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प्रियंका गांधी: कांग्रेस का महिला आरक्षण पर स्पष्ट रुख, सरकार के राजनीतिक एजेंडे की आलोचना

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प्रियंका गांधी: कांग्रेस का महिला आरक्षण पर स्पष्ट रुख, सरकार के राजनीतिक एजेंडे की आलोचना

सारांश

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने महिला आरक्षण पर अपने विचार साझा करते हुए कांग्रेस के समर्थन को स्पष्ट किया। उन्होंने सरकार पर राजनीतिक एजेंडा चलाने का आरोप लगाया और पुराने कानून को लागू करने की मांग की।

मुख्य बातें

महिला आरक्षण मुद्दे पर कांग्रेस का स्पष्ट रुख है।
सरकार की योजनाएँ राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा हैं।
प्रियंका गांधी ने सरकार को चुनौती दी है।
महिला आरक्षण कानून को तुरंत लागू करने की आवश्यकता है।

नई दिल्ली, 18 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के पारित न होने के बाद, भाजपा नेताओं की प्रतिक्रियाओं के बीच, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस हमेशा से महिलाओं के आरक्षण के समर्थन में खड़ी रही है।

प्रियंका गांधी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि महिला आरक्षण के संदर्भ में कांग्रेस का दृष्टिकोण स्पष्ट है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने लोकतंत्र की रक्षा की है और सरकार की योजनाओं को विफल किया है। उनके अनुसार, सरकार इस विधेयक के माध्यम से परिसीमन को जोड़कर एक अलग राजनीतिक एजेंडा को बढ़ावा देना चाहती थी, जिसे विपक्ष ने समझकर रोका।

उन्होंने यह भी कहा कि 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को लागू करना चाहिए। अगर सरकार वास्तव में महिलाओं को आरक्षण देना चाहती है, तो उसे तुरंत पुराने कानून को लागू करना चाहिए। प्रियंका गांधी ने सरकार को चुनौती दी कि संसद का विशेष सत्र बुलाकर इस मुद्दे पर फिर से चर्चा की जाए और देखा जाए कि वास्तव में कौन महिलाओं के पक्ष में है।

कांग्रेस सांसद रणजीत रंजन ने कहा, "यह महिलाओं का बिल नहीं था। महिला आरक्षण विधेयक, जिसे हमने 2023 में सर्वसम्मति से पारित किया था, अब तक लागू नहीं हुआ। प्रधानमंत्री मोदी को तमिलनाडु की महिलाओं से माफी मांगनी चाहिए क्योंकि 3 साल पहले पारित महिला आरक्षण बिल का नोटिफिकेशन आपने 16 अप्रैल 2026 में निकाला।"

उन्होंने कहा कि 16 अप्रैल से जो विशेष सत्र बुलाया गया, वह महिला आरक्षण के लिए नहीं था, बल्कि परिसीमन जोड़कर महिला आरक्षण को कमजोर करने का प्रयास था। उन्होंने कहा कि यदि वे आरक्षण देना चाहते थे, तो हमें 2023 में कहा था कि आपने 3 साल इंतजार कराया और अब भी जनगणना और परिसीमन की बात कर रहे हैं।

समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने कहा, "ये दलित और ओबीसी विरोधी हैं। जब समाजवादी पार्टी ने ओबीसी महिलाओं के आरक्षण की मांग की थी, तब ये दरार पैदा करने वाले लोग बने रहे हैं।"

शिवसेना यूबीटी की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, "लोग देख रहे हैं कि असल एजेंडा क्या है। यह साफ है कि आप महिलाओं को आरक्षण नहीं देना चाहते और एक मुद्दे को दूसरे से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।" उन्होंने कहा, "2023 में सहमति से पास किया गया कानून महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए था।"

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि लोकतंत्र की मजबूती का भी है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिला आरक्षण का क्या महत्व है?
महिला आरक्षण का उद्देश्य महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में बढ़ावा देना है, जिससे उनके अधिकारों की रक्षा हो सके।
कांग्रेस का महिला आरक्षण के मुद्दे पर क्या रुख है?
कांग्रेस हमेशा से महिला आरक्षण के पक्ष में रही है और इसे लागू करने की मांग करती है।
सरकार ने महिला आरक्षण पर क्या कदम उठाए हैं?
सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक पेश किया है, लेकिन विपक्ष का कहना है कि यह विधेयक राजनीतिक एजेंडे के तहत है।
क्या महिला आरक्षण लागू होगा?
प्रियंका गांधी के अनुसार, यदि सरकार वास्तव में महिलाओं के आरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है, तो उसे पुराने कानून को तुरंत लागू करना चाहिए।
महिला आरक्षण के लिए विपक्ष का क्या कहना है?
विपक्ष का कहना है कि सरकार महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़कर कमजोर करना चाहती है।
राष्ट्र प्रेस
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