जम्मू-कश्मीर राज्य दर्जा प्रस्ताव में नौकरशाही दखल: NC विधायक तनवीर सादिक का तीखा हमला
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के प्रवक्ता एवं विधायक तनवीर सादिक ने मंगलवार, 29 सितंबर को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव में 'नौकरशाही के दखल' को लेकर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि यह घटनाक्रम ही इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल क्यों लौटाया जाना चाहिए। यह विवाद तब सामने आया जब रिपोर्टों में खुलासा हुआ कि एक वरिष्ठ नौकरशाह ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री द्वारा पेश प्रस्ताव को रोकने की मांग की थी।
मुख्य घटनाक्रम
रिपोर्टों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के कानून सचिव ने विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा पेश राज्य दर्जा बहाली के प्रस्ताव को सदन के सामने न रखने का अनुरोध किया था। इसके अतिरिक्त, मुख्य सचिव ने भी अध्यक्ष को इसी आशय का पत्र भेजा था।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को विधानसभा में स्वयं यह स्वीकार किया कि उन्हें अपनी जानकारी के बिना कानून सचिव द्वारा भेजे गए पत्र की जानकारी बाद में हुई। उन्होंने इसे स्पष्ट रूप से अस्वीकार्य बताया।
तनवीर सादिक का बयान
विधायक तनवीर सादिक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा — 'अगली बार जब कोई पूछे कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा क्यों चाहिए, तो बस इसे पढ़ें। क्या आप ऐसे राज्य की कल्पना कर सकते हैं जहाँ वरिष्ठ नौकरशाह विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर चुने हुए मुख्यमंत्री द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव को रोकने की माँग करें, और संबंधित मंत्री को इसकी जानकारी भी न हो।'
सादिक ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मुद्दा किसी एक सरकार या दल का नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधित्व और जवाबदेही के मूल सिद्धांत का है। उन्होंने कहा, 'आखिरकार जनता के प्रति कौन जवाबदेह है — यही असली सवाल है।'
प्रस्ताव पारित होने के बाद की स्थिति
राज्य दर्जा बहाली का प्रस्ताव विधानसभा में पारित होने के बाद विधानसभा सचिवालय ने इसे मुख्य सचिव को 'जानकारी और आवश्यक कार्रवाई' के लिए भेजा। हालाँकि, उस पत्र में यह विशेष रूप से नहीं कहा गया था कि प्रस्ताव को केंद्र सरकार को अग्रेषित किया जाए।
गौरतलब है कि प्रस्ताव की भाषा में 26 जून 2000 और 6 नवंबर 2024 को पारित पूर्व प्रस्तावों का भी उल्लेख है, जिनमें अनुच्छेद 370 और स्वायत्तता की बहाली की माँग शामिल थी।
भाजपा की आपत्ति
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने का समर्थन करते हुए भी प्रस्ताव की शब्दावली पर आपत्ति जताई है। BJP का कहना है कि इस प्रस्ताव को अनुच्छेद 370 और स्वायत्तता की बहाली की माँग करने वाले पुराने प्रस्तावों से जोड़ना संवैधानिक दृष्टि से अनुचित है और इसलिए स्वीकार्य नहीं।
आगे क्या होगा
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब जम्मू-कश्मीर में 5 अक्तूबर 2024 को हुए विधानसभा चुनावों के बाद पहली निर्वाचित सरकार सत्ता में है और राज्य दर्जे की बहाली उसका प्रमुख राजनीतिक एजेंडा है। केंद्र सरकार इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाती है, यह आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होगा। नौकरशाही के इस दखल ने निर्वाचित सरकार और प्रशासनिक तंत्र के बीच अधिकार-क्षेत्र की सीमाओं पर एक नई बहस छेड़ दी है।