क्या सुप्रीम कोर्ट सोमवार को मेटा और व्हाट्सऐप की सीसीआई के 213 करोड़ रुपये के जुर्माने के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई करेगा?

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क्या सुप्रीम कोर्ट सोमवार को मेटा और व्हाट्सऐप की सीसीआई के 213 करोड़ रुपये के जुर्माने के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई करेगा?

सारांश

सुप्रीम कोर्ट का यह मामला मेटा और व्हाट्सऐप के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उनकी प्राइवेसी पॉलिसी के खिलाफ सीसीआई द्वारा लगाए गए जुर्माने को चुनौती दे रहा है। क्या यह सुनवाई कंपनियों के भविष्य को प्रभावित करेगी? जानें सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को इस विशेष रिपोर्ट में।

Key Takeaways

  • सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में मेटा और व्हाट्सऐप की प्राइवेसी पॉलिसी पर चर्चा होगी।
  • सीसीआई ने 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है।
  • डेटा सुरक्षा और गोपनीयता के अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया गया है।
  • नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल का निर्णय भी महत्वपूर्ण है।
  • अदालत ने इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय को मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है।

नई दिल्ली, 22 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट सोमवार को मेटा प्लेटफॉर्म और व्हाट्सऐप द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करेगा, जिनमें उन्होंने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) द्वारा उनकी प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर लगाए गए 213.14 करोड़ रुपये के जुर्माने को चुनौती दी है।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली शामिल हैं, इस मामले पर सुनवाई कर सकती है।

इससे पहले 3 फरवरी को अदालत ने दोनों कंपनियों पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि वे डेटा शेयरिंग के नाम पर नागरिकों के निजता के अधिकार से खिलवाड़ नहीं कर सकतीं। पीठ ने यह भी कहा था कि ये प्लेटफॉर्म एकाधिकार की स्थिति बना रहे हैं और उपयोगकर्ताओं की निजी जानकारी का दुरुपयोग कर रहे हैं।

व्हाट्सऐप की प्राइवेसी पॉलिसी पर चिंता जताते हुए अदालत ने “साइलेंट कस्टमर्स” का उल्लेख किया, जो असंगठित, डिजिटल रूप से निर्भर और डेटा शेयरिंग नियमों के प्रभाव से अक्सर अनजान रहते हैं। न्यायाधीशों ने स्पष्ट कहा कि नागरिकों के अधिकारों को किसी भी कीमत पर क्षति नहीं पहुंचने दी जाएगी।

यह मामला सीसीआई के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें व्हाट्सऐप की प्राइवेसी पॉलिसी से संबंधित कथित उल्लंघनों के लिए 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था।

4 नवंबर 2025 को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) ने सीसीआई के उस आदेश के एक हिस्से को रद्द कर दिया था, जिसमें व्हाट्सऐप को पांच साल तक विज्ञापन उद्देश्यों के लिए मेटा के साथ यूजर डेटा साझा करने से रोका गया था। हालांकि, ट्रिब्यूनल ने आर्थिक जुर्माने को बरकरार रखा था।

बाद में एनसीएलएटी ने स्पष्ट किया कि गोपनीयता और सहमति से जुड़े सुरक्षा प्रावधानों पर उसका निर्णय व्हाट्सऐप के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए यूजर डेटा के संग्रह और साझा करने पर भी लागू होगा, जिसमें विज्ञापन और गैर-विज्ञापन दोनों गतिविधियां शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले कहा था कि वह 9 फरवरी को अंतरिम आदेश पारित करेगा और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को दोनों कंपनियों की अपील में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया था।

अदालत सीसीआई द्वारा दायर क्रॉस-अपील पर भी सुनवाई कर रही है, जिसमें एनसीएलएटी के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसने व्हाट्सऐप और मेटा को विज्ञापन उद्देश्यों के लिए यूजर डेटा साझा करने की अनुमति दी थी।

Point of View

मैं समझता हूँ कि यह मामला न केवल मेटा और व्हाट्सऐप के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हमारे डेटा सुरक्षा और गोपनीयता के अधिकारों पर भी गहरा असर डाल सकता है। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारे नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की जाए।
NationPress
23/02/2026

Frequently Asked Questions

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई कब होगी?
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई 26 फरवरी को होगी।
क्या मेटा और व्हाट्सऐप का जुर्माना सही है?
यह जुर्माना सीसीआई द्वारा प्राइवेसी पॉलिसी के उल्लंघन के लिए लगाया गया है।
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