12 अगस्त 2026
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जम्मू-कश्मीर विधानसभा सत्र 21 सितंबर से: एलजी मनोज सिन्हा ने बुलाई बैठक, पूर्ण राज्य दर्जे की माँग फिर उठेगी

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जम्मू-कश्मीर विधानसभा सत्र 21 सितंबर से: एलजी मनोज सिन्हा ने बुलाई बैठक, पूर्ण राज्य दर्जे की माँग फिर उठेगी

सारांश

जम्मू-कश्मीर में 21 सितंबर से विधानसभा सत्र शुरू होगा — और इस बार सदन की नज़रें सिर्फ विधायी कार्यसूची पर नहीं, बल्कि पूर्ण राज्य दर्जे की उस माँग पर भी टिकी होंगी जो 2019 से लंबित है।

मुख्य बातें

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 21 सितंबर 2026 से जम्मू-कश्मीर विधानसभा सत्र बुलाया।
सत्र मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की मंत्रिपरिषद की सिफारिश पर आहूत किया गया है।
वर्तमान 13वीं विधानसभा में 95 सदस्य हैं; नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास सर्वाधिक 41 सीटें , BJP के पास 29 ।
विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ; विपक्ष के नेता BJP के सुनील शर्मा ।
सत्र में जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य दर्जा दिलाने की माँग फिर उठने की संभावना।

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 21 सितंबर 2026 से विधानसभा का सत्र बुलाया है। यह सत्र मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की अगुवाई वाली मंत्रिपरिषद की सिफारिश पर आहूत किया गया है। इस सत्र में पूर्ण राज्य दर्जे की माँग सहित कई अहम मुद्दे केंद्र में रहने की उम्मीद है।

विधानसभा की संरचना और वर्तमान स्थिति

जम्मू-कश्मीर विधानसभा केंद्र शासित प्रदेश का विधायी अंग है, जिसमें 95 सदस्य सीधे 95 निर्वाचन क्षेत्रों से चुने जाते हैं। विधानसभा का कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है, जब तक कि इसे पहले भंग न किया जाए। वर्तमान 13वीं विधानसभा का चुनाव सितंबर-अक्टूबर 2024 में हुआ था।

गौरतलब है कि 5 अगस्त 2019 को संसद द्वारा पारित जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत अनुच्छेद 370 और 35ए हटाने के बाद राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों — जम्मू-कश्मीर और लद्दाख — में विभाजित किया गया था। इसी के साथ पूर्ववर्ती द्विसदनीय विधायिका (विधान परिषद और विधानसभा) को एकसदनीय विधायिका में बदल दिया गया।

सदन में दलीय बलाबल

मौजूदा विधानसभा में दलीय स्थिति इस प्रकार है: सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास 41 सीटें, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पास 29, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के पास 6, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) के पास 4, सीपीआई (एम) के पास 1, अवामी इत्तेहाद पार्टी के पास 1, आम आदमी पार्टी (AAP) के पास 1, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के पास 1, और 6 निर्दलीय सदस्य हैं।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अब्दुल रहीम राथर विधानसभा के अध्यक्ष हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सदन के नेता हैं, जबकि BJP के सुनील शर्मा विपक्ष के नेता की भूमिका निभा रहे हैं। सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार को कांग्रेस, सीपीआई (एम) और चार निर्दलीय सदस्यों का समर्थन प्राप्त है।

सत्र में उठने वाले प्रमुख मुद्दे

राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि इस सत्र में जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की माँग एक बार फिर प्रमुखता से उठाई जाएगी। यह माँग नेशनल कॉन्फ्रेंस के चुनावी एजेंडे का अहम हिस्सा रही है और पिछले सत्रों में भी इसे लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों की ओर से आवाज़ें उठती रही हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार ने अब तक पूर्ण राज्य दर्जे की बहाली की कोई समयसीमा सार्वजनिक नहीं की है, हालाँकि सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान इसका आश्वासन दिया जा चुका है।

आगे क्या होगा

सत्र 21 सितंबर से शुरू होने के साथ ही विधायी कार्यसूची, बजट संबंधी प्रस्तावों और राज्य दर्जे की माँग पर बहस केंद्र में रहने की संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार इस सत्र की कार्यवाही जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक दिशा का एक अहम संकेत होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन केंद्र की ओर से अब तक कोई ठोस समयसीमा नहीं आई है। सत्र में इस माँग पर सत्तापक्ष कितना दबाव बनाता है और BJP कितना प्रतिरोध करती है — यही असली कहानी होगी। जब तक राज्य दर्जे की बहाली का रोडमैप स्पष्ट नहीं होता, तब तक विधानसभा की हर कार्यवाही एक अधूरे लोकतांत्रिक ढाँचे के भीतर होती रहेगी।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जम्मू-कश्मीर विधानसभा का अगला सत्र कब शुरू होगा?
जम्मू-कश्मीर विधानसभा का अगला सत्र 21 सितंबर 2026 से शुरू होगा। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की मंत्रिपरिषद की सिफारिश पर यह सत्र बुलाया है।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कितने सदस्य हैं और कौन से दल हैं?
वर्तमान 13वीं विधानसभा में 95 सदस्य हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास 41, BJP के पास 29, कांग्रेस के पास 6, PDP के पास 4, और शेष सीटें छोटे दलों व निर्दलीयों के पास हैं।
इस सत्र में कौन से प्रमुख मुद्दे उठने की संभावना है?
इस सत्र में जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की माँग प्रमुखता से उठने की संभावना है। यह माँग नेशनल कॉन्फ्रेंस के चुनावी एजेंडे का हिस्सा रही है और पिछले सत्रों में भी यह मुद्दा केंद्र में रहा है।
2019 से पहले जम्मू-कश्मीर की विधायिका कैसी थी?
2019 से पहले जम्मू-कश्मीर में द्विसदनीय विधायिका थी — ऊपरी सदन विधान परिषद और निचला सदन विधानसभा। 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत इसे एकसदनीय विधायिका में बदल दिया गया और राज्य को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिला।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा के अध्यक्ष और विपक्ष के नेता कौन हैं?
नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता अब्दुल रहीम राथर विधानसभा के अध्यक्ष हैं। BJP के सुनील शर्मा विपक्ष के नेता हैं, जबकि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सदन के नेता हैं।
राष्ट्र प्रेस
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