बंगाल चुनाव विवाद: ईवीएम, एसआईआर और चुनाव आयोग की भूमिका पर नेताओं में तीखी जुबानी जंग
सारांश
पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले सियासी पारा चढ़ा हुआ है — ईवीएम नहीं, बल्कि एसआईआर अब असली विवाद की जड़ बन गया है। उमर अब्दुल्ला से लेकर वृंदा करात तक, हर दल की अपनी-अपनी चिंता है, लेकिन सवाल एक ही है: क्या बंगाल में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संभव है?
मुख्य बातें
1 मई को पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर ईवीएम , एसआईआर और चुनाव आयोग की भूमिका पर राजनीतिक घमासान तेज हुआ।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि असली चिंता ईवीएम नहीं, बल्कि एसआईआर के ज़रिए मतदाता सूचियों में हेरफेर है।
केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा ने ममता बनर्जी पर चुनावी संस्थाओं को कमज़ोर करने का आरोप लगाया।
केंद्रीय राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर हिंसा और अराजकता को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
सीपीआई (एम) नेता वृंदा करात ने TMC और BJP दोनों की आलोचना करते हुए बंगाल को लोकतांत्रिक संकट में बताया।
कोलकाता के स्ट्रॉन्गरूम के बाहर तनाव की भी खबरें आईं।
पश्चिम बंगाल की चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक संग्राम 1 मई को और तीखा हो गया, जब विभिन्न दलों के नेताओं ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) की सुरक्षा, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया और चुनाव आयोग (ECI) की निष्पक्षता पर एक-दूसरे पर आरोपों की बौछार की। इसी बीच कोलकाता में ईवीएम रखे जाने वाले स्ट्रॉन्गरूम के बाहर भी तनाव का माहौल बना रहा।
उमर अब्दुल्ला का रुख: ईवीएम नहीं, एसआईआर है असली मुद्दा
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पत्रकारों से बातचीत में ईवीएम विवाद और एसआईआर को लेकर चल रही बहस के बीच स्पष्ट रेखा खींची। उन्होंने कहा,
संपादकीय दृष्टिकोण
वहीं एसआईआर को लेकर उठी आपत्तियाँ नई और अधिक केंद्रित हैं। उमर अब्दुल्ला का यह स्वीकार करना कि ईवीएम में पूर्व-मतदान धांधली संभव नहीं, राजनीतिक रूप से उल्लेखनीय है — लेकिन एसआईआर पर उनकी चिंता विपक्ष की बदलती रणनीति को दर्शाती है। वृंदा करात का दोनों प्रमुख दलों को एक साथ कटघरे में खड़ा करना बताता है कि बंगाल में लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भरोसे का संकट सत्ता-विपक्ष की पारंपरिक लकीरों से परे जा चुका है। असली परीक्षा यह है कि चुनाव आयोग इन आरोपों का जवाब पारदर्शिता से देता है या चुप्पी से।
RashtraPress
9 अगस्त 2026
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पश्चिम बंगाल चुनाव में एसआईआर विवाद क्या है?
एसआईआर यानी 'विशेष गहन पुनरीक्षण' मतदाता सूचियों की समीक्षा की एक प्रक्रिया है। विपक्षी नेताओं, विशेष रूप से उमर अब्दुल्ला, ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया का उपयोग मतदाता सूचियों में हेरफेर के लिए किया जा रहा है, जो ईवीएम से भी बड़ी चुनावी चिंता बन गई है।
उमर अब्दुल्ला ने ईवीएम पर क्या कहा?
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्पष्ट किया कि उन्हें चुनाव से पहले ईवीएम में धांधली पर विश्वास नहीं है। हालाँकि, उन्होंने कहा कि मतदान के बाद ईवीएम की सुरक्षा करना राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है और ममता बनर्जी को स्ट्रॉन्गरूम के बाहर कार्यकर्ता तैनात करने का अधिकार है।
बीएल वर्मा ने ममता बनर्जी पर क्या आरोप लगाए?
केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनाव आयोग के कामकाज को प्रभावित करने की कोशिश कर रही हैं और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमज़ोर कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह ममता का मुख्यमंत्री के रूप में आखिरी कार्यकाल हो सकता है।
वृंदा करात ने बंगाल की स्थिति पर क्या कहा?
सीपीआई (एम) नेता वृंदा करात ने तृणमूल कांग्रेस और भाजपा, दोनों की आलोचना की। उन्होंने TMC पर विपक्ष के लिए जगह खत्म करने और BJP पर वोटर लिस्ट में हेरफेर व केंद्रीय बलों की पक्षपातपूर्ण तैनाती का आरोप लगाया।
कोलकाता के स्ट्रॉन्गरूम के बाहर क्या हुआ?
कोलकाता में ईवीएम रखे जाने वाले स्ट्रॉन्गरूम के बाहर कथित हंगामे और तनाव की खबरें आईं। वृंदा करात ने इस घटना का उल्लेख करते हुए इसे बंगाल में लोकतंत्र के लिए गंभीर स्थिति का प्रतीक बताया।