25 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

यूपी चकबंदी: 8 वर्षों में 21.12 लाख वादों का निस्तारण, 3,192 गांवों में प्रक्रिया पूरी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
यूपी चकबंदी: 8 वर्षों में 21.12 लाख वादों का निस्तारण, 3,192 गांवों में प्रक्रिया पूरी

सारांश

उत्तर प्रदेश में चकबंदी व्यवस्था ने 2017 से 2025 के बीच बड़ी छलांग लगाई — 21.12 लाख वादों का निस्तारण, गांवों की संख्या 1,925 से 3,192 और 531 न्यायालयों का कंप्यूटरीकरण। किसानों की भूमि सुरक्षा की दिशा में यह एक उल्लेखनीय प्रशासनिक प्रगति है।

मुख्य बातें

चकबंदी निदेशालय के अनुसार 2017 से 2025 के बीच 21,12,784 वादों का निस्तारण किया गया।
चकबंदी पूरी करने वाले गांवों की संख्या 1,925 (2017) से बढ़कर 3,192 (2025) हो गई।
531 चकबंदी न्यायालयों का कंप्यूटरीकरण पूरा, जिनमें 180 सहायक चकबंदी अधिकारी न्यायालय भी शामिल।
नवप्रसार के अंतर्गत आठ वर्षों में 1,302 गांव चकबंदी क्रियाओं में शामिल।
भूमि अभिलेख समय पर तहसीलों तक पहुँचाने से किसानों के राजस्व कार्यों में सुविधा।

उत्तर प्रदेश में चकबंदी व्यवस्था को पिछले आठ वर्षों में उल्लेखनीय गति मिली है। चकबंदी निदेशालय के आंकड़ों के अनुसार, 2017 से 2025 के बीच चकबंदी प्रक्रिया पूर्ण करने वाले गांवों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है और न्यायालयों में 21 लाख 12 हजार 784 वादों का निस्तारण किया गया है। किसानों की भूमि से जुड़े दीर्घकालिक विवादों के समाधान की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक उपलब्धि मानी जा रही है।

गांवों में चकबंदी की प्रगति

निदेशालय के अनुसार, वर्ष 2017 में जहाँ 1,925 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी हुई थी, वहीं वर्ष 2025 तक यह संख्या बढ़कर 3,192 गांव हो गई। इन गांवों में प्रक्रिया पूरी करने के बाद भूमि अभिलेख संबंधित तहसीलों को वापस कर दिए गए। इससे किसानों के राजस्व संबंधी कार्यों को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने में सहायता मिली है।

वादों के निस्तारण में बड़ी छलांग

चकबंदी न्यायालयों में लंबित मामलों के निपटारे के मामले में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज हुआ है। 2017 में 12.55 लाख से अधिक वादों के निस्तारण की स्थिति थी, जो 2025 तक बढ़कर 21.12 लाख से अधिक हो गई। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, इन आठ वर्षों में कुल 21,12,784 वादों का निस्तारण किया गया। गौरतलब है कि भूमि विवाद ग्रामीण उत्तर प्रदेश में कृषि उत्पादकता और सामाजिक शांति — दोनों को प्रभावित करते हैं, इसलिए यह प्रगति व्यापक महत्व रखती है।

न्यायालयों का कंप्यूटरीकरण

चकबंदी व्यवस्था को तकनीक से जोड़ने के लिए न्यायालयों के कंप्यूटरीकरण पर विशेष बल दिया गया। 2017 में इस मद में स्थिति शून्य थी, जबकि 2025 तक कुल 531 न्यायालयों का कंप्यूटरीकरण पूरा किया जा चुका है। इनमें उप संचालक चकबंदी, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी, चकबंदी अधिकारी के न्यायालय तथा 180 सहायक चकबंदी अधिकारी न्यायालय शामिल हैं। यह डिजिटलीकरण न्यायालयी कामकाज में पारदर्शिता और समयबद्धता लाने का प्रयास है।

