यूपी के 62 जनपदों में 39,721 हेक्टेयर गोचर भूमि अवैध कब्जे से मुक्त, गोवंश संरक्षण को बल
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के 62 जनपदों में 39,721.541 हेक्टेयर गोचर भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराने में सफलता हासिल की है। 14 सितंबर 2026 को जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह अभियान राज्य में निरंतर जारी है और सरकार की प्राथमिकता इस भूमि का उपयोग गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सुनिश्चित करना है।
मुक्त कराई गई भूमि का विवरण
अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि प्रदेश के 62 जनपदों में चलाए गए लगातार अभियान के तहत कुल 39,721.541 हेक्टेयर गोचर भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया है। यह भूमि अब गोवंश के चारागाह और संरक्षण के लिए उपलब्ध होगी, जो ग्रामीण पशुपालन अर्थव्यवस्था को मज़बूती देने में सहायक होगी।
गौरतलब है कि गोचर भूमि पर अवैध कब्जे की समस्या उत्तर प्रदेश सहित देश के कई राज्यों में दशकों से चली आ रही है। इस अभियान को राज्य सरकार की सार्वजनिक संपत्ति पुनः प्राप्ति नीति का हिस्सा माना जा रहा है।
सीएम सहभागिता योजना का विस्तार
सीएम सहभागिता योजना के माध्यम से निराश्रित गोवंश को इच्छुक एवं पात्र लाभार्थियों को सुपुर्द कर उनके संरक्षण और देखभाल की व्यवस्था की जा रही है। मुकेश मेश्राम ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत अब तक 93,287 लाभार्थियों को 1,67,658 गोवंश सुपुर्द किए जा चुके हैं।
योजना के तहत लाभार्थी सुपुर्द किए गए गोवंश की देखभाल, चारा-पानी और संरक्षण की जिम्मेदारी लेते हैं। इससे गोवंश को सुरक्षित वातावरण मिलता है और साथ ही ग्रामीण परिवारों को पशुपालन से जोड़कर उनकी आजीविका को भी मज़बूत किया जा रहा है।
आम जनता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर
सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर निराश्रित गोवंश की उपस्थिति न केवल यातायात के लिए खतरा बनती है, बल्कि किसानों की फसलों को भी नुकसान पहुँचाती है। सरकारी अभियान से इस समस्या में कमी आने की उम्मीद है।
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में ग्रामीण पशुपालन को आर्थिक गतिविधि के रूप में प्रोत्साहित करने की कोशिशें तेज हो रही हैं। मुक्त कराई गई गोचर भूमि के उपयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में चारे की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे पशुपालकों को सीधा लाभ मिलेगा।
सरकार की प्राथमिकता और आगे की योजना
अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम के अनुसार, प्रदेश सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि गोचर भूमि को सुरक्षित रखते हुए उसका उपयोग गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सुनिश्चित किया जाए। इससे निराश्रित गोवंश के संरक्षण की व्यवस्था को और अधिक मज़बूती मिलेगी।
जनसहभागिता को इस पूरे अभियान की रीढ़ बनाया गया है — सीएम सहभागिता योजना इसी दिशा में एक प्रमुख पहल है। आने वाले समय में शेष जनपदों में भी ऐसे अभियान जारी रहने की संभावना है।