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पेंशन विवाद खत्म करने के लिए नियमों में बड़ा बदलाव करेगी सरकार — जितेंद्र सिंह

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पेंशन विवाद खत्म करने के लिए नियमों में बड़ा बदलाव करेगी सरकार — जितेंद्र सिंह

सारांश

केंद्र सरकार पेंशन नियमों की जड़ से समीक्षा करने जा रही है — लक्ष्य है 'जीरो-लिटिगेशन' इकोसिस्टम। पिछले एक साल में मुकदमों में 20% की कमी और शिकायत निपटारे का समय 20 दिन से कम होना दर्शाता है कि बदलाव की नींव रखी जा चुकी है।

मुख्य बातें

जितेंद्र सिंह ने 20 जुलाई को पेंशन नियमों की व्यापक समीक्षा का ऐलान किया, ताकि बार-बार होने वाले मुकदमे रोके जा सकें।
सरकार का लक्ष्य नीतिगत सुधारों और बेहतर तालमेल के ज़रिए 'जीरो-लिटिगेशन' पेंशन इकोसिस्टम बनाना है।
पिछले एक वर्ष में पेंशन मुकदमों के मामलों में लगभग 20 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
CPENGRAMS पोर्टल के ज़रिए शिकायत निपटारे का औसत समय घटाकर 20 दिन से कम किया गया।
अलग रह रही बेटियों को पेंशन लाभ देने के लिए पात्रता नियम पहले ही सरल किए जा चुके हैं।
कार्यक्रम में पेंशन मुकदमों पर केस लॉ संग्रह और 'विशेष अभियान 3.0' फ्लायर लॉन्च किया गया।

कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोमवार, 20 जुलाई को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार पेंशन नियमों की व्यापक समीक्षा करेगी, ताकि वे बदलती सामाजिक वास्तविकताओं के अनुरूप बन सकें और बार-बार होने वाले मुकदमों पर लगाम लगाई जा सके। उन्होंने कहा कि पुराने नियम ही पेंशन से जुड़े अधिकांश कानूनी विवादों की जड़ हैं।

मुख्य घोषणा: 'जीरो-लिटिगेशन' पेंशन इकोसिस्टम का लक्ष्य

पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग द्वारा आयोजित पेंशन मुकदमों पर दूसरी राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य नीतिगत सुधारों, सरल नियमों, शिकायतों के बेहतर समाधान और मंत्रालयों के बीच बेहतर तालमेल के ज़रिए एक 'जीरो-लिटिगेशन' पेंशन इकोसिस्टम बनाना है। उनके अनुसार, पेंशन प्रशासन का ध्यान विवादों के अदालत तक पहुँचने के बाद सुलझाने के बजाय, समय पर नीतिगत बदलावों के ज़रिए उन्हें रोकने पर होना चाहिए।

मंत्री ने कहा, 'बार-बार होने वाले मुकदमे अक्सर यह संकेत देते हैं कि कुछ नियमों पर पुनर्विचार की आवश्यकता है।' उन्होंने यह भी कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में उठने वाली समान शिकायतों को अलग-थलग मामलों के रूप में देखने के बजाय, उनसे जुड़ी मूल नीति की समीक्षा की जानी चाहिए।

हाल के सुधार: बेटियों और परिवारों को राहत

हाल के सुधारों पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने अलग रह रही बेटियों को पेंशन लाभ देने के लिए पात्रता नियमों को सरल बनाने के सरकार के फैसले का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन उपायों से लंबी कानूनी कार्यवाही की ज़रूरत कम हुई है और पेंशन नीतियाँ अधिक मानवीय और समावेशी बनी हैं। साथ ही, पुराने प्रशासनिक ढाँचे से मिले कई पारिवारिक पेंशन प्रावधानों में संशोधन किया गया है, ताकि लाभार्थियों को बिना अदालती हस्तक्षेप के उचित लाभ मिल सके।

शोध-आधारित नीति-निर्माण पर ज़ोर

डॉ. सिंह ने विभागों से मुकदमों के रुझानों और हितधारकों की प्रतिक्रिया का विश्लेषण करने का आह्वान किया, ताकि मौजूदा नियमों में कमियों की पहचान की जा सके। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि शिकायत निवारण का उपयोग केवल शिकायतों के निपटारे के बजाय नीतियों में सुधार के एक साधन के रूप में किया जाना चाहिए। मंत्री ने कहा कि पेंशनभोगियों की चिंताओं को बेहतर ढंग से समझने के लिए तकनीक के साथ-साथ उनसे व्यक्तिगत बातचीत भी ज़रूरी है।

