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जम्मू-कश्मीर में केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद पेंशन सुधारों का व्यापक लाभ: डॉ. जितेंद्र सिंह

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जम्मू-कश्मीर में केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद पेंशन सुधारों का व्यापक लाभ: डॉ. जितेंद्र सिंह

सारांश

जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद पेंशन सुधारों की पहुँच व्यापक हुई है। नवंबर 2025 के डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट अभियान में 1.91 करोड़ से अधिक प्रमाण पत्र जारी हुए। 'भविष्य' प्लेटफॉर्म और जम्मू-कश्मीर बैंक की नई साझेदारी से सेवाएँ और सुलभ होंगी।

मुख्य बातें

जितेंद्र सिंह ने 16 जून 2026 को कहा कि जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद पेंशन सुधारों का लाभ अधिक कर्मचारियों तक पहुँचा है।
पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग और जम्मू-कश्मीर बैंक ने पेंशन सेवाओं के विस्तार के लिए संयुक्त पहल शुरू की।
नवंबर 2025 के डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट अभियान में देशभर में 1.91 करोड़ से अधिक डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र बनाए गए।
इनमें से 1.16 करोड़ से अधिक प्रमाण पत्र फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक के माध्यम से जारी किए गए।
'भविष्य' प्लेटफॉर्म के ज़रिये PPO अब डिजिलॉकर से जुड़े हैं; सीपीईएनजीआरएएमएस और राष्ट्रीय पेंशन अदालतों से शिकायत निवारण में तेज़ी आई है।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मंगलवार, 16 जून 2026 को नई दिल्ली में कहा कि जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य से केंद्र शासित प्रदेश में रूपांतरण के बाद बीते वर्षों में सुशासन और पेंशन सुधारों का लाभ कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के एक व्यापक वर्ग तक पहुँचा है। उन्होंने यह बात एक कार्यक्रम में कही, जिसमें पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग और जम्मू-कश्मीर बैंक ने मिलकर एक नई पहल का शुभारंभ किया।

पुनर्गठन के बाद की चुनौतियाँ और समाधान

डॉ. सिंह ने एक आधिकारिक बयान में स्वीकार किया कि जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद क्षेत्र में केंद्र सरकार के कर्मचारियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, जिसके कारण प्रारंभिक चरण में कार्यभार और सेवा वितरण से जुड़ी कुछ चुनौतियाँ उभरीं। उन्होंने कहा कि सरकार और संबंधित संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से इन चुनौतियों का क्रमिक रूप से समाधान किया गया है।

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने पर विशेष बल दे रही है। गौरतलब है कि 2019 में राज्य के पुनर्गठन के बाद से केंद्रीय सेवाओं का विस्तार इस क्षेत्र में लगातार जारी है।

पेंशन एवं जम्मू-कश्मीर बैंक की संयुक्त पहल

पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग और जम्मू-कश्मीर बैंक के बीच शुरू की गई इस नई साझेदारी का उद्देश्य केंद्र शासित प्रदेश के पेंशनभोगियों के लिए सेवाओं की पहुँच और सुगमता को और बेहतर बनाना है। डॉ. सिंह के अनुसार, यह साझेदारी सेवा वितरण व्यवस्था को सुदृढ़ करेगी और अधिक पेंशनभोगियों को चल रहे सुधारों का लाभ सहजता से मिल सकेगा।

'भविष्य' प्लेटफॉर्म और डिजिटल क्रांति

मंत्री ने 'भविष्य' प्लेटफॉर्म को पेंशन प्रशासन में एक निर्णायक सुधार बताया, जिसने पेंशन प्रक्रिया के संपूर्ण डिजिटलीकरण को संभव बनाया है। अब पेंशन भुगतान आदेश (PPO) डिजिलॉकर से जुड़े हुए हैं, जिससे सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन दस्तावेजों तक बिना कागज के, पारदर्शी और सुलभ पहुँच मिल रही है।

फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक के माध्यम से डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट की सुविधा शुरू होने के बाद पेंशनभोगी अपने मोबाइल फोन से घर बैठे जीवन प्रमाण पत्र जमा कर सकते हैं — जो बुज़ुर्ग और दूरदराज़ के पेंशनभोगियों के लिए विशेष रूप से राहतदायक है।

डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट अभियान: रिकॉर्ड भागीदारी

डॉ. सिंह ने बताया कि नवंबर 2025 में चलाए गए देशव्यापी डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट अभियान में रिकॉर्ड भागीदारी दर्ज की गई। पूरे देश में 1.91 करोड़ से अधिक डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र बनाए गए, जिनमें से 1.16 करोड़ से अधिक प्रमाण पत्र अकेले फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक के ज़रिये जारी किए गए। यह आँकड़ा डिजिटल पेंशन सेवाओं की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है।

शिकायत निवारण और सामाजिक सुरक्षा में सुधार

सरकार ने शिकायत निवारण व्यवस्था को भी मज़बूत किया है। इसके लिए सीपीईएनजीआरएएमएस, विषय-आधारित समीक्षा तंत्र और राष्ट्रीय पेंशन अदालतों जैसी व्यवस्थाएँ लागू की गई हैं, जिससे पेंशन संबंधी शिकायतों का त्वरित समाधान संभव हुआ है।

डॉ. सिंह ने यह भी बताया कि पारिवारिक पेंशन, अतिरिक्त पेंशन, सेवानिवृत्ति लाभ और लापता कर्मचारियों से जुड़े मामलों में किए गए सुधारों ने पेंशनभोगियों और उनके परिवारों के लिए सामाजिक सुरक्षा जाल को और अधिक सुदृढ़ बनाया है। आगे चलकर इन सुधारों के जम्मू-कश्मीर के पेंशनभोगियों तक और व्यापक पहुँच बनाने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि जम्मू-कश्मीर के दूरदराज़ और ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की सीमाओं के बीच फेस ऑथेंटिकेशन जैसी तकनीकें वास्तव में कितने पेंशनभोगियों तक पहुँच पा रही हैं। जम्मू-कश्मीर बैंक साझेदारी एक सकारात्मक कदम है, परंतु सेवा वितरण की गुणवत्ता और शिकायत निवारण की वास्तविक गति पर स्वतंत्र आकलन अभी भी अनुपलब्ध है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जम्मू-कश्मीर में केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद पेंशन सुधारों में क्या बदला?
जम्मू-कश्मीर के 2019 में पुनर्गठन के बाद केंद्र सरकार के कर्मचारियों की संख्या बढ़ी और केंद्रीय पेंशन नियम लागू हुए, जिससे अधिक कर्मचारी और पेंशनभोगी सुधारों के दायरे में आए। डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार, समन्वित प्रयासों से प्रारंभिक चुनौतियों का समाधान किया गया है।
पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग और जम्मू-कश्मीर बैंक की संयुक्त पहल क्या है?
इस पहल का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर के पेंशनभोगियों के लिए पेंशन सेवाओं का विस्तार करना और उन्हें अधिक सुलभ बनाना है। यह साझेदारी सेवा वितरण व्यवस्था को सुदृढ़ करेगी ताकि अधिक पेंशनभोगी चल रहे सुधारों का लाभ आसानी से उठा सकें।
'भविष्य' प्लेटफॉर्म पेंशनभोगियों की कैसे मदद करता है?
'भविष्य' प्लेटफॉर्म ने पेंशन प्रक्रिया का संपूर्ण डिजिटलीकरण संभव बनाया है। पेंशन भुगतान आदेश (PPO) अब डिजिलॉकर से जुड़े हैं, जिससे सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बिना कागज के, पारदर्शी तरीके से दस्तावेज़ों तक पहुँच मिलती है।
नवंबर 2025 के डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट अभियान में कितने प्रमाण पत्र जारी हुए?
नवंबर 2025 के देशव्यापी अभियान में पूरे देश में 1.91 करोड़ से अधिक डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र बनाए गए। इनमें से 1.16 करोड़ से अधिक प्रमाण पत्र फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक के माध्यम से जारी किए गए।
पेंशन शिकायतों के समाधान के लिए सरकार ने क्या व्यवस्थाएँ की हैं?
सरकार ने सीपीईएनजीआरएएमएस, विषय-आधारित समीक्षा तंत्र और राष्ट्रीय पेंशन अदालतों जैसी व्यवस्थाएँ लागू की हैं। इनसे पेंशन संबंधी शिकायतों का त्वरित और प्रभावी समाधान संभव हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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