26 अगस्त 2026
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यूपीएग्रीज: पूर्वी UP के 21 और बुंदेलखंड के 7 जनपदों में कृषि क्रांति, Google-ITC-AquaBridge से MOU

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यूपीएग्रीज: पूर्वी UP के 21 और बुंदेलखंड के 7 जनपदों में कृषि क्रांति, Google-ITC-AquaBridge से MOU

सारांश

उत्तर प्रदेश ने Google, ITC और AquaBridge के साथ MOU साइन कर ₹4,000 करोड़ की यूपीएग्रीज परियोजना को नई रफ़्तार दी। पूर्वी UP के 21 और बुंदेलखंड के 7 जनपदों के 10 लाख किसानों को डिजिटल नेटवर्क, क्लाइमेट स्मार्ट खेती और ग्लोबल वैल्यू चेन से जोड़ने का रोडमैप तैयार है।

मुख्य बातें

26 अगस्त 2026 को लखनऊ में Google, ITC और AquaBridge के साथ यूपीएग्रीज के तहत MOU हस्ताक्षरित।
परियोजना का दायरा — पूर्वी UP के 21 और बुंदेलखंड के 7 जनपद , 123 विकास खंड , 6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र।
लाभार्थी: 10 लाख किसान , 35 हज़ार मत्स्य उत्पादक और 3 लाख महिलाएँ ; परियोजना लागत लगभग ₹4,000 करोड़ ।
किसान की प्रति एकड़ आय में 20-30% वृद्धि, यूरिया उपयोग में 25% कमी और श्रम-सिंचाई में 25-30% बचत का लक्ष्य।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निकट मेगा फूड पार्क और एग्री एक्सपोर्ट सेंटर प्रस्तावित।
उन्नाव में 60 एकड़ का इंटीग्रेटेड एक्वाकल्चर पार्क और बहराइच में 1,500 एकड़ का EU-कंप्लायंट धान क्लस्टर विकसित होगा।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में 26 अगस्त 2026 को लखनऊ में विश्व बैंक वित्तपोषित यूपी एग्रीकल्चर ग्रोथ एंड रूरल एंटरप्राइज इकोसिस्टम स्ट्रेंथनिंग (यूपीएग्रीज) परियोजना के अंतर्गत Google, ग्लोबल नेटवर्क फॉर ह्यूमैनिटी, ITC और AquaBridge के साथ महत्वपूर्ण एमओयू हस्ताक्षरित किए गए। ये समझौते पूर्वी उत्तर प्रदेश के 21 और बुंदेलखंड के 7 जनपदों में कृषि उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में निर्णायक कदम माने जा रहे हैं।

यूपीएग्रीज परियोजना: दायरा और लक्ष्य

लगभग ₹4,000 करोड़ की विश्व बैंक समर्थित इस परियोजना का केंद्र 28 जनपदों के 123 विकास खंड हैं। परियोजना का लक्ष्य 6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 10 लाख किसानों, 35 हज़ार मत्स्य उत्पादक किसानों और 3 लाख महिलाओं को सीधा लाभ पहुँचाना है। मुख्यमंत्री योगी ने स्पष्ट किया कि यह केवल उत्पादन बढ़ाने की योजना नहीं, बल्कि किसान को 'प्रॉस्पेरिटी पार्टनर' बनाने की व्यापक रणनीति है।

खरीफ 2026 में 1.75 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को आच्छादित किया जा चुका है। रबी फसल (2026-27) में भी 1.75 लाख हेक्टेयर में गेहूँ, मटर, चना, मसूर और सरसों की उत्पादकता बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित है।

Google और नेटवर्क फॉर ह्यूमैनिटी के साथ डिजिटल कृषि नेटवर्क

Google एवं नेटवर्क फॉर ह्यूमैनिटी के साथ साझेदारी में एक ओपन नेटवर्क फॉर एग्रीकल्चर विकसित किया जाएगा। यह डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर UPI और ONDC जैसे ओपन नेटवर्क मॉडल से प्रेरित होगा। इसके माध्यम से किसानों को एक ही इंटरफेस पर मौसम, बाज़ार-मूल्य, मृदा परीक्षण, कृषि सलाह और विभिन्न एग्रीटेक सेवाएँ उपलब्ध होंगी — अलग-अलग ऐप की आवश्यकता समाप्त होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एग्रीटेक स्टार्टअप और कंपनियाँ भी इस खुले नेटवर्क के ज़रिये बड़ी संख्या में किसानों तक अपनी सेवाएँ पहुँचा सकेंगी। उनका कहना था, '21वीं सदी मिट्टी व मौसम के साथ डेटा साइंस, विज्ञान-तकनीक और मार्केट इंटेलिजेंस से भी संचालित होगी।'

ITC के साथ क्लाइमेट स्मार्ट कृषि का विस्तार

ITC के साथ साझेदारी में धान और गेहूँ के क्लाइमेट रेज़िलिएंट कमोडिटी क्लस्टर विकसित किए जाएँगे। 2 लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र में क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर का विस्तार प्रस्तावित है, जिसमें शून्य जुताई, डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR), क्लाइमेट रेज़िलिएंट उन्नत बीज और डिसिजन न्यूट्रेंट मैनेजमेंट शामिल होंगे।

