तमिलनाडु में 3.5 लाख खाली पदों के बीच रिटायर अधिकारियों-सलाहकारों की पुनर्नियुक्ति की समीक्षा शुरू
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु सरकार ने 10 जून 2026 को राज्य के विभिन्न विभागों में कॉन्ट्रैक्ट या पुनर्नियुक्ति पर कार्यरत सेवानिवृत्त अधिकारियों और सलाहकारों की भूमिका की व्यापक समीक्षा शुरू की है। यह कदम सरकारी व्यय में कटौती और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में उठाया गया है, जबकि राज्य के सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों और सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों में लगभग 3.5 लाख पद रिक्त पड़े हैं।
समीक्षा का दायरा और प्रक्रिया
ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट विभाग (HRMD) ने सभी विभागों के सचिवों को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने-अपने विभागों में कार्यरत सलाहकारों, कंसल्टेंट्स और सेवानिवृत्त कर्मचारियों का पूरा ब्यौरा उपलब्ध कराएँ। सूत्रों के अनुसार, इस जानकारी के आधार पर यह आकलन किया जाएगा कि इन नियुक्तियों की वास्तविक आवश्यकता है या नहीं, और क्या इनके द्वारा संभाले जा रहे प्रशासनिक कार्य नियमित सरकारी कर्मचारियों को सौंपे जा सकते हैं।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि यह समीक्षा उस व्यापक मूल्यांकन प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसके तहत पिछली द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) सरकार के कार्यकाल में की गई नियुक्तियों की मौजूदा प्रशासन के संदर्भ में प्रासंगिकता जाँची जा रही है।
रिक्त पदों का संकट और युवा रोजगार
गौरतलब है कि राज्य में 3.5 लाख से अधिक सरकारी पद रिक्त हैं। माना जा रहा है कि तमिलनाडु विकास कियार्गम (TVK) के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार नई भर्तियों के माध्यम से इन पदों को भरने पर विचार कर रही है, ताकि सरकारी नौकरी की प्रतीक्षा में बैठे योग्य युवाओं को अवसर मिल सके। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब राज्य में शिक्षित बेरोजगारी एक गंभीर चुनौती बनी हुई है।
सूत्रों के अनुसार, कई विभागों ने पिछले कुछ वर्षों में तकनीकी और विशेषज्ञता-आधारित कार्यों के लिए सलाहकारों एवं सेवानिवृत्त अधिकारियों को नियुक्त किया था। कुछ मामलों में इन कंसल्टेंट्स को लाखों रुपए मासिक के कॉन्ट्रैक्ट पर रखा गया था।
कर्मचारी संघ की प्रतिक्रिया
तमिलनाडु सचिवालय संघ के अध्यक्ष के. वेंकटेशन ने सरकार की इस पहल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि संघ ने हमेशा सेवानिवृत्त अधिकारियों की बड़े पैमाने पर पुनर्नियुक्ति और सरकारी विभागों में कंसल्टेंट्स पर बढ़ती निर्भरता का विरोध किया है। वेंकटेशन ने कहा कि संघ लगातार सरकारों से नियमित भर्ती को प्राथमिकता देने और युवा उम्मीदवारों को अधिक अवसर देने की माँग करता रहा है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
हालाँकि वरिष्ठ अधिकारियों ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। उनके अनुसार, कानून, वित्त और नगर प्रशासन जैसे विभाग अभी भी कानूनी विशेषज्ञों, वित्तीय सलाहकारों और विषय विशेषज्ञों पर निर्भर हैं, जिनकी विशेषज्ञता महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णयों और प्रशासनिक कार्यों में सहायक होती है। अधिकारियों ने कहा कि ऐसी नियुक्तियाँ घटाने या समाप्त करने के किसी भी निर्णय के लिए सुनियोजित रणनीति आवश्यक होगी, ताकि आवश्यक सेवाओं में बाधा न आए।
आगे की राह
सरकारी सूत्रों के अनुसार, सभी विभागों की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद समेकित जानकारी मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी, जो आगे की नीतिगत कार्रवाई पर अंतिम निर्णय लेंगे। इस समीक्षा के परिणाम राज्य में सरकारी भर्ती नीति की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।