यूपी विधानसभा का विशेष सत्र: सपा नेताओं ने बताया राजनीतिक लाभ का खेल, 131वें संशोधन विधेयक पर निंदा प्रस्ताव
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सारांश
यूपी विधानसभा का यह विशेष सत्र सिर्फ संसदीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि चुनावी मौसम से पहले महिला मतदाताओं को लुभाने की कोशिश बन गया है। सपा ने महिला आरक्षण का समर्थन करते हुए भी BJP पर राजनीतिक नाटकबाजी का आरोप लगाया और दलित व पिछड़ी महिलाओं को भी हिस्सेदारी देने की माँग उठाई।
Key Takeaways
30 अप्रैल 2025 को लखनऊ में यूपी विधानसभा का विशेष एक-दिवसीय सत्र आयोजित हुआ। सत्र का एजेंडा संसद में 131वें संविधान संशोधन विधेयक की हार पर निंदा प्रस्ताव था। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय समेत सपा के कई नेताओं ने इसे राजनीतिक लाभ के लिए बुलाया गया सत्र बताया। सपा नेता शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि महिला आरक्षण बिल 2023 में पास हो चुका है, उसे तुरंत लागू किया जाए। सपा ने माँग की कि महिला आरक्षण में दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक महिलाओं को भी शामिल किया जाए।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में 30 अप्रैल 2025 को एक विशेष एक-दिवसीय सत्र आयोजित किया गया, जिसमें संसद में 131वें संविधान संशोधन विधेयक की हार के संदर्भ में निंदा प्रस्ताव पर चर्चा का एजेंडा रखा गया। समाजवादी पार्टी (सपा) के नेताओं ने इस सत्र को सीधे तौर पर राजनीतिक लाभ के लिए आयोजित बताया और भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर महिलाओं को गुमराह करने का आरोप लगाया।
नेता प्रतिपक्ष का रुख
उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने पत्रकारों से कहा,
Point of View
दूसरी तरफ परिसीमन की शर्त पर आपत्ति जताती है। असली सवाल यह है कि 21 सितंबर 2023 को पारित और अधिसूचित हो चुके कानून को लागू करने में देरी क्यों हो रही है — और इस पर दोनों पक्ष चुप हैं।
NationPress
30/04/2026
Frequently Asked Questions
यूपी विधानसभा का विशेष सत्र 30 अप्रैल को क्यों बुलाया गया?
यह सत्र संसद में 131वें संविधान संशोधन विधेयक की हार के संदर्भ में निंदा प्रस्ताव पर चर्चा के लिए बुलाया गया। सपा नेताओं ने इसे राजनीतिक लाभ के लिए आयोजित बताया।
131वाँ संविधान संशोधन विधेयक क्या है?
यह विधेयक महिला आरक्षण से संबंधित था, जो संसद में पारित नहीं हो सका। इसी की हार पर यूपी विधानसभा में निंदा प्रस्ताव लाया गया।
सपा का महिला आरक्षण पर क्या रुख है?
समाजवादी पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन उसकी माँग है कि इसमें दलित, पिछड़े वर्ग और अल्पसंख्यक महिलाओं को भी शामिल किया जाए। पार्टी परिसीमन प्रक्रिया से आरक्षण जोड़ने का विरोध करती है।
महिला आरक्षण बिल 2023 का क्या हुआ?
महिला आरक्षण विधेयक 21 सितंबर 2023 को राज्यसभा से पारित हुआ और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अधिसूचित भी हो चुका है। सपा विधायक राकेश कुमार वर्मा के अनुसार, सरकार को इसे तत्काल लागू करना चाहिए।
शिवपाल सिंह यादव ने विशेष सत्र पर क्या कहा?
शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि यह सत्र ऊपर से आए संदेश पर बुलाया गया है और सरकार का एकमात्र एजेंडा महिलाओं को अपने पक्ष में दिखाना है। उन्होंने इसे राजनीतिक स्वार्थ का खेल बताया।