मुकदमों में 20% की कमी, शिकायत निपटारा 20 दिन से कम

कार्यक्रम के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने पेंशन मुकदमों पर केस लॉ का एक संग्रह और 'विशेष अभियान 3.0' पर एक फ्लायर लॉन्च किया, जिसका उद्देश्य मुकदमों के प्रबंधन को मज़बूत करना और नागरिक-केंद्रित पेंशन सेवाओं में सुधार करना है। पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग के अनुसार, पिछले एक वर्ष में विभाग के 'लिटिगेशन इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम' पर दर्ज पेंशन मुकदमों के मामलों में लगभग 20 प्रतिशत की कमी आई है।

इसके अलावा, केंद्रीकृत पेंशन शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (CPENGRAMS) पोर्टल के ज़रिए पेंशन से जुड़ी शिकायतों के निपटारे का औसत समय घटाकर 20 दिन से कम कर दिया गया है। यह आँकड़ा सरकार के डिजिटल शासन सुधारों की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम माना जा रहा है।

गौरतलब है कि यह कार्यशाला ऐसे समय में आयोजित हुई है जब केंद्र सरकार पर पेंशन नीतियों को और अधिक पारदर्शी और विवाद-मुक्त बनाने का दबाव बढ़ रहा है। आने वाले महीनों में नीतिगत बदलावों की रूपरेखा स्पष्ट होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि नियमों की 'व्यापक समीक्षा' की समयसीमा और जवाबदेही तंत्र क्या होगा। पुराने पेंशन प्रावधानों को बदलने की बात पहले भी होती रही है, पर अदालतों में मामले लगातार बढ़ते रहे। 'जीरो-लिटिगेशन' एक आकर्षक नारा है, लेकिन जब तक विभागीय स्तर पर निर्णय लेने की स्वायत्तता और जवाबदेही एक साथ नहीं बढ़ती, तब तक शिकायतें पोर्टल पर निपटती रहेंगी और अदालतों में भी जाती रहेंगी। CPENGRAMS की सफलता को टिकाऊ बनाने के लिए नीतिगत बदलावों को विधायी समर्थन की भी ज़रूरत पड़ सकती है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सरकार पेंशन नियमों में बदलाव क्यों कर रही है?
पुराने पेंशन नियम बार-बार होने वाले मुकदमों का मुख्य कारण बने हुए हैं। डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार, बदलती सामाजिक वास्तविकताओं के अनुरूप नियमों को अद्यतन करने से विवाद अदालत तक पहुँचने से पहले ही सुलझाए जा सकेंगे।
'जीरो-लिटिगेशन' पेंशन इकोसिस्टम क्या है?
यह एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें नीतिगत सुधारों, सरल नियमों, बेहतर शिकायत निवारण और मंत्रालयों के बीच समन्वय के ज़रिए पेंशन विवादों को अदालत तक पहुँचने से पहले ही सुलझाया जाए। सरकार इसे अपना दीर्घकालिक लक्ष्य बता रही है।
पेंशन मुकदमों में कितनी कमी आई है?
पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग के अनुसार, पिछले एक वर्ष में 'लिटिगेशन इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम' पर दर्ज मामलों में लगभग 20 प्रतिशत की कमी आई है। साथ ही, CPENGRAMS पोर्टल के ज़रिए शिकायत निपटारे का औसत समय 20 दिन से कम हो गया है।
अलग रह रही बेटियों के लिए पेंशन नियमों में क्या बदलाव हुआ?
सरकार ने अलग रह रही बेटियों को पेंशन लाभ देने के लिए पात्रता नियमों को सरल बनाया है। इससे उन्हें लंबी कानूनी कार्यवाही के बिना पेंशन लाभ मिल सकता है और पेंशन नीतियाँ अधिक समावेशी बनी हैं।
'विशेष अभियान 3.0' क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
यह पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग की एक पहल है, जिसका उद्देश्य पेंशन मुकदमों के प्रबंधन को मज़बूत करना और नागरिक-केंद्रित पेंशन सेवाओं में सुधार करना है। इसे 20 जुलाई की राष्ट्रीय कार्यशाला में आधिकारिक रूप से लॉन्च किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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