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क्या देव दीपावली पर सुख समृद्धि पाने के लिए ये काम करना चाहिए?

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क्या देव दीपावली पर सुख समृद्धि पाने के लिए ये काम करना चाहिए?

सारांश

देव दीपावली का पर्व सिर्फ दीप जलाने का नहीं, बल्कि इसे मनाने से जुड़ी कई मान्यताएँ भी हैं। जानिए इस दिन किए जाने वाले विशेष कार्य और उनकी महत्ता के बारे में।

मुख्य बातें

कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली मनाना एक महत्वपूर्ण परंपरा है।
इस दिन विशेष पूजा और उपायों से सुख समृद्धि प्राप्त की जा सकती है।
गुरु नानक जयंती का भी इस दिन विशेष महत्व है।

नई दिल्ली, 4 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 5 नवंबर को शाम 6 बजकर 48 मिनट तक रहेगी। इसके बाद अगहन महीने की प्रतिपदा तिथि प्रारंभ होगी। इस दिन देव दीपावली, गुरु नानक जयंती, पुष्कर स्नान और कार्तिक पूर्णिमा व्रत मनाए जाते हैं।

द्रिक पंचांग के अनुसार, बुधवार को अभिजीत मुहूर्त नहीं है और राहुकाल का समय दोपहर 12 बजकर 4 मिनट से शुरू होकर 1 बजकर 27 मिनट तक रहेगा।

देव दीपावली का उल्लेख शिव पुराण और पद्म पुराण में मिलता है। शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव ने त्रिपुरासुर राक्षस का वध किया था, जिसके उपरांत देवताओं ने कार्तिक पूर्णिमा के दिन काशी में दीप जलाकर देव दीपावली का उत्सव मनाया।

इस दिन भोलेनाथ की स्तुति और राम भक्त हनुमान की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करने से हनुमान भगवान शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

ज्योतिष के अनुसार, देव दीपावली पर राहु-केतु, मंगल, गुरु, बुध और शनि ग्रहों से दोष हटाने के लिए विशेष उपाय किए जाते हैं। इसके अलावा, घर में वास्तु दोष दूर करने और सुख समृद्धि पाने के लिए घर के हर कोने में गंगाजल का छिड़काव करना लाभकारी होता है।

कार्तिक माह को दामोदर मास भी कहा जाता है। इस दिन गंगा स्नान, व्रत, दान और चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा है। मान्यता है कि भगवान विष्णु मत्स्य रूप में जल में विराजमान रहते हैं, इसलिए दीपदान किया जाता है। इसके अतिरिक्त वैकुंठ चतुर्दशी के पूजन का भी विशेष महत्व है, जब भगवान विष्णु ने भगवान शिव का पूजन किया था।

सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी का जन्म भी 1469 में कार्तिक पूर्णिमा को हुआ था। इसे गुरु पर्व या प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है।

सिख समुदाय सुबह अमृत वेला में गुरुद्वारों में एकत्रित होकर कीर्तन, लंगर और नगर कीर्तन निकालते हैं। साथ ही स्वर्ण मंदिर, अमृतसर में विशेष आतिशबाजी और प्रकाश व्यवस्था होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

देव दीपावली का पर्व न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक है। इस दिन की मान्यताएँ और परंपराएँ हमें हमारे सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ती हैं।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

देव दीपावली के दिन क्या विशेष काम करना चाहिए?
इस दिन भगवान शिव की पूजा, हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाना और घर में गंगाजल का छिड़काव करना चाहिए।
देव दीपावली का महत्व क्या है?
यह दिन भगवान शिव के त्रिपुरासुर राक्षस का वध करने की खुशी में मनाया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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