बहराइच में 1,500 एकड़ का EU कंप्लायंट एवं MRL मानकों के अनुरूप धान क्लस्टर विकसित करने का प्रस्ताव है। इस पहल से किसान की प्रति एकड़ आय में 20-30% वृद्धि, यूरिया उपयोग में 25% की कमी और श्रम व सिंचाई में 25-30% की बचत का लक्ष्य रखा गया है।

AquaBridge के साथ ब्लू इकॉनमी इकोसिस्टम

AquaBridge के साथ समझौते के तहत मत्स्य पालन को पारंपरिक गतिविधि से तकनीक-संचालित उद्यम में बदलने की योजना है। मत्स्य किसानों, सहकारी समितियों और उद्यमियों को AI आधारित एक्वाकल्चर मैनेजमेंट, ऑटोमैटिक फीडिंग टेक्नोलॉजी और आधुनिक प्रशिक्षण से जोड़ा जाएगा।

उन्नाव में IMC इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत 60 एकड़ क्षेत्र में एक इंटीग्रेटेड एक्वाकल्चर परियोजना विकसित की जा रही है, जिसमें हैचरी, फीड मैन्युफैक्चरिंग, प्रोसेसिंग फैसिलिटी और एक समर्पित प्रशिक्षण केंद्र प्रस्तावित है।

एक्सपोर्ट और ग्लोबल वैल्यू चेन से जुड़ाव

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निकट एक मेगा फूड पार्क और एग्री एक्सपोर्ट सेंटर विकसित करने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश की कृषि उपज को मंडी से आगे प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन, लॉजिस्टिक और निर्यात से जोड़ना है। IARI (ईरी) के साथ साझेदारी में वैज्ञानिक और जलवायु-सचेत पद्धतियाँ खेतों तक पहुँचाई जा रही हैं; खरीफ 2026 में 3,000 हेक्टेयर में DSR का प्रयोग किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जब खेत डिजिटल होंगे, खेती क्लाइमेट स्मार्ट होगी और बाज़ार वैश्विक होगा, तो किसान की आय में वृद्धि स्वाभाविक परिणाम होगी। यूपीएग्रीज उत्तर प्रदेश को स्मार्ट एग्री रेगुलेशन का राष्ट्रीय केंद्र बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी इन क्षेत्रों में किसान पलायन और कृषि संकट की खबरें नहीं थमीं। ₹4,000 करोड़ की इस परियोजना में डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, क्लाइमेट स्मार्ट खेती और निर्यात लिंकेज का संयोजन उत्साहजनक है, परंतु 10 लाख किसानों तक लाभ पहुँचाने की समयसीमा और सत्यापन तंत्र अभी अस्पष्ट है। Google जैसे तकनीकी दिग्गज की भागीदारी नवाचार की संभावना बढ़ाती है, लेकिन ग्रामीण डिजिटल साक्षरता और कनेक्टिविटी की बाधाएँ इस मॉडल की सबसे बड़ी परीक्षा बनेंगी।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपीएग्रीज परियोजना क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
यूपीएग्रीज (UP Agriculture Growth and Rural Enterprise Ecosystem Strengthening) एक विश्व बैंक वित्तपोषित परियोजना है जिसकी अनुमानित लागत लगभग ₹4,000 करोड़ है। इसका लक्ष्य पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के 28 जनपदों में कृषि उत्पादकता बढ़ाना, किसानों की आय में सुधार करना और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देना है।
इन MOU से किसानों को क्या-क्या फायदे मिलेंगे?
Google और नेटवर्क फॉर ह्यूमैनिटी के साथ MOU से किसानों को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मौसम, बाज़ार-मूल्य, मृदा परीक्षण और कृषि सलाह मिलेगी। ITC के साथ साझेदारी से क्लाइमेट स्मार्ट खेती और प्रति एकड़ आय में 20-30% वृद्धि का लक्ष्य है, जबकि AquaBridge के ज़रिये मत्स्य किसानों को AI-आधारित तकनीक और प्रशिक्षण मिलेगा।
इस परियोजना से कितने किसान लाभान्वित होंगे?
परियोजना का लक्ष्य 6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 10 लाख किसानों, 35 हज़ार मत्स्य उत्पादक किसानों और 3 लाख महिलाओं को लाभ पहुँचाना है। यह 28 जनपदों के 123 विकास खंडों में लागू की जा रही है।
बुंदेलखंड और पूर्वी UP को ही इस परियोजना में प्राथमिकता क्यों दी गई?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार ये क्षेत्र कृषि उत्पादकता में दशकों से पिछड़े रहे हैं और इन्हें उपेक्षित छोड़ दिया गया था। इन क्षेत्रों में कृषि परिवर्तन की सबसे अधिक संभावना और आवश्यकता दोनों हैं, इसलिए विश्व बैंक के साथ चर्चा के बाद इन्हें प्राथमिकता दी गई।
नोएडा एयरपोर्ट के पास प्रस्तावित मेगा फूड पार्क का क्या महत्व है?
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निकट प्रस्तावित मेगा फूड पार्क और एग्री एक्सपोर्ट सेंटर का उद्देश्य उत्तर प्रदेश की कृषि उपज को सीधे प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और वैश्विक निर्यात से जोड़ना है। यह किसानों को मंडी-आधारित बाज़ार से आगे ग्लोबल वैल्यू चेन का हिस्सा बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।
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