31 जुलाई 2026
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तमिलनाडु CM विजय का केंद्र से आग्रह: ₹3,284 करोड़ की शिक्षा निधि NEP शर्त से मुक्त कर जारी करें

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तमिलनाडु CM विजय का केंद्र से आग्रह: ₹3,284 करोड़ की शिक्षा निधि NEP शर्त से मुक्त कर जारी करें

सारांश

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने नीति आयोग की बैठक में केंद्र के सामने ₹3,284 करोड़ की शिक्षा निधि, वित्तीय संघवाद, तिरुक्कुरल को राष्ट्रीय साहित्य का दर्जा और मछुआरों की रिहाई — चार बड़े मुद्दे एक साथ रखे। NEP से फंड जोड़ने का विरोध दक्षिण-केंद्र तनाव की पुरानी कड़ी है।

मुख्य बातें

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी.
जोसेफ विजय ने 11 जून 2026 को नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक में ₹3,284 करोड़ की लंबित शिक्षा निधि जारी करने की माँग की।
उन्होंने कहा कि यह निधि NEP 2020 या त्रिभाषा नीति के अनुपालन से नहीं जोड़ी जानी चाहिए।
विजय ने वित्तीय संघवाद का मुद्दा उठाते हुए जनसंख्या नियंत्रण और वित्तीय अनुशासन में अग्रणी राज्यों को उचित प्रोत्साहन देने की माँग की।
केंद्र से 'तिरुक्कुरल' को भारत का राष्ट्रीय साहित्य घोषित करने का आग्रह किया गया।
श्रीलंका और पाकिस्तान में हिरासत में बंद तमिलनाडु के मछुआरों की सुरक्षित वापसी के लिए तत्काल कूटनीतिक हस्तक्षेप की अपील की गई।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 11 जून 2026 को नई दिल्ली में केंद्र सरकार से राज्य की लंबित ₹3,284 करोड़ की शिक्षा निधि तत्काल जारी करने की माँग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस राशि को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 या त्रिभाषा नीति के अनुपालन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। यह माँग उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक में रखी।

शिक्षा निधि और NEP विवाद

मुख्यमंत्री विजय ने बैठक में कहा कि शिक्षा एक संवैधानिक दायित्व है और स्कूली शिक्षा के लिए दी जाने वाली वित्तीय सहायता को नीतिगत मतभेदों के आधार पर रोका नहीं जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि तमिलनाडु ने शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है और राज्य को मिलने वाली निधि को NEP अथवा तीन-भाषा फॉर्मूले को अपनाने की शर्त से नहीं बाँधा जाना चाहिए।

विजय ने तमिलनाडु की द्विभाषा नीति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि इसी मॉडल के ज़रिए राज्य ने साक्षरता दर, उच्च शिक्षा में नामांकन और मानव विकास सूचकांकों में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। गौरतलब है कि यह टकराव नया नहीं है — तमिलनाडु सहित कई दक्षिणी राज्य लंबे समय से NEP की त्रिभाषा नीति का विरोध करते आए हैं।

वित्तीय संघवाद पर जोर

मुख्यमंत्री ने वित्तीय संघवाद (Fiscal Federalism) का मुद्दा उठाते हुए केंद्र से राज्यों के बीच संसाधनों का निष्पक्ष वितरण सुनिश्चित करने की माँग की। उन्होंने कहा कि जो राज्य वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हैं, सामाजिक विकास के मानकों में सुधार करते हैं और जनसंख्या नियंत्रण के उपायों को सफलतापूर्वक लागू करते हैं, उन्हें उचित प्रोत्साहन और मान्यता मिलनी चाहिए।

विजय ने यह भी रेखांकित किया कि तमिलनाडु सहित कई दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या वृद्धि को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया है और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे में इन राज्यों को संसाधन आवंटन या संसदीय प्रतिनिधित्व में किसी प्रकार का नुकसान नहीं होना चाहिए।

तिरुक्कुरल को राष्ट्रीय साहित्य घोषित करने की माँग

बैठक में मुख्यमंत्री विजय ने केंद्र सरकार से महान तमिल साहित्यिक कृति 'तिरुक्कुरल' को भारत का राष्ट्रीय साहित्य घोषित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि संत कवि तिरुवल्लुवर द्वारा रचित यह ग्रंथ भाषा, क्षेत्र और धर्म की सीमाओं से परे मानवता के लिए सार्वभौमिक मूल्यों का संदेश देता है।

