मेटा का $16.68 अरब का बड़ा समझौता: फेसबुक-इंस्टाग्राम पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर 29 अमेरिकी राज्यों से सुलह
सारांश
मुख्य बातें
मेटा प्लेटफॉर्म्स ने 26 अगस्त 2026 को अमेरिका के 29 राज्यों के साथ एक ऐतिहासिक समझौते पर सहमति जताई, जिसके तहत कंपनी $16.68 अरब डॉलर तक का भुगतान करेगी। यह मामला फेसबुक और इंस्टाग्राम पर बच्चों और किशोरों के लिए नशे की लत वाले फीचर्स, भ्रामक सुरक्षा दावों और नाबालिगों के डेटा के अनुचित संग्रह से जुड़ा था। अदालती दस्तावेजों के अनुसार, यह समझौता कैलिफोर्निया की एक संघीय अदालत में दर्ज मुकदमे के दौरान हुआ।
मुकदमे की पृष्ठभूमि और मुख्य आरोप
राज्यों का आरोप था कि मेटा ने कैलिफोर्निया, कोलोराडो, केंटकी और न्यू जर्सी सहित कई राज्यों के उपभोक्ता संरक्षण कानूनों का उल्लंघन किया। मुकदमे में यह भी कहा गया कि कंपनी ने बाल ऑनलाइन गोपनीयता संरक्षण अधिनियम (COPPA) की अनदेखी करते हुए उन बच्चों की व्यक्तिगत जानकारी एकत्र की, जिनके बारे में कंपनी को उनकी नाबालिग होने की जानकारी थी — और इसके लिए न तो अभिभावकों को सूचित किया गया, न ही उनकी अनुमति ली गई।
इसके अतिरिक्त, मुकदमे में आरोप लगाया गया कि मेटा ने बच्चों के डेटा का उपयोग मशीन लर्निंग और जनरेटिव एआई मॉडलों को प्रशिक्षित करने के लिए किया। यह ऐसे समय में आया है जब एआई के लिए डेटा संग्रह को लेकर वैश्विक स्तर पर नियामकीय दबाव बढ़ रहा है।
समझौते की शर्तें और नए सुरक्षा उपाय
समझौते के अंतर्गत मेटा अमेरिका में किशोर उपयोगकर्ताओं के लिए कई अनिवार्य सुरक्षा उपाय लागू करेगी। इनमें दैनिक स्क्रीन-टाइम सीमा निर्धारित करना और रात के घंटों में प्लेटफॉर्म तक पहुँच पर प्रतिबंध जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। हालांकि, मेटा ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी प्रकार की गलती या कानूनी जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करती।
गौरतलब है कि मुकदमे की सुनवाई शुरू होने से पहले मेटा ने खुद बताया था कि कुछ राज्य उस पर $1.4 ट्रिलियन तक के दंड की मांग कर रहे थे, जबकि बाद में राज्यों ने संकेत दिया कि वास्तविक अपेक्षित राशि लगभग $200 अरब के करीब हो सकती है। अंततः $16.68 अरब का समझौता दोनों पक्षों के लिए एक व्यावहारिक मध्य मार्ग साबित हुआ।
मेटा का पक्ष और बाज़ार की प्रतिक्रिया
मेटा ने पूरे मुकदमे के दौरान इन आरोपों से इनकार किया और तर्क दिया कि उसने युवा उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के लिए व्यापक कदम उठाए हैं। कंपनी का यह भी कहना था कि 'सोशल मीडिया की लत' को औपचारिक रूप से कोई मनोरोग संबंधी स्थिति नहीं माना गया है, इसलिए उस आधार पर उपभोक्ताओं को गुमराह करने का आरोप टिकाऊ नहीं है।
समझौते की घोषणा के बाद निवेशकों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और बाज़ार खुलने से पहले के कारोबार में मेटा के शेयर लगभग 4.4 प्रतिशत तक चढ़ गए — जो दर्शाता है कि बाज़ार ने इस कानूनी अनिश्चितता के खात्मे को राहत के रूप में देखा।
व्यापक उद्योग परिदृश्य
यह मेटा अकेली नहीं है जो इस तरह के दबाव का सामना कर रही है। स्नैप, अल्फाबेट (यूट्यूब की मूल कंपनी) और बाइटडांस (टिकटॉक की मूल कंपनी) भी हजारों मुकदमों में उलझी हैं, जिनमें आरोप है कि इन प्लेटफॉर्म्स को जानबूझकर ऐसे फीचर्स के साथ डिज़ाइन किया गया जो बच्चों को लंबे समय तक स्क्रीन पर बनाए रखते हैं।
यह समझौता ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर बहस तेज हो रही है और कई देशों में नए नियामकीय ढाँचे बनाए जा रहे हैं। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मेटा वादा किए गए सुरक्षा उपायों को किस हद तक प्रभावी रूप से लागू करती है।