह स्पष्ट नहीं था कि पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारी भी इस कोटे का लाभ उठा सकते हैं या नहीं।
बाद में मद्रास उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि 7 सितंबर 2010 के बाद सरकारी सेवा में आए कर्मचारी तमिल-माध्यम श्रेणी के तहत प्राथमिकता का दावा करने के पात्र नहीं हैं। इस निर्णय से उत्पन्न कानूनी अनिश्चितता को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने जनवरी 2026 में विधानसभा में एक संशोधन विधेयक पेश किया, जिसे अब राज्यपाल की स्वीकृति मिल गई है।
संशोधित कानून में क्या बदला
संशोधित प्रावधानों के अनुसार, कोटे का लाभ उठाने के लिए उम्मीदवार को कक्षा 1 से लेकर पद के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता तक की समस्त पढ़ाई तमिल माध्यम में पूरी करनी होगी। केवल तमिल भाषा में परीक्षा देना इस कोटे के लिए पर्याप्त नहीं माना जाएगा।
जिन उम्मीदवारों ने किसी अन्य भाषा को शिक्षा के माध्यम के रूप में अपनाया और बाद में परीक्षाएँ तमिल में दीं, वे इस प्राथमिकता के दायरे से बाहर रहेंगे। इसके अतिरिक्त, जो विद्यार्थी किसी अन्य राज्य में तमिल-माध्यम विद्यालय से पढ़कर बाद में तमिलनाडु में अपनी शिक्षा जारी रखते हैं, वे उस कक्षा से पात्र माने जाएँगे जिसमें उन्होंने तमिलनाडु में प्रवेश लिया — बशर्ते वे सभी निर्धारित शर्तें पूरी करें।
दस्तावेज़ीकरण और पात्रता की शर्तें
आवेदकों को पद के लिए आवश्यक योग्यता तक जिन-जिन संस्थानों में उन्होंने अध्ययन किया है, वहाँ से तमिल माध्यम में पढ़ाई की पुष्टि करने वाले प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने होंगे। यह व्यवस्था दावों की एकसमान जाँच सुनिश्चित करने के लिए की गई है।
गौरतलब है कि यह संशोधन केवल भविष्य की नई भर्तियों पर लागू होगा। 7 सितंबर 2010 से पहले या बाद में की गई पुरानी नियुक्तियों पर इसका कोई पूर्वव्यापी प्रभाव नहीं पड़ेगा।
संशोधन का उद्देश्य
राज्य सरकार के अनुसार, इस संशोधन का मुख्य लक्ष्य अदालती फैसले से उत्पन्न कानूनी अस्पष्टता को समाप्त करना, कोटे की पात्रता को स्पष्ट रूप से परिभाषित करना और उन उम्मीदवारों के हितों की रक्षा करना है जिन्होंने वास्तव में तमिल माध्यम से अपनी संपूर्ण शिक्षा पूरी की है।
आगे क्या
राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह संशोधित कानून तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। अब भर्ती एजेंसियों को नए दिशानिर्देशों के अनुसार पात्रता की जाँच करनी होगी। यह कदम ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में भाषा-आधारित शैक्षणिक नीतियों को लेकर व्यापक बहस जारी है।