जम्मू-कश्मीर विधानसभा सत्र 21 सितंबर से: एलजी मनोज सिन्हा ने बुलाई बैठक, पूर्ण राज्य दर्जे की माँग फिर उठेगी
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 21 सितंबर 2026 से विधानसभा का सत्र बुलाया है। यह सत्र मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की अगुवाई वाली मंत्रिपरिषद की सिफारिश पर आहूत किया गया है। इस सत्र में पूर्ण राज्य दर्जे की माँग सहित कई अहम मुद्दे केंद्र में रहने की उम्मीद है।
विधानसभा की संरचना और वर्तमान स्थिति
जम्मू-कश्मीर विधानसभा केंद्र शासित प्रदेश का विधायी अंग है, जिसमें 95 सदस्य सीधे 95 निर्वाचन क्षेत्रों से चुने जाते हैं। विधानसभा का कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है, जब तक कि इसे पहले भंग न किया जाए। वर्तमान 13वीं विधानसभा का चुनाव सितंबर-अक्टूबर 2024 में हुआ था।
गौरतलब है कि 5 अगस्त 2019 को संसद द्वारा पारित जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत अनुच्छेद 370 और 35ए हटाने के बाद राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों — जम्मू-कश्मीर और लद्दाख — में विभाजित किया गया था। इसी के साथ पूर्ववर्ती द्विसदनीय विधायिका (विधान परिषद और विधानसभा) को एकसदनीय विधायिका में बदल दिया गया।
सदन में दलीय बलाबल
मौजूदा विधानसभा में दलीय स्थिति इस प्रकार है: सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास 41 सीटें, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पास 29, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के पास 6, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) के पास 4, सीपीआई (एम) के पास 1, अवामी इत्तेहाद पार्टी के पास 1, आम आदमी पार्टी (AAP) के पास 1, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के पास 1, और 6 निर्दलीय सदस्य हैं।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अब्दुल रहीम राथर विधानसभा के अध्यक्ष हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सदन के नेता हैं, जबकि BJP के सुनील शर्मा विपक्ष के नेता की भूमिका निभा रहे हैं। सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार को कांग्रेस, सीपीआई (एम) और चार निर्दलीय सदस्यों का समर्थन प्राप्त है।
सत्र में उठने वाले प्रमुख मुद्दे
राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि इस सत्र में जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की माँग एक बार फिर प्रमुखता से उठाई जाएगी। यह माँग नेशनल कॉन्फ्रेंस के चुनावी एजेंडे का अहम हिस्सा रही है और पिछले सत्रों में भी इसे लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों की ओर से आवाज़ें उठती रही हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार ने अब तक पूर्ण राज्य दर्जे की बहाली की कोई समयसीमा सार्वजनिक नहीं की है, हालाँकि सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान इसका आश्वासन दिया जा चुका है।
आगे क्या होगा
सत्र 21 सितंबर से शुरू होने के साथ ही विधायी कार्यसूची, बजट संबंधी प्रस्तावों और राज्य दर्जे की माँग पर बहस केंद्र में रहने की संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार इस सत्र की कार्यवाही जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक दिशा का एक अहम संकेत होगी।