ताबो: बौद्ध विरासत का अद्भुत स्थल, जहां प्राचीन मठ आज भी जीवित हैं
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नई दिल्ली, 18 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। हिमालय की गोद में एक अद्भुत स्थान छुपा हुआ है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। उत्तर भारत में पहाड़ों पर घूमने के लिए कई आकर्षक पर्यटन स्थल हैं, जिनमें सबसे लोकप्रिय स्थान है स्पीति घाटी।
स्पीति घाटी के बारे में तो सभी जानते हैं, लेकिन इसी घाटी के निकट स्थित है बौद्ध धर्म की अनमोल धरोहर, जिसे ताबो के नाम से जाना जाता है।
ताबो, जो 3,050 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, एक ऐसा गांव है जो आज भी बौद्ध विरासत का प्रतीक है। यहां के मठ दुनिया के सबसे पुराने मठों में से हैं। 996 ईस्वी में स्थापित ताबो मठ, जिसे तिब्बती राजा येशे ओ ने बनवाया था, बौद्ध धर्म के पुनरुत्थान के लिए उनके प्रयासों का प्रतीक है। यह मठ आज भी एक पवित्र स्थल के रूप में कार्यरत है और बौद्ध धर्म की शिक्षाओं को चारों ओर फैला रहा है।
इस मठ परिसर में नौ मन्दिर, चार सजावटी स्तूप और चट्टानों में खोदे गए गुफा मंदिर शामिल हैं। हर मंदिर की वास्तुकला बौद्ध धर्म की जीवंत कहानी कहती है। ताबो को 'हिमालय का अजंता' कहा जाता है क्योंकि यहां की अद्वितीय चित्रकला बौद्ध धर्म की यात्रा को जीवंत करती है। यह गांव शांति, सुकून, और अपने ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है।
ताबो एक कटोरे के आकार की घाटी में बसा हुआ है, जहां की जनसंख्या केवल 10,000 है। यह स्थान शुष्क, ठंडा और पथरीला है, और यहां कई चट्टानें और गुफाएं हैं। माना जाता है कि इन गुफाओं में बौद्ध भिक्षुओं ने आत्मज्ञान प्राप्त किया था। आज भी, भिक्षु इन गुफाओं में ध्यान करने के लिए जाते हैं।
यदि आप ताबो की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो अप्रैल से मई का समय सबसे उपयुक्त होता है। इस समय घाटियों में ठंड कम होती है और वसंत का प्रभाव पूरे क्षेत्र में देखने को मिलता है। मौसम सुहावना होता है और कई सुंदर फूल खिलते हैं। आप जून से अगस्त के बीच भी जा सकते हैं, जब मौसम अच्छा रहता है और गर्मी कम होती है।
यदि आप शिमला से आ रहे हैं, तो आप किन्नौर के रास्ते पहुंच सकते हैं। गांव तक पहुँचने के लिए अच्छी और साफ सड़कें उपलब्ध हैं। शिमला से ताबो की दूरी 374 किलोमीटर है।