20 अगस्त 2026
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मेटा पर सीनेटर वॉर्नर का बड़ा सवाल: बाल यौन शोषण विज्ञापनों से क्या कंपनी ने कमाई की?

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मेटा पर सीनेटर वॉर्नर का बड़ा सवाल: बाल यौन शोषण विज्ञापनों से क्या कंपनी ने कमाई की?

सारांश

अमेरिकी सीनेटर मार्क वॉर्नर ने मेटा सीईओ जुकरबर्ग को पत्र लिखकर पूछा है कि फेसबुक और इंस्टाग्राम पर नौ महीने तक चले बाल यौन शोषण सामग्री वाले 50 से अधिक पेड विज्ञापनों से कंपनी ने कमाई की या नहीं — और मेटा की अपनी समीक्षा प्रणाली ने इन्हें मंजूरी कैसे दी।

मुख्य बातें

सीनेटर मार्क वॉर्नर ने 18 अगस्त 2026 को मेटा सीईओ मार्क जुकरबर्ग को पत्र लिखकर बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम) वाले पेड विज्ञापनों पर जवाब माँगा।
टेक ट्रांसपेरेंसी प्रोजेक्ट की रिपोर्ट के अनुसार मेटा के प्लेटफॉर्म पर नवंबर 2025 से अगस्त 2026 तक 50 से अधिक ऐसे विज्ञापन चले।
ये विज्ञापन अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप समेत एक दर्जन से अधिक देशों के उपयोगकर्ताओं तक पहुँचे; एक विज्ञापन यूरोप में 2,500 से अधिक खातों तक गया।
मेटा की अपनी समीक्षा प्रणाली ने इन विज्ञापनों को मंजूरी दी थी, जो कंपनी की विज्ञापन नीति का सीधा उल्लंघन है।
मेटा को 26 अगस्त 2026 तक जवाब देने की समयसीमा दी गई है।
वॉर्नर ने जुलाई में सेफ एआई एक्ट भी पेश किया था जो सीएसएएम उत्पन्न करने वाली एआई प्रणालियों पर प्रतिबंध लगाएगा।

अमेरिकी सीनेटर मार्क वॉर्नर ने 18 अगस्त 2026 को मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग को एक औपचारिक पत्र भेजकर उन पेड विज्ञापनों पर कड़े सवाल उठाए हैं, जिनमें कथित तौर पर बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम) और बिना सहमति के बनाए गए अंतरंग चित्र (एनसीआईआई) शामिल थे। वर्जीनिया से डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर वॉर्नर ने यह भी जानना चाहा है कि क्या मेटा ने ऐसे विज्ञापनों से आर्थिक लाभ कमाया।

मुख्य आरोप और पत्र की विषय-वस्तु

वॉर्नर ने अपने पत्र में टेक ट्रांसपेरेंसी प्रोजेक्ट (टीटीपी) की एक शोध रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसके अनुसार मेटा ने नौ महीने की अवधि में फेसबुक, इंस्टाग्राम, मैसेंजर और थ्रेड्स पर एआई से निर्मित बाल यौन शोषण सामग्री वाले दर्जनों पेड विज्ञापन प्रसारित किए। शोधकर्ताओं को मेटा की सार्वजनिक विज्ञापन लाइब्रेरी में बच्चों के शोषण से संबंधित 50 से अधिक तस्वीरों और वीडियो वाले विज्ञापन मिले, जो नवंबर 2025 से अगस्त 2026 की शुरुआत तक प्रसारित होते रहे।

वॉर्नर ने पत्र में लिखा, 'यह पूरी तरह अस्वीकार्य है कि इस प्रकार की सामग्री मेटा के प्लेटफॉर्म पर दिखाई दे और इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि आपकी कंपनी इससे लाभ कमाती हुई प्रतीत होती है।'

विज्ञापनों की प्रकृति और पहुँच

इन विज्ञापनों को अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप के एक दर्जन से अधिक देशों के उपयोगकर्ताओं तक पहुँचाया गया। पत्र के अनुसार, कम से कम एक विज्ञापन यूरोप में 2,500 से अधिक सोशल मीडिया खातों तक पहुँचा। कुछ विज्ञापन ऐसे ऐप या वेबसाइटों की ओर ले जाते थे जो किसी व्यक्ति की तस्वीर को कृत्रिम रूप से नग्न दिखाने वाले ('न्यूडिफाई') चित्र बना सकते हैं। अन्य विज्ञापनों में बच्चों की तस्वीरों का इस्तेमाल थंबनेल के रूप में किया गया था जो वयस्कों के लिए आपत्तिजनक सामग्री की ओर ले जाते थे, जबकि कुछ में बच्चों के चेहरे को वयस्क शरीरों पर लगाया गया था।