नवप्रसार में शामिल गांव

चकबंदी प्रक्रिया के नवप्रसार के अंतर्गत पिछले आठ वर्षों में कुल 1,302 गांवों को शामिल किया गया। यह ऐसे समय में आया है जब 2017 में इस श्रेणी में 2,468 गांव दर्ज थे। विभागीय आंकड़ों में इसे आठ वर्षों के दौरान चकबंदी क्रियाओं में समाहित किए गए गांवों के रूप में दर्शाया गया है। इसका उद्देश्य भूमि के बिखरे टुकड़ों को एकीकृत कर किसानों को सुसंगत खेती योग्य भूखंड उपलब्ध कराना है।

आम जनता पर असर

चकबंदी प्रक्रिया सीधे तौर पर किसानों की भूमि-स्वामित्व सुरक्षा से जुड़ी है। न्यायालयों के कंप्यूटरीकरण और वादों के त्वरित निस्तारण से किसानों को लंबे कानूनी उलझनों से राहत मिलने की उम्मीद है। भूमि अभिलेखों के समय पर तहसीलों तक पहुँचने से बैंक ऋण, फसल बीमा और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने में भी सुविधा होगी। राज्य सरकार का लक्ष्य इस व्यवस्था को और अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि भूमि विवादों से मुक्त हुए किसानों की आर्थिक स्थिति में कितना सुधार आया। उत्तर प्रदेश में भूमि के बिखरे टुकड़ों की समस्या दशकों पुरानी है और चकबंदी उसका संस्थागत समाधान है — लेकिन नवप्रसार में गांवों की संख्या 2,468 से घटकर 1,302 रहना संकेत देता है कि नए गांवों को प्रक्रिया में शामिल करने की गति धीमी हो सकती है। डिजिटलीकरण और वाद निस्तारण की तेज रफ्तार तभी सार्थक होगी जब अभिलेखों की गुणवत्ता और जमीनी क्रियान्वयन पर भी उतना ही ध्यान दिया जाए।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर प्रदेश में चकबंदी व्यवस्था क्या है?
चकबंदी एक भूमि समेकन प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत किसानों के बिखरे हुए छोटे-छोटे भूखंडों को एकत्र कर एक सुसंगत खेती योग्य भूखंड दिया जाता है। इससे कृषि उत्पादकता बढ़ती है और भूमि संबंधी विवाद कम होते हैं।
यूपी चकबंदी में 8 वर्षों में कितने वादों का निस्तारण हुआ?
चकबंदी निदेशालय के अनुसार 2017 से 2025 के बीच कुल 21,12,784 वादों का निस्तारण किया गया। 2017 में यह संख्या 12.55 लाख से अधिक थी जो 2025 तक 21.12 लाख से अधिक हो गई।
यूपी में चकबंदी न्यायालयों के कंप्यूटरीकरण की क्या स्थिति है?
2017 में न्यायालयों के कंप्यूटरीकरण की स्थिति शून्य थी, जबकि 2025 तक 531 न्यायालयों का कंप्यूटरीकरण पूरा किया जा चुका है। इनमें उप संचालक चकबंदी, बंदोबस्त अधिकारी, चकबंदी अधिकारी और 180 सहायक चकबंदी अधिकारी न्यायालय शामिल हैं।
चकबंदी प्रक्रिया पूरी होने से किसानों को क्या फायदा होता है?
चकबंदी पूरी होने के बाद भूमि अभिलेख संबंधित तहसीलों को वापस किए जाते हैं, जिससे किसानों को बैंक ऋण, फसल बीमा और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में आसानी होती है। भूमि विवाद कम होने से खेती पर ध्यान केंद्रित करना भी संभव होता है।
2025 तक उत्तर प्रदेश के कितने गांवों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी हुई?
चकबंदी निदेशालय के अनुसार 2025 तक 3,192 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। 2017 में यह संख्या 1,925 थी, यानी आठ वर्षों में लगभग 1,267 अतिरिक्त गांवों में प्रक्रिया पूर्ण हुई।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले