कृष्ण वामन द्वादशी: विजय मुहूर्त एवं त्रिपुष्कर योग की जानकारी, राहुकाल को ध्यान में रखें
सारांश
Key Takeaways
- कृष्ण वामन द्वादशी का पर्व विशेष महत्व रखता है।
- इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।
- विशेष मुहूर्तों का ध्यान रखें।
- राहुकाल में कार्य करने से बचें।
- त्रिपुष्कर योग का लाभ उठाएं।
नई दिल्ली, 13 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल द्वादशी के लगभग पंद्रह दिन बाद मनाई जाने वाली कृष्ण वामन द्वादशी पर्व का महत्व विशेष है। इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
भगवान वामन को नारायण का पाँचवाँ अवतार माना जाता है। हिंदू धर्मग्रंथों में वामन अवतार की कथा राजा बलि से जुड़ी हुई है, जिसमें भगवान विष्णु ने छोटे ब्राह्मण रूप में तीन पग भूमि दान लेकर असुर राजा बलि को वश में किया था। इस दिन विष्णु भक्त उपवास रखते हैं। द्वादशी तिथि भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय होती है, इसलिए इस दिन व्रत और पूजन करने से भगवान प्रसन्न होते हैं और भक्तों को धन-धान्य एवं सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
कृष्ण वामन द्वादशी पर सूर्योदय 5:57 मिनट पर और सूर्यास्त 6:46 मिनट पर होगा। यह द्वादशी तिथि रविवार को पूरे दिन रहेगी और अगले दिन (15 अप्रैल) को रात 12:12 मिनट तक जारी रहेगी। नक्षत्र शतभिषा दोपहर 4:06 मिनट तक रहेगा, इसके बाद पूर्व भाद्रपद नक्षत्र रहेगा। योग शुक्ल दोपहर 3:40 मिनट तक और करण कौलव दोपहर 12:46 मिनट तक प्रभावी रहेगा।
14 अप्रैल के शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:27 से 5:12 मिनट तक, अभिजित मुहूर्त 11:56 से 12:47 मिनट तक, विजय मुहूर्त 2:30 से 3:21 मिनट तक, और गोधूलि मुहूर्त 6:45 से 7:07 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा, अमृत काल सुबह 8:53 से 10:29 मिनट तक रहेगा। त्रिपुष्कर योग शाम 5:06 से अगले दिन देर रात 12:12 मिनट तक प्रभावी रहेगा।
अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 3:34 से 5:10 मिनट तक, यमगंड सुबह 9:09 से 10:45 मिनट तक, और गुलिक काल दोपहर 12:22 से 1:58 मिनट तक रहेगा। पंचक पूरे दिन प्रभावी रहेगा।