'महिला आरक्षण बिल' का विपक्ष ने किया स्वागत, लेकिन प्रक्रिया पर उठाए सवाल
सारांश
Key Takeaways
- महिला आरक्षण बिल का स्वागत विपक्ष द्वारा किया गया है।
- सरकार की प्रक्रिया और समयसीमा पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
- महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता है।
- सभी वर्गों की महिलाओं को आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए।
- राजनीतिक बयानबाजी में तेजी आई है।
नई दिल्ली, २४ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। 'महिला आरक्षण बिल' को लेकर राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस बिल का स्वागत किया है, लेकिन इसके लागू होने की प्रक्रिया और समयसीमा को लेकर सवाल भी उठाए हैं।
कांग्रेस से राज्यसभा सदस्य रजनी अशोकराव पाटिल ने इस बिल का समर्थन करते हुए कहा कि उनकी पार्टी इसका स्वागत करती है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के योगदान को याद करते हुए कहा कि महिला आरक्षण की अवधारणा के सूत्रधार वही थे और उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता।
कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर लंबे समय से तैयारी कर रही है। उन्होंने याद दिलाया कि २०२३ में संसद के नए भवन में प्रवेश के समय भी यह मुद्दा उठा था, लेकिन अब २०२६ तक भी इसे लागू करने में देरी हो रही है।
रंजन ने कहा कि सरकार पहले परिसीमन और फिर चुनाव की बात कर रही है, जिससे प्रक्रिया और लंबी हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरा विपक्ष इस बिल का समर्थन कर रहा है। सरकार को इसे जल्द लागू करना चाहिए।
झारखंड मुक्ति मोर्चा की राज्यसभा सदस्य महुआ माजी ने भी महिला आरक्षण बिल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह बिल लंबे समय से प्रतीक्षित था और अब इसके आने से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी कुछ शर्तों के साथ इस बिल का समर्थन करेगी। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि आरक्षण बिल का लाभ सभी वर्गों की महिलाओं तक पहुंचे।
इसी बीच, असम में २१ सीटों पर झारखंड मुक्ति मोर्चा द्वारा उम्मीदवारों की घोषणा को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है। राज्यों में राजनीतिक दल परिस्थितियों के अनुसार गठबंधन या अलग-अलग चुनाव लड़ते रहते हैं और यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी पार्टी चुनावों में वोट काटने का काम करती है, जिससे भारतीय जनता पार्टी को फायदा होता है।