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महिला आरक्षण विधेयक: महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी में नया मोड़

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महिला आरक्षण विधेयक: महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी में नया मोड़

सारांश

हैदराबाद में शशि प्रीतम और डॉ. ऐश्वर्या कृष्णा प्रिया ने महिला आरक्षण विधेयक की सराहना की, इसे महिलाओं के सशक्तिकरण का एक महत्वपूर्ण कदम बताया। जानें इस विधेयक का समाज पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

मुख्य बातें

महिला आरक्षण विधेयक सशक्तिकरण का एक महत्वपूर्ण कदम है।
राजनीतिक क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी।
इससे स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और बेहतर नीतियों का निर्माण होगा।
समाज में पितृसत्तात्मक सोच को चुनौती मिलेगी।
शिक्षा और योग्यता पर जोर देना आवश्यक है।

हैदराबाद, १५ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। संगीत निर्देशक शशि प्रीतम और मनोवैज्ञानिक डॉ. ऐश्वर्या कृष्णा प्रिया ने केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए महिला आरक्षण विधेयक की प्रशंसा की। उन्होंने राष्ट्र प्रेस के साथ बातचीत में इसे महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक और प्रगतिशील कदम बताया।

संगीत निर्देशक शशि प्रीतम ने कहा, "मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह कदम देश के वर्तमान हालात, खासकर राजनीतिक वातावरण में महत्वपूर्ण है और जब विधेयक की बात आती है, तो यह एक ऐतिहासिक कदम है। कई बार चुने हुए प्रतिनिधि वास्तविकता में कार्य नहीं करते, उनके पीछे कोई और काम करता है। अब संसद और विधानसभाओं में अधिक महिलाएं सक्रिय होंगी। शुरुआत में थोड़ी कठिनाई हो सकती है, लेकिन अंततः इसका सकारात्मक परिणाम सामने आएगा। राजनीति में महिलाएं आगे बढ़ेंगी और स्थिति धीरे-धीरे परिवर्तित होगी।

उन्होंने मनोरंजन उद्योग की महिलाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में कई महिलाएं संसद में हैं, जैसे हेमा मालिनी, कंगना रनौत और जया बच्चन। दक्षिण भारत में जयललिता जैसी महिलाओं ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं, लेकिन कुल मिलाकर महिलाओं की संख्या कम रही है।

निर्देशक ने आशा व्यक्त की कि इस विधेयक के लागू होने से उद्योग और हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी। इससे स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का विकास होगा, बेहतर नीतियां बनेंगी और राजनीतिक वातावरण सशक्त होगा। दोनों, पुरुषों और महिलाओं की आवाज़ को सुना जाएगा।

वहीं, डॉ. ऐश्वर्या कृष्णा प्रिया ने भी इस कदम को शानदार और प्रगतिशील माना। उन्होंने कहा कि इस विधेयक को सही तरीके से लागू करना और लोगों को इसके महत्व के बारे में जागरूक करना बहुत आवश्यक है। यह राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं को सशक्त बनाने का एक अच्छा विचार है। विधेयक की शुरुआत छोटे स्तर से होनी चाहिए। घर-परिवार से ही महिलाओं और लड़कियों को खुद को शिक्षित और सक्षम बनने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।

उन्होंने बताया कि अक्सर लोग शिक्षा और योग्यता को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन यह समझना जरूरी है कि 21वीं सदी की महिलाएं किसी भी क्षेत्र में जाकर इतिहास को बदल सकती हैं और पुरानी पितृसत्तात्मक सोच को तोड़ सकती हैं। उन्होंने मनोविज्ञान के क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि इस क्षेत्र में अधिकांश महिलाएं ही नेतृत्व करती हैं। पेशेवर स्तर पर पुरुषों की संख्या कम है। चिकित्सा क्षेत्र में पुरुष मनोचिकित्सकों की संख्या अधिक है, लेकिन काउंसलिंग और मनोवैज्ञानिक क्षेत्र में महिलाओं की संख्या अधिक है। कॉर्पोरेट, रचनात्मक या किसी अन्य क्षेत्र में भी ऐसा ही देखा जा सकता है। प्रधानमंत्री का यह कदम न केवल शानदार बल्कि प्रगतिशील भी है, लेकिन इसे छोटे स्तर से लागू करना बेहद आवश्यक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिससे उनकी आवाज़ को सम्मान मिले और राजनीतिक निर्णयों में उनकी भागीदारी बढ़े। यह कदम समाज में महिलाओं की स्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिला आरक्षण विधेयक क्या है?
महिला आरक्षण विधेयक एक कानून प्रस्ताव है, जिसका उद्देश्य संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण सुनिश्चित करना है।
इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाना और उन्हें सशक्त बनाना है।
क्या इस विधेयक का समर्थन किया जा रहा है?
हाँ, इसे कई प्रमुख व्यक्तियों और संगठनों द्वारा समर्थन मिल रहा है।
महिलाओं के लिए आरक्षण का क्या महत्व है?
आरक्षण से महिलाओं को राजनीतिक क्षेत्र में अधिकार और प्रतिनिधित्व मिलेगा, जो उनके सशक्तिकरण में मदद करेगा।
क्या यह विधेयक लागू होना संभव है?
यदि इसे सही तरीके से लागू किया जाए, तो यह निश्चित रूप से संभव है।
राष्ट्र प्रेस
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