CM योगी का दावा: UP के किसानों को अब लागत का डेढ़ गुना मूल्य, 24 लाख हेक्टेयर में सिंचाई विस्तार
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 3 जून 2026 को गोरखपुर में आयोजित संयुक्त मंडलीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी-2026 के शुभारंभ पर कहा कि प्रदेश के किसानों को अब उनकी उपज का लागत मूल्य से डेढ़ गुना तक पारिश्रमिक सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि पिछले नौ वर्षों में केंद्र और राज्य की किसान-केंद्रित नीतियों ने कृषि क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है, और किसान ‘संकट से सम्मान’ तक पहुँचा है।
मुख्य घोषणाएँ और दावे
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 में सरकार गठन के बाद पहली ही कैबिनेट बैठक में किसानों की कर्जमाफी का निर्णय लिया गया, जिससे लाखों छोटे और सीमांत किसानों को राहत मिली। उन्होंने जोड़ा कि प्रदेश में पहली बार सरकारी क्रय केंद्रों का व्यापक नेटवर्क स्थापित कर किसानों की उपज की सीधे खरीद की व्यवस्था की गई, जिससे न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ ज़मीनी स्तर तक पहुँच सके।
सिंचाई परियोजनाओं का विस्तार
योगी ने कहा कि दशकों से लंबित बाण सागर परियोजना, सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना और बुंदेलखंड क्षेत्र की महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं को पूरा किया गया है। इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश में लगभग 24 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए निर्णायक बताया जा रहा है।
‘2005–2014’ की तुलना का संदर्भ
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2005 से 2014 के बीच देश में लाखों किसानों ने आत्महत्या जैसे कदम उठाए, जिसके पीछे उन्होंने गुणवत्तापूर्ण बीजों की कमी, खेती की बढ़ती लागत, MSP का लाभ न मिलना और प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के प्रभावी तंत्र के अभाव को प्रमुख कारण बताया। उनके अनुसार, कठिन परिश्रम के बावजूद उपज का उचित मूल्य न मिलने से कृषि क्षेत्र लगातार संकट में फँसता गया। गौरतलब है कि किसान आत्महत्याओं और MSP क्रियान्वयन के आँकड़ों पर देशभर में लंबे समय से बहस चलती रही है।
आगे का रोडमैप
योगी ने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को लाभकारी बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि खरीफ उत्पादकता गोष्ठी जैसे कार्यक्रम आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों और वैज्ञानिक खेती की जानकारी किसानों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। आने वाले खरीफ सीज़न में इन्हीं तकनीकों के ज़मीनी असर पर सरकार की प्राथमिकताओं की असली परीक्षा होगी।