जम्मू-कश्मीर विधानसभा में स्टेटहुड पर हंगामा, BJP का वॉकआउट; NC-BJP आमने-सामने
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को राज्य का दर्जा बहाल करने के साथ-साथ स्वायत्तता (ऑटोनॉमी) और सेल्फ रूल की मांग पर चर्चा के दौरान तीखा टकराव देखने को मिला। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायकों ने सदन से वॉकआउट किया, और उपमुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी तथा BJP विधायक शगुन परिहार के बीच तीखी बयानबाजी हुई। यह घटना ऐसे समय में हुई जब जम्मू-कश्मीर के राज्य का दर्जा बहाल किए जाने की मांग केंद्र और राज्य सरकार के बीच एक संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है।
सदन में क्या हुआ
विधानसभा में स्वायत्तता और सेल्फ रूल के मुद्दे पर चर्चा शुरू होते ही माहौल गरम हो गया। BJP विधायकों ने इन मांगों को अस्वीकार्य बताते हुए सदन से बाहर चले गए। उनका कहना था कि राज्य के दर्जे की बहाली की मांग और स्वायत्तता की मांग को एक ही पैकेज में नहीं रखा जा सकता।
गौरतलब है कि अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया था। तब से राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग राजनीतिक एजेंडे पर लगातार बनी हुई है। यह सदन में इस विषय पर अब तक का सबसे तीखा टकराव माना जा रहा है।
डिप्टी सीएम चौधरी की प्रतिक्रिया
BJP के वॉकआउट पर प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी ने कहा कि BJP की यह प्रतिक्रिया जम्मू और आम जनता के खिलाफ है। उन्होंने कहा, 'BJP के इस रुख से लगता है कि उसे जम्मू-कश्मीर के लोगों से कोई लगाव नहीं है।'
चौधरी ने यह भी कहा कि विधानसभा में उठाए जा रहे मुद्दों का विरोध जनता के हितों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने राज्य का दर्जा बहाल करने और जम्मू-कश्मीर के भविष्य से जुड़े सवालों पर खुलकर चर्चा की जरूरत पर जोर दिया।
BJP विधायक शगुन परिहार का पलटवार
BJP विधायक शगुन परिहार ने डिप्टी सीएम के बयान पर कड़ा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि जिस सेल्फ रूल और ऑटोनॉमी की बात की जा रही है, वह किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
परिहार ने 1990 के दशक की घटनाओं का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि उस दौर में दंगे भड़काए गए और कश्मीरी पंडितों को पलायन करना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि डिप्टी सीएम चौधरी 'नेशनल कॉन्फ्रेंस के बिना फीस के वकील' की तरह काम कर रहे हैं और जब भी मुख्यमंत्री किसी मुद्दे पर घिरते हैं तो उन्हें आगे कर दिया जाता है।
परिहार ने स्पष्ट किया कि BJP राज्य के दर्जे की बहाली का विरोध नहीं करती, लेकिन इसे ऑटोनॉमी और सेल्फ रूल की मांग से जोड़ना पार्टी को मंजूर नहीं है।
आम जनता और राजनीतिक असर
जम्मू-कश्मीर में विधानसभा गठन के बाद से ही राज्य का दर्जा बहाल करने का मुद्दा सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और विपक्षी BJP के बीच टकराव की प्रमुख वजह रहा है। आलोचकों का कहना है कि स्वायत्तता की मांग को राज्य के दर्जे से जोड़ना राजनीतिक रूप से संवेदनशील है और केंद्र सरकार के साथ संबंधों को प्रभावित कर सकता है।
यह ऐसे समय में आया है जब सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भी जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा बहाल करने के संदर्भ में सरकार से अपेक्षाएँ जताई जा चुकी हैं। राज्य के लाखों लोग इस मुद्दे के राजनीतिक नतीजों पर नजर बनाए हुए हैं।
आगे क्या होगा
सदन में यह विवाद आने वाले सत्रों में और गहराने की संभावना है। नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार का रुख स्पष्ट है कि वह राज्य के दर्जे की बहाली के साथ अधिक स्वायत्तता की मांग को भी उठाती रहेगी, जबकि BJP इसे केंद्र की नीतियों के विरुद्ध मानती है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह मुद्दा जम्मू-कश्मीर की राजनीति में दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है।