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महिला आरक्षण पर संशोधन: कांग्रेस ने सरकार पर उठाए सवाल

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महिला आरक्षण पर संशोधन: कांग्रेस ने सरकार पर उठाए सवाल

सारांश

महिला आरक्षण संशोधन बिल पर कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार को घेरते हुए कहा कि यह एक साजिश है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस हमेशा से महिला आरक्षण की समर्थक रही है। जानें इस विवाद के पीछे की कहानी और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएँ।

मुख्य बातें

महिला आरक्षण पर कांग्रेस का स्पष्ट समर्थन डिलिमिटेशन क्लॉज के प्रति चिंता कांग्रेस ने 2023 में सर्वसम्मति से बिल का समर्थन किया महिलाओं का सम्मान बढ़ाने की जरूरत राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी

नई दिल्ली, 18 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल का पारित न होना कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा सरकार पर जोरदार हमला करने का कारण बना। उन्होंने कहा कि कांग्रेस महिला विरोधी नहीं है, बल्कि वह लंबे समय से एक-तिहाई महिला आरक्षण की समर्थक रही है। खड़गे ने बताया कि 2023 में प्रस्तावित महिला आरक्षण कानून को कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दलों ने एकमत से समर्थन दिया था।

उन्होंने आगे कहा, "हमने 2023 के संशोधन को सर्वसम्मति से स्वीकार किया। लेकिन उसके पीछे एक और संशोधन लाया गया जिसमें डिलिमिटेशन क्लॉज डाल दिया गया, जिससे महिला आरक्षण और डिलिमिटेशन बिल को एक साथ मिलाने की कोशिश की गई। उनका उद्देश्य सत्ता हासिल करना था ताकि भविष्य में कोई भी डिलिमिटेशन कानून सदन में साधारण बहुमत से पारित किया जा सके।"

खड़गे ने यह भी कहा कि इसे 543 सदस्यों के अंदर किया जाना चाहिए। अगली जनगणना या जाति जनगणना पूरी होने के बाद, इसे अगले चुनाव में लागू किया जा सकता है। उनका इरादा संविधान के ढांचे को बदलना और कार्यकारी शक्ति अपने हाथों में लेना है।

कांग्रेस के सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा, "हमने पहले ही 2023 का महिला आरक्षण एक्ट बिना किसी सहमति के पारित कर दिया था। अब सरकार को 2029 के चुनाव के लिए तुरंत कार्रवाई करनी होगी। महिला आरक्षण को डिलिमिटेशन से जोड़ने का उनका एजेंडा कल विफल हो गया।"

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, "आप उन्हें क्या कहेंगे जो लोकतंत्र के विरोधी हैं और उसका विरोध करके सत्ता में आने की कोशिश करते हैं? मैं यही कहूंगा कि कल लोकतंत्र की रक्षा हुई और भारत के संविधान को सुरक्षित रखा गया।"

राजीव शुक्ला ने कहा, "कांग्रेस महिलाओं के लिए आरक्षण की सबसे बड़ी समर्थक है। यह विधेयक 2023 में कांग्रेस के समर्थन से सर्वसम्मति से पारित हुआ था। परसों उन्होंने एक अधिसूचना जारी की और फिर महिलाओं के लिए आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने की योजना बनाई।"

पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने कहा कि यह विधेयक 2023 में कांग्रेस के समर्थन से सर्वसम्मति से पारित हुआ था। चुनाव के दौरान सत्र बुलाना सही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में आज तक एक महिला जज नहीं बनी है। महिलाओं पर शोषण हो रहा है, इस पर ये लोग कुछ नहीं बोल रहे हैं। जनता को गुमराह करने के लिए भाजपा इस तरह का काम कर रही है। महिलाओं का सम्मान बहुत कम हो रहा है।

समाजवादी पार्टी के सांसद आनंद भदौरिया ने कहा, "समाजवादी पार्टी, हमारे नेता महिला आरक्षण के पक्ष में मजबूती से खड़े हैं। सदन ने सर्वसम्मति से 2023 में महिला आरक्षण को पास कर दिया था और अब संविधान संशोधन लेकर आए हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार महिला आरक्षण देना चाहते हैं, यह उनकी साजिश है।"

संपादकीय दृष्टिकोण

हम एक तटस्थ दृष्टिकोण से देखते हैं कि महिला आरक्षण का मुद्दा न केवल राजनीतिक बल्कि सामाजिक भी है। सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है कि वे महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करें और किसी भी राजनीतिक लाभ के लिए इसे न भुनाएँ।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिला आरक्षण बिल कब पारित किया गया था?
महिला आरक्षण बिल 2023 में कांग्रेस और अन्य दलों के समर्थन से सर्वसम्मति से पारित हुआ था।
कांग्रेस का इस बिल पर क्या कहना है?
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से महिलाओं के आरक्षण की समर्थक रही है।
डिलिमिटेशन क्लॉज का क्या महत्व है?
डिलिमिटेशन क्लॉज को जोड़ने का उद्देश्य एक साथ महिला आरक्षण और डिलिमिटेशन बिल को पारित करना था।
क्यों कहा गया कि यह साजिश है?
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि यह विधेयक सत्ताधारी दल द्वारा अपने लाभ के लिए लाया गया है।
महिलाओं के लिए आरक्षण का क्या महत्व है?
महिलाओं के लिए आरक्षण समाज में समानता और न्याय सुनिश्चित करता है।
राष्ट्र प्रेस
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