महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए स्टालिन से परिसीमन बिल का समर्थन मांगा अठावले ने
सारांश
Key Takeaways
- महिलाओं के लिए 273 सीटों का आरक्षण
- परिसीमन का उद्देश्य सशक्तीकरण है
- दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व नहीं घटेगा
- राजनीतिक दलों का एकजुट होना आवश्यक है
- विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी गई है
चेन्नई, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने बुधवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से परिसीमन बिल को समर्थन देने की प्रार्थना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बिल का उद्देश्य महिलाओं का सशक्तीकरण है और यह किसी विशेष क्षेत्र के खिलाफ नहीं है।
यह बयान तब आया जब स्टालिन ने व्यापक विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि यदि केंद्र के प्रस्ताव से दक्षिणी राज्यों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व घटता है और उत्तरी राज्यों का बढ़ता है, तो इससे पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन भड़क सकता है।
राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए अठावले ने कहा कि मेरी पार्टी का स्टैंड स्पष्ट है, हम इस बिल का समर्थन करते हैं। मैं भारतीय रिपब्लिकन पार्टी का प्रतिनिधित्व करता हूं और एनडीए का हिस्सा हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार महिलाओं को अधिक समर्थन देना चाहती है। इस बिल के तहत लगभग 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होने की उम्मीद है। वर्तमान में संसद में 543 सीटें हैं और यदि यह बिल पारित हो जाता है, तो बढ़ती सीटों का एक बड़ा हिस्सा महिलाओं को आवंटित किया जाएगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लोकसभा सीटों के प्रस्तावित विस्तार का उद्देश्य दक्षिणी राज्यों को नुकसान पहुंचाना नहीं है। सीटों की संख्या बढ़ने से अगर लोकसभा की संख्या लगभग 850 या 860 हो जाती है, तो निर्वाचन क्षेत्र छोटे हो जाएंगे, जिससे बेहतर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा। यह तमिलनाडु या दक्षिण भारत के लोगों के खिलाफ कोई कदम नहीं है।
अठावले ने व्यक्तिगत अपील करते हुए स्टालिन से कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान उनकी पार्टी भी एनडीए का हिस्सा थी। मैं उनसे इस बिल का समर्थन करने की अपील करता हूं क्योंकि यह पूरे देश की महिलाओं को लाभ पहुंचाने के लिए बनाया गया है।
इस बीच, केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू ने एक्स पर लिखा कि कुछ लोग गलत परिसीमन के आंकड़े देकर दक्षिणी भारतीय राज्यों को महिला आरक्षण के मुद्दे पर गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण देने के मामले में कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। सभी राजनीतिक दल 'नारी शक्ति' के लिए एकजुट हैं।
दक्षिणी राज्यों ने यह आशंका जताई है कि जनसंख्या आधारित परिसीमन से संसद में उनका प्रतिनिधित्व कम हो सकता है।