मछुआरों की रिहाई की अपील

विजय ने श्रीलंका और पाकिस्तान में हिरासत में रखे गए तमिलनाडु के मछुआरों और उनकी नौकाओं का मुद्दा भी बैठक में उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार से तत्काल कूटनीतिक प्रयास कर इन मछुआरों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि हज़ारों तटीय परिवारों की आजीविका मत्स्य पालन पर निर्भर है, इसलिए बार-बार होने वाली गिरफ्तारियों को रोकने के लिए निरंतर कूटनीतिक संवाद आवश्यक है।

बैठक का समग्र संदेश

नीति आयोग की इस बैठक में मुख्यमंत्री विजय ने शिक्षा, राज्यों के अधिकार, सांस्कृतिक पहचान और मछुआरों के कल्याण से जुड़े कई अहम मुद्दे उठाए। उन्होंने संघीय ढाँचे में राज्यों की स्वायत्तता और समान व्यवहार की माँग को दोहराया। यह देखना होगा कि केंद्र सरकार इन माँगों पर क्या रुख अपनाती है और ₹3,284 करोड़ की निधि कब तक जारी होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह सहकारी संघवाद की मूल भावना पर सवाल खड़ा करता है। दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में जो अनुशासन दिखाया, उसी के चलते परिसीमन में उनकी सीटें घटने का खतरा है — और अब शिक्षा फंड भी शर्तों में उलझा है। यह दोहरी मार है जिस पर राष्ट्रीय बहस अपेक्षित गहराई से नहीं हो रही।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु की ₹3,284 करोड़ की शिक्षा निधि क्यों रोकी गई है?
रिपोर्टों के अनुसार, यह निधि NEP 2020 और त्रिभाषा नीति के अनुपालन से जोड़े जाने के कारण लंबित है। मुख्यमंत्री विजय का कहना है कि संवैधानिक शिक्षा सहायता को नीतिगत मतभेदों के आधार पर नहीं रोका जाना चाहिए।
तमिलनाडु NEP 2020 की त्रिभाषा नीति का विरोध क्यों करता है?
तमिलनाडु दशकों से द्विभाषा नीति (तमिल और अंग्रेज़ी) पर चलता आया है और हिंदी को तीसरी अनिवार्य भाषा के रूप में स्वीकार करने से इनकार करता है। राज्य का तर्क है कि इसी मॉडल से उसने साक्षरता और मानव विकास में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है।
नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक में CM विजय ने कौन-से मुद्दे उठाए?
विजय ने चार प्रमुख मुद्दे उठाए — ₹3,284 करोड़ की शिक्षा निधि की रिहाई, वित्तीय संघवाद और न्यायपूर्ण संसाधन वितरण, 'तिरुक्कुरल' को राष्ट्रीय साहित्य का दर्जा, और श्रीलंका व पाकिस्तान में हिरासत में बंद तमिल मछुआरों की वापसी।
तिरुक्कुरल को राष्ट्रीय साहित्य घोषित करने की माँग का क्या महत्व है?
संत कवि तिरुवल्लुवर द्वारा रचित 'तिरुक्कुरल' तमिल साहित्य की सबसे प्राचीन और सम्मानित कृतियों में से एक है। CM विजय का कहना है कि यह ग्रंथ भाषा, क्षेत्र और धर्म से परे सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए इसे राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलनी चाहिए।
तमिलनाडु के मछुआरों का श्रीलंका और पाकिस्तान में हिरासत का मुद्दा क्या है?
तमिलनाडु के मछुआरे समुद्री सीमा उल्लंघन के आरोप में श्रीलंका और पाकिस्तान द्वारा समय-समय पर हिरासत में लिए जाते हैं। CM विजय ने केंद्र से तत्काल कूटनीतिक हस्तक्षेप की माँग की है, क्योंकि हज़ारों तटीय परिवारों की आजीविका इन मछुआरों पर निर्भर है।
राष्ट्र प्रेस
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