सुप्रीम कोर्ट में आईटी नियम-2023 पर सुनवाई, केंद्र सरकार ने उठाई चुनौती
सारांश
Key Takeaways
- सुप्रीम कोर्ट में आईटी नियम-2023 पर सुनवाई हुई।
- केंद्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी।
- सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है।
- मुख्य न्यायाधीश ने सोशल मीडिया की बढ़ती समस्याओं पर चिंता जताई।
- कानून और मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।
नई दिल्ली, 10 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आईटी नियम-2023 के रूल-3 को रद्द करने के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ केंद्र सरकार द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
दरअसल, आईटी नियम 2023 के रूल 3 के खिलाफ कुणाल कामरा, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और अन्य पक्षों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस संशोधन को असंवैधानिक मानते हुए रद्द कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि ये परिवर्तन सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के मूल सिद्धांतों के खिलाफ हैं।
केंद्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट के इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि ये संशोधन देश में सोशल मीडिया और सूचना के सही प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक हैं। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कुणाल कामरा, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्णय पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि आगे की सुनवाई तीन जजों की बेंच करेगी ताकि मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लिया जा सके।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सोशल मीडिया से जुड़ी बढ़ती समस्याओं पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आजकल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म खतरनाक हो गए हैं, और यहां तक कि सेना से संबंधित गलत जानकारी फैलाने वाले संदेश भी वायरल हो रहे हैं।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह एक बेहद महत्वपूर्ण संवैधानिक मुद्दा है। सुप्रीम कोर्ट को कानून और मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाना होगा। हालांकि, बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा उठाई गई चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।