खड़गे के सभास्थल के 'शुद्धिकरण' पर कांग्रेस का पलटवार, 14 अगस्त को हर जिले में मार्च
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की उत्तराखंड के हल्द्वानी में आयोजित रैली के मंच को हिंदू दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा कथित तौर पर गंगाजल से 'शुद्ध' किए जाने की घटना के विरोध में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने देशव्यापी प्रतिक्रिया का ऐलान किया है। 14 अगस्त 2026 की शाम को पार्टी हर जिले में मार्च और सत्याग्रह का आयोजन करेगी। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पार्टी कार्यकर्ताओं को पत्र लिखकर इस कार्यक्रम की रूपरेखा सामने रखी है।
क्या हुआ हल्द्वानी में
रिपोर्टों के अनुसार, उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस की रैली समाप्त होने के बाद हिंदू दक्षिणपंथी संगठनों ने उस मैदान पर गंगाजल से तथाकथित 'शुद्धिकरण' की रस्म अदा की। इन संगठनों का तर्क था कि मंच पर खड़गे की उपस्थिति से वह स्थान 'अपवित्र' हो गया था। इस घटना ने राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया उत्पन्न की है।
वेणुगोपाल ने क्या कहा
केसी वेणुगोपाल ने अपने पत्र में इस घटना को 'बेहद घिनौनी हरकत' करार देते हुए कहा कि यह भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा फैलाई गई भेदभावपूर्ण सोच को उजागर करती है। उन्होंने लिखा, "यह शर्मनाक और पिछड़ी हरकत न केवल कांग्रेस अध्यक्ष का अपमान है, बल्कि यह करोड़ों भारतीयों की गरिमा और समानता, भाईचारे, सामाजिक न्याय और मानवीय गरिमा जैसे संवैधानिक मूल्यों का भी अपमान है।" वेणुगोपाल ने स्पष्ट किया कि भारत के संविधान-आधारित लोकतांत्रिक समाज में ऐसी भेदभावपूर्ण प्रथाओं के लिए कोई स्थान नहीं है।
मार्च और सत्याग्रह की रूपरेखा
वेणुगोपाल ने सभी जिला कांग्रेस कमेटियों (DCC) को 14 अगस्त 2026 की शाम एक बड़े मार्च और सत्याग्रह के आयोजन का निर्देश दिया है। यह मार्च संबंधित DCC के नेतृत्व में निकाला जाएगा और महात्मा गांधी या डॉ. बी. आर. अंबेडकर की प्रतिमा के पास समाप्त होगा। वहाँ भेदभाव के विरुद्ध कड़ा विरोध दर्ज कराने और खड़गे के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए सत्याग्रह किया जाएगा।
किन्हें किया गया आमंत्रित
पत्र में वेणुगोपाल ने ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों, फ्रंटल संगठनों, विभागों, सेलों, चुने हुए प्रतिनिधियों, वरिष्ठ नेताओं और सभी स्तरों के कार्यकर्ताओं से सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने जोर दिया कि हर जिले में अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित की जाए ताकि यह स्पष्ट संदेश जाए कि कांग्रेस और भारत के लोग छुआछूत या संवैधानिक गरिमा को कमज़ोर करने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं करेंगे।
आगे क्या होगा
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब देश 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी में है। गौरतलब है कि जातीय भेदभाव और सामाजिक न्याय के मुद्दे हाल के वर्षों में राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ गए हैं। कांग्रेस का यह कदम आगामी राज्य चुनावों से पहले सामाजिक न्याय की राजनीति को धार देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।