योगी सरकार का गन्ना अनुसंधान में बड़ा कदम: टिशू कल्चर तकनीक से उच्च गुणवत्ता वाले बीज उत्पादन पर जोर
सारांश
Key Takeaways
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर यूपीसीएसआर (शाहजहाँपुर) और बीसीएमएल (हैदरगढ़, बाराबंकी) के बीच 28 अप्रैल 2026 को एमओयू हस्ताक्षरित।
- एमओयू का लक्ष्य टिशू कल्चर तकनीक से उच्च गुणवत्ता वाले गन्ना बीज का उत्पादन बढ़ाना और किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना।
- पारंपरिक विधि की तुलना में टिशू कल्चर से कम समय में बड़ी मात्रा में शुद्ध बीज तैयार किए जा सकते हैं।
- किसानों, मिल कर्मियों और तकनीकी कर्मचारियों को टिशू कल्चर लैब, ग्रीन हाउस संचालन और फील्ड ट्रांसफर का व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा।
- दोनों संस्थाएँ मिलकर गन्ने की उन्नत किस्मों के विकास और विस्तार पर संयुक्त कार्य करेंगी।
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने गन्ना किसानों की आय बढ़ाने और प्रदेश में गन्ना उत्पादन को नई ऊँचाई देने के लिए टिशू कल्चर तकनीक के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाले बीज उत्पादन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। 28 अप्रैल 2026 को उत्तर प्रदेश काउंसिल ऑफ शुगरकेन रिसर्च (यूपीसीएसआर), शाहजहाँपुर और बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड (बीसीएमएल), हैदरगढ़, बाराबंकी के बीच एक एमओयू (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते से न केवल गन्ना किसानों की आय में वृद्धि की उम्मीद है, बल्कि प्रदेश में चीनी उत्पादन और उत्पादकता को भी मज़बूती मिलेगी।
एमओयू का उद्देश्य और मुख्य प्रावधान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर हस्ताक्षरित इस एमओयू का मुख्य उद्देश्य टिशू कल्चर तकनीक के ज़रिए गुणवत्तापूर्ण गन्ना बीज का उत्पादन बढ़ाना, किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना और गन्ना उत्पादन प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना है। यूपीसीएसआर और बीसीएमएल मिलकर गन्ने की उन्नत किस्मों के विकास और उनके विस्तार पर संयुक्त रूप से काम करेंगे। गौरतलब है कि यह पहल प्रदेश की गन्ना अनुसंधान नीति में एक संरचनात्मक बदलाव का संकेत देती है।
टिशू कल्चर तकनीक क्यों है खास
गन्ना आयुक्त मिनिस्थी एस ने बताया कि पारंपरिक विधियों की तुलना में टिशू कल्चर तकनीक से बीज उत्पादन अधिक तेज़, शुद्ध और प्रभावी होता है। जहाँ पारंपरिक तरीके से एक एकड़ में सीमित मात्रा में बीज तैयार हो पाता है, वहीं टिशू कल्चर तकनीक के माध्यम से कम समय में बड़ी मात्रा में उच्च गुणवत्ता वाले बीज तैयार किए जा सकते हैं। इससे नई उन्नत किस्मों का तेज़ी से विस्तार संभव होगा और किसानों को बेहतर उत्पादन के अवसर मिलेंगे।
किसानों को मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण
एमओयू के तहत प्रदेश में टिशू कल्चर आधारित बीज उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इसमें किसानों, मिल कर्मियों और तकनीकी कर्मचारियों को टिशू कल्चर लैब और ग्रीन हाउस संचालन, प्लांटलेट तैयार करने, हार्डनिंग और खेत में रोपाई जैसी प्रक्रियाओं की व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण के दौरान टिशू कल्चर से जुड़े रसायनों, उपकरणों और विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर भी विशेष ज़ोर रहेगा।
आम जनता और किसानों पर असर
दोनों संस्थाएँ मिलकर किसानों को 'हैंड्स-ऑन' प्रशिक्षण देंगी, जिससे वे इस तकनीक को आसानी से समझ सकें और अपने खेतों में लागू कर सकें। प्रशिक्षण के लिए विशेष मॉड्यूल तैयार किए गए हैं, जिनमें टिशू कल्चर की मूलभूत जानकारी से लेकर फील्ड ट्रांसफर तक की पूरी प्रक्रिया शामिल है। किसानों को भूमि तैयारी, सिंचाई, उर्वरक प्रबंधन और पौध संरक्षण से संबंधित आधुनिक तरीकों की जानकारी भी दी जाएगी, ताकि फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार हो सके।
क्या होगा आगे
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है और सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य की ओर काम कर रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि टिशू कल्चर आधारित बीज व्यापक पैमाने पर उपलब्ध कराए जाएँ, तो प्रति एकड़ उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। इस पहल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रशिक्षण कार्यक्रम कितनी तेज़ी से ज़मीनी स्तर पर पहुँचते हैं।