मेटा की समीक्षा प्रणाली पर सवाल

वॉर्नर ने यह भी रेखांकित किया कि जिन सीएसएएम और एनसीआईआई विज्ञापनों की पहचान हुई, वे सभी पेड विज्ञापन थे और मेटा की अपनी प्रणालियों ने कंपनी की विज्ञापन नीतियों के तहत उनकी समीक्षा कर उन्हें मंजूरी दी थी। उन्होंने लिखा, 'यह विश्वास करना कठिन है कि मेटा अनजाने में इतनी स्पष्ट रूप से अवैध सामग्री की मेजबानी कर रहा था, जबकि कंपनी स्वयं दावा करती है कि वह सभी विज्ञापनों की समीक्षा और स्वीकृति करती है।' गौरतलब है कि शोधकर्ताओं को मेटा को सूचित किए जाने के बाद भी नए विज्ञापन मिलते रहे।

भारत कनेक्शन और बीबीसी जांच

यह सूचना जुलाई 2026 में बीबीसी की उस जांच के बाद दी गई थी, जिसमें भारत में इंस्टाग्राम पर इसी प्रकार के विज्ञापनों के चलने का खुलासा हुआ था। पत्र में 11 चीनी पुनर्विक्रेताओं द्वारा दिए गए उन विज्ञापनों के बारे में भी जानकारी मांगी गई है जिन्हें बाल शोषण, उत्पीड़न या 'न्यूडिफाई' सेवाओं से संबंधित नीतियों के उल्लंघन के कारण हटाया गया था।

सीनेटर की माँगें और आगे की कार्रवाई

वॉर्नर ने मेटा को 26 अगस्त 2026 तक जवाब देने की समयसीमा तय की है। उन्होंने विज्ञापनों की प्रसारण तिथियाँ, लक्ष्य निर्धारण के तरीके, कुल दर्शनों (इम्प्रेशन), अमेरिका में हुए दर्शनों और मेटा को प्राप्त भुगतान का विवरण माँगा है। साथ ही यह भी पूछा है कि प्रत्येक विज्ञापन की पहचान कब हुई, उसे कब हटाया गया और उसकी सूचना राष्ट्रीय गुमशुदा एवं शोषित बच्चों के केंद्र (एनसीएमईसी) को कब दी गई। उन्होंने 2025-26 के दौरान अमेरिका में 13 से 18 वर्ष के किशोर उपयोगकर्ताओं को दिखाए गए उन पेड विज्ञापनों का आँकड़ा भी माँगा है जिन्हें बाद में शोषणकारी सामग्री के कारण चिह्नित किया गया। गौरतलब है कि वॉर्नर ने जुलाई में सेफ एआई एक्ट नामक विधेयक भी पेश किया था, जिसका उद्देश्य ऐसी एआई प्रणालियों पर रोक लगाना है जो सीएसएएम या एनसीआईआई तैयार कर सकती हैं। मेटा की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीनेटर वॉर्नर ने मेटा पर क्या आरोप लगाए हैं?
सीनेटर वॉर्नर ने आरोप लगाया है कि मेटा ने अपने प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम) और बिना सहमति के बनाए गए अंतरंग चित्रों (एनसीआईआई) वाले पेड विज्ञापन चलने दिए और संभवतः इनसे आर्थिक लाभ भी कमाया। उन्होंने 18 अगस्त 2026 को मेटा सीईओ जुकरबर्ग को पत्र लिखकर 26 अगस्त तक जवाब माँगा है।
ये विज्ञापन कितने समय तक और कहाँ-कहाँ चले?
टेक ट्रांसपेरेंसी प्रोजेक्ट की रिपोर्ट के अनुसार ये विज्ञापन नवंबर 2025 से अगस्त 2026 की शुरुआत तक, यानी लगभग नौ महीने, फेसबुक, इंस्टाग्राम, मैसेंजर और थ्रेड्स पर प्रसारित होते रहे। अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप समेत एक दर्जन से अधिक देशों के उपयोगकर्ता इनसे प्रभावित हुए।
इस मामले में भारत का क्या संबंध है?
जुलाई 2026 में बीबीसी ने एक जांच में खुलासा किया था कि भारत में इंस्टाग्राम पर भी इसी प्रकार के विज्ञापन चल रहे थे। उसी जांच के बाद शोधकर्ताओं ने मेटा को सूचित किया था, लेकिन सूचना के बाद भी नए विज्ञापन मिलते रहे।
मेटा की विज्ञापन नीति इस मामले में कैसे विफल रही?
मेटा की अपनी विज्ञापन नीति स्पष्ट रूप से कहती है कि विज्ञापनों में नग्नता या यौन संकेतात्मक सामग्री नहीं होनी चाहिए। इसके बावजूद, पत्र के अनुसार, मेटा की समीक्षा प्रणाली ने इन पेड विज्ञापनों को मंजूरी दी — जो सीधे तौर पर कंपनी की अपनी नीति का उल्लंघन है।
सेफ एआई एक्ट क्या है और इससे यह मामला कैसे जुड़ा है?
सेफ एआई एक्ट वॉर्नर द्वारा जुलाई 2026 में पेश किया गया विधेयक है, जिसका उद्देश्य ऐसी एआई प्रणालियों पर प्रतिबंध लगाना है जो सीएसएएम या एनसीआईआई तैयार कर सकती हैं। मेटा पर मिले विज्ञापनों में एआई से निर्मित बाल शोषण सामग्री शामिल थी, जो इस विधेयक की ज़रूरत को और अधिक प्रासंगिक बनाती है।
राष्ट्र प्रेस
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