25 सितंबर 2026
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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में स्टेटहुड पर हंगामा, BJP का वॉकआउट; NC-BJP आमने-सामने

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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में स्टेटहुड पर हंगामा, BJP का वॉकआउट; NC-BJP आमने-सामने

सारांश

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में स्वायत्तता और सेल्फ रूल की मांग पर BJP ने वॉकआउट किया। डिप्टी सीएम चौधरी ने BJP के रुख को जनविरोधी बताया, तो BJP विधायक परिहार ने 1990 के पलायन का हवाला देकर पलटवार किया। राज्य के दर्जे की बहाली बनाम स्वायत्तता की बहस अब सदन के भीतर केंद्रीय संघर्ष बन चुकी है।

मुख्य बातें

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 25 सितंबर 2026 को स्वायत्तता और सेल्फ रूल की मांग पर चर्चा के दौरान BJP विधायकों ने सदन से वॉकआउट किया।
उपमुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी ने BJP के रुख को जम्मू और आम जनता के खिलाफ बताया।
BJP विधायक शगुन परिहार ने 1990 के दशक में कश्मीरी पंडितों के पलायन का हवाला देते हुए ऑटोनॉमी की मांग को खारिज किया।
BJP ने स्पष्ट किया — राज्य के दर्जे की बहाली स्वीकार्य, लेकिन इसे ऑटोनॉमी या सेल्फ रूल से जोड़ना अस्वीकार्य।
नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार और BJP के बीच यह टकराव आने वाले विधानसभा सत्रों में और गहराने की आशंका है।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को राज्य का दर्जा बहाल करने के साथ-साथ स्वायत्तता (ऑटोनॉमी) और सेल्फ रूल की मांग पर चर्चा के दौरान तीखा टकराव देखने को मिला। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायकों ने सदन से वॉकआउट किया, और उपमुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी तथा BJP विधायक शगुन परिहार के बीच तीखी बयानबाजी हुई। यह घटना ऐसे समय में हुई जब जम्मू-कश्मीर के राज्य का दर्जा बहाल किए जाने की मांग केंद्र और राज्य सरकार के बीच एक संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है।

सदन में क्या हुआ

विधानसभा में स्वायत्तता और सेल्फ रूल के मुद्दे पर चर्चा शुरू होते ही माहौल गरम हो गया। BJP विधायकों ने इन मांगों को अस्वीकार्य बताते हुए सदन से बाहर चले गए। उनका कहना था कि राज्य के दर्जे की बहाली की मांग और स्वायत्तता की मांग को एक ही पैकेज में नहीं रखा जा सकता।

गौरतलब है कि अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया था। तब से राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग राजनीतिक एजेंडे पर लगातार बनी हुई है। यह सदन में इस विषय पर अब तक का सबसे तीखा टकराव माना जा रहा है।

डिप्टी सीएम चौधरी की प्रतिक्रिया

BJP के वॉकआउट पर प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी ने कहा कि BJP की यह प्रतिक्रिया जम्मू और आम जनता के खिलाफ है। उन्होंने कहा, 'BJP के इस रुख से लगता है कि उसे जम्मू-कश्मीर के लोगों से कोई लगाव नहीं है।'

चौधरी ने यह भी कहा कि विधानसभा में उठाए जा रहे मुद्दों का विरोध जनता के हितों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने राज्य का दर्जा बहाल करने और जम्मू-कश्मीर के भविष्य से जुड़े सवालों पर खुलकर चर्चा की जरूरत पर जोर दिया।

BJP विधायक शगुन परिहार का पलटवार

BJP विधायक शगुन परिहार ने डिप्टी सीएम के बयान पर कड़ा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि जिस सेल्फ रूल और ऑटोनॉमी की बात की जा रही है, वह किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।

परिहार ने 1990 के दशक की घटनाओं का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि उस दौर में दंगे भड़काए गए और कश्मीरी पंडितों को पलायन करना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि डिप्टी सीएम चौधरी 'नेशनल कॉन्फ्रेंस के बिना फीस के वकील' की तरह काम कर रहे हैं और जब भी मुख्यमंत्री किसी मुद्दे पर घिरते हैं तो उन्हें आगे कर दिया जाता है।

