यूपी के 11 जिलों में 14 वृहद गोसंरक्षण केंद्रों का लोकार्पण, प्रत्येक में 400 गोवंश की क्षमता
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार ने 27 जुलाई 2026 को 11 जिलों में नवनिर्मित 14 वृहद गोसंरक्षण केंद्रों का वर्चुअल लोकार्पण किया, जो निराश्रित गोवंशों को सुरक्षित आश्रय देने की दिशा में राज्य सरकार का ताज़ा कदम है। पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने इस अवसर पर स्पष्ट किया कि प्रत्येक केंद्र में 400 गोवंश रखने की क्षमता है और निर्माण गुणवत्ता में किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।
किन जिलों में बने हैं नए केंद्र
पशुपालन निदेशालय में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया कि अमेठी में चार तथा चंदौली, गाजीपुर, कन्नौज, कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, प्रयागराज, अलीगढ़, प्रतापगढ़, बाराबंकी और शाहजहांपुर में एक-एक वृहद गोसंरक्षण केंद्र का निर्माण पूर्ण हो चुका है। प्रत्येक केंद्र की निर्माण लागत ₹160.12 लाख निर्धारित है।
प्रदेश में गोसंरक्षण की मौजूदा स्थिति
मंत्री के अनुसार, उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 6,510 गोआश्रय स्थलों में करीब 11.75 लाख निराश्रित गोवंश संरक्षित हैं। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों के 5,517 अस्थायी गोआश्रय स्थल, 507 वृहद गोसंरक्षण केंद्र, 213 कांजी हाउस और शहरी क्षेत्रों के 273 कान्हा गोआश्रय स्थल शामिल हैं। राज्य सरकार इन स्थलों तथा सहभागिता योजना के तहत सुपुर्द गोवंशों के भरण-पोषण पर प्रतिदिन लगभग ₹6.5 करोड़ व्यय कर रही है।
सहभागिता योजना और वित्तीय प्रावधान
मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के अंतर्गत अब तक 1.11 लाख से अधिक लाभार्थियों को 1.79 लाख निराश्रित गोवंश सुपुर्द किए जा चुके हैं। प्रदेश में कुल 632 वृहद गोसंरक्षण केंद्रों के निर्माण को स्वीकृति दी गई है, जिनमें से 507 का निर्माण पूरा हो चुका है और 480 केंद्र संचालित हो रहे हैं। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस मद में ₹100 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिसके सापेक्ष अब तक ₹53.78 करोड़ जारी किए जा चुके हैं।
आत्मनिर्भरता और सामुदायिक भागीदारी
पशुधन एवं दुग्ध विकास राज्य मंत्री कृष्णा पासवान ने बताया कि राज्य सरकार गोआश्रय स्थलों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गोबर आधारित उत्पादों और सीबीजी (Compressed Biogas) उत्पादन जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित कर रही है, जिनमें महिला स्वयं सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। अपर मुख्य सचिव (पशुधन) मुकेश कुमार मेश्राम ने कहा कि नए केंद्रों को भूसा भंडारण, हरा चारा उत्पादन, स्वच्छ पेयजल और पशु चिकित्सा सेवाओं जैसी आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है तथा इनके संचालन में स्वयं सहायता समूहों, एफपीओ, गैर-सरकारी संगठनों और कॉरपोरेट संस्थाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित की जा रही है। इस कार्यक्रम में पशुपालन विभाग के सोशल मीडिया सेल का भी उद्घाटन किया गया। आने वाले समय में शेष स्वीकृत केंद्रों के निर्माण और संचालन की गति पर सरकार की साख टिकी होगी।