सुशासन से होगा भारत का विकास: राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने ICSI प्रतिनिधिमंडल से की अहम बैठक
सारांश
मुख्य बातें
कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 28 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि भारत की विकास यात्रा में सुशासन की भूमिका अपरिहार्य है। इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया (ICSI) के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक में उन्होंने कहा कि कंपनी सचिवों की पेशेवर दक्षता कॉर्पोरेट और आर्थिक इकोसिस्टम में शासन के मानकों को सुदृढ़ करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
मुख्य घटनाक्रम
मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, डॉ. सिंह ने इस संवाद में नैतिक उद्यमिता और सुशासन की सशक्त संस्कृति विकसित करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि ICSI जैसे पेशेवर संस्थान गवर्नेंस मानकों को प्रोत्साहित करने और संस्थागत उत्कृष्टता को बढ़ावा देने में अहम माध्यम हैं।
बैठक में ICSI की पेशेवर मानकों, सेक्रेटेरियल मानकों, कॉर्पोरेट गवर्नेंस और 'कॉर्पोरेट गवर्नेंस में उत्कृष्टता को साकार करने के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड' से जुड़ी पहलों पर विस्तृत चर्चा हुई।
पंचायत गवर्नेंस और डिजिटलाइजेशन पर जोर
डॉ. जितेंद्र सिंह ने पंचायत गवर्नेंस और स्थानीय निकाय प्रशासन से जुड़ी ICSI की पहलों की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से संस्थान द्वारा कई भाषाओं में मैनुअल और प्रशिक्षण सामग्री तैयार करने के प्रयासों को रेखांकित किया, जो शासन को जमीनी स्तर तक पहुँचाने में सहायक हैं।
मंत्री ने ICSI के डिजिटलाइजेशन प्रयासों की भी प्रशंसा की, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग और संस्थागत चुनावों के लिए वरीयता-आधारित वोटिंग प्रणाली को अपनाना शामिल है। उन्होंने इसे संस्थागत प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और दक्षता की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया।
कॉर्पोरेट पेशेवरों की जवाबदेही पर बल
डॉ. सिंह ने कहा कि जिम्मेदार शासन, नैतिक आचरण और संस्थागत जवाबदेही को बढ़ावा देने में कॉर्पोरेट क्षेत्र के पेशेवरों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने पेशेवर निकायों से अपेक्षा जताई कि वे बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप अपने मानकों और कार्यप्रणाली को निरंतर परिष्कृत करते रहें।
मंत्री ने कॉर्पोरेट गवर्नेंस में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले संगठनों और व्यक्तियों को पहचानने और प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हुई जब भारत में कॉर्पोरेट जवाबदेही और संस्थागत शासन को लेकर नीतिगत विमर्श तेज हो रहा है।
आगे की राह
इस संवाद के बाद ICSI से अपेक्षा की जा रही है कि वह सरकार के साथ समन्वय में गवर्नेंस मानकों को और व्यापक बनाने की दिशा में ठोस प्रस्ताव प्रस्तुत करे। भारत के गवर्नेंस इकोसिस्टम में कंपनी सचिवों की बढ़ती भूमिका आने वाले वर्षों में कॉर्पोरेट अनुपालन और संस्थागत पारदर्शिता के नए मानक स्थापित कर सकती है।