परिहार ने स्पष्ट किया कि BJP राज्य के दर्जे की बहाली का विरोध नहीं करती, लेकिन इसे ऑटोनॉमी और सेल्फ रूल की मांग से जोड़ना पार्टी को मंजूर नहीं है।

आम जनता और राजनीतिक असर

जम्मू-कश्मीर में विधानसभा गठन के बाद से ही राज्य का दर्जा बहाल करने का मुद्दा सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और विपक्षी BJP के बीच टकराव की प्रमुख वजह रहा है। आलोचकों का कहना है कि स्वायत्तता की मांग को राज्य के दर्जे से जोड़ना राजनीतिक रूप से संवेदनशील है और केंद्र सरकार के साथ संबंधों को प्रभावित कर सकता है।

यह ऐसे समय में आया है जब सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भी जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा बहाल करने के संदर्भ में सरकार से अपेक्षाएँ जताई जा चुकी हैं। राज्य के लाखों लोग इस मुद्दे के राजनीतिक नतीजों पर नजर बनाए हुए हैं।

आगे क्या होगा

सदन में यह विवाद आने वाले सत्रों में और गहराने की संभावना है। नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार का रुख स्पष्ट है कि वह राज्य के दर्जे की बहाली के साथ अधिक स्वायत्तता की मांग को भी उठाती रहेगी, जबकि BJP इसे केंद्र की नीतियों के विरुद्ध मानती है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह मुद्दा जम्मू-कश्मीर की राजनीति में दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी जड़ें गहरी हैं — यह उस मूल प्रश्न का पुनरावर्तन है कि 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक पहचान क्या होनी चाहिए। नेशनल कॉन्फ्रेंस 'राज्य का दर्जा' और 'स्वायत्तता' को एक ही राजनीतिक पैकेज के रूप में पेश कर केंद्र पर अधिकतम दबाव बनाने की रणनीति अपना रही है। BJP का वॉकआउट महज विरोध नहीं, बल्कि एक संकेत है कि वह इस मांग को दिल्ली तक पहुँचने देने की कोशिश नहीं करेगी। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है वह यह है कि जम्मू क्षेत्र की जनता के लिए 'स्वायत्तता' का अर्थ कश्मीर केंद्रित राजनीति की वापसी भी हो सकता है — और यही BJP के लिए असली चुनावी तर्क है।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 25 सितंबर को क्या हुआ?
25 सितंबर 2026 को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में राज्य का दर्जा बहाली, स्वायत्तता और सेल्फ रूल पर चर्चा के दौरान हंगामा हुआ और BJP विधायकों ने सदन से वॉकआउट किया। डिप्टी सीएम सुरिंदर कुमार चौधरी और BJP विधायक शगुन परिहार के बीच तीखी बयानबाजी भी सामने आई।
BJP ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा से वॉकआउट क्यों किया?
BJP का कहना है कि राज्य के दर्जे की बहाली की मांग को स्वायत्तता और सेल्फ रूल की मांग से जोड़ना स्वीकार्य नहीं है। BJP विधायक शगुन परिहार ने 1990 के दशक की घटनाओं और कश्मीरी पंडितों के पलायन का हवाला देते हुए ऑटोनॉमी की किसी भी मांग को खारिज किया।
डिप्टी सीएम सुरिंदर कुमार चौधरी ने BJP पर क्या आरोप लगाए?
उपमुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी ने कहा कि BJP की प्रतिक्रिया जम्मू और आम जनता के खिलाफ है और इससे लगता है कि BJP को जम्मू-कश्मीर के लोगों से कोई लगाव नहीं है। उन्होंने विधानसभा में इन मुद्दों पर खुलकर चर्चा की जरूरत बताई।
जम्मू-कश्मीर में स्वायत्तता की मांग क्या है और इसका विरोध क्यों हो रहा है?
स्वायत्तता की मांग का अर्थ है जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासन के भीतर अधिक प्रशासनिक और विधायी अधिकार देना। BJP इसे 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद की संवैधानिक स्थिति के विपरीत मानती है और इसका कड़ा विरोध करती है।
जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा कब मिलेगा?
केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में उचित समय पर राज्य का दर्जा बहाल करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं हुई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार इस मुद्दे को विधानसभा में लगातार उठा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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