योगी सरकार के 9 साल: 218 फास्ट ट्रैक कोर्ट, 5 करोड़ शिकायतें निपटाईं, महिला सुरक्षा में ज़मीनी बदलाव
सारांश
Key Takeaways
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 9 वर्षों के कार्यकाल में महिला सुरक्षा के मोर्चे पर कई ठोस कदम उठाए गए हैं — जिनमें 218 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट की स्थापना, 2,500 से अधिक पिंक बूथ, और महिला हेल्पलाइन 1090 के ज़रिए 5 करोड़ से अधिक शिकायतों का निवारण शामिल है। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, 2017 से पहले यूपी में महिला अपराध की दर और पेंडिंग मामलों की संख्या राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनती थी, जो अब बदलती दिख रही है।
फास्ट ट्रैक और पॉक्सो कोर्ट: न्याय की रफ़्तार बढ़ी
योगी सरकार के कार्यकाल में 218 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) स्थापित किए गए, जो दुष्कर्म और पॉक्सो मामलों में त्वरित सुनवाई करते हैं। 75 जिलों में पॉक्सो विशेष न्यायालय बनाए गए हैं, जिनमें 6 महीने के भीतर निर्णय देने का लक्ष्य निर्धारित है। उल्लेखनीय है कि पॉक्सो अधिनियम 2012 में ही लागू हो गया था, लेकिन इससे पहले की समाजवादी पार्टी (सपा) सरकार के 5 वर्षों के शासन में एक भी फास्ट ट्रैक पॉक्सो कोर्ट नहीं बनाया गया — यह सरकारी दावा है, जिसे विपक्ष ने अभी तक सार्वजनिक रूप से खंडित नहीं किया है।
ऑपरेशन शक्ति और मिशन शक्ति: दोहरा अभियान
2017 से ऑपरेशन शक्ति के तहत छेड़छाड़ रोकने के लिए विशेष पुलिस अभियान जारी है। 2020 से मिशन शक्ति के अंतर्गत महिला सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन का एकीकृत अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत 40,000 पुलिसकर्मियों को अपराध रोकने का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। 2017 में मुख्यमंत्री का पद संभालते ही योगी आदित्यनाथ ने एंटी रोमियो स्क्वाड का गठन किया, जिन्होंने आँकड़ों के अनुसार फरवरी 2026 तक करोड़ों लोगों की जाँच की और हज़ारों मनचलों के विरुद्ध मुकदमे दर्ज किए।
पिंक बूथ, सेफ सिटी और हेल्पलाइन: ज़मीनी ढाँचा
महिलाओं की सुरक्षा के लिए 2,500 से अधिक पिंक बूथ और आउटपोस्ट स्थापित किए गए हैं। पिंक पेट्रोलिंग — दोपहिया और चौपहिया वाहनों से — भी शुरू की गई है। सेफ सिटी प्रोजेक्ट के तहत लखनऊ समेत कई जिलों को हज़ारों सीसीटीवी कैमरों से जोड़ा गया है, जिससे ऑनलाइन निगरानी सुनिश्चित की जा सके। महिला हेल्पलाइन 1090 के ज़रिए 5 करोड़ से अधिक शिकायतों का निवारण किया गया है और इसी माध्यम से एफआईआर दर्ज कराने की सुविधा भी उपलब्ध है। योगी सरकार में पहली बार हर जिले में कम से कम एक महिला पुलिस थाना संचालित किया जा रहा है।
चार्जशीट और दोषसिद्धि दर में सुधार
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, 2012 में महिला अपराध मामलों में चार्जशीट दर 58.3% थी, जो 2022 तक बढ़कर 76.2% हो गई। इसी अवधि में दोषसिद्धि दर 17.2% से बढ़कर 27.8% हो गई। सपा शासन में न्यायालयों में महिलाओं के प्रति अपराधों के औसतन 78% मामले लंबित रहते थे; योगी सरकार का दावा है कि फास्ट ट्रैक और पॉक्सो कोर्ट के माध्यम से यह आँकड़ा 65% तक लाया जा चुका है।
आगे की राह
सरकार की मंशा के अनुसार महिला अपराध की केवल रिपोर्ट दर्ज होना पर्याप्त नहीं, बल्कि कार्रवाई और सजा सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। आँकड़ों में सुधार दिख रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि दोषसिद्धि दर और लंबित मामलों की संख्या में और कमी लाना अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। यह देखना होगा कि आने वाले वर्षों में ये संस्थागत बदलाव दीर्घकालिक परिणाम दे पाते हैं या नहीं।