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यूपी के 11 जिलों में 14 वृहद गोसंरक्षण केंद्रों का लोकार्पण, प्रत्येक में 400 गोवंश की क्षमता

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यूपी के 11 जिलों में 14 वृहद गोसंरक्षण केंद्रों का लोकार्पण, प्रत्येक में 400 गोवंश की क्षमता

सारांश

उत्तर प्रदेश सरकार ने 11 जिलों में 14 नए वृहद गोसंरक्षण केंद्रों का लोकार्पण किया — हर केंद्र में 400 गोवंश की क्षमता और ₹160.12 लाख की निर्माण लागत। प्रदेश में अब 6,510 गोआश्रय स्थलों में 11.75 लाख गोवंश संरक्षित हैं और सरकार प्रतिदिन ₹6.5 करोड़ खर्च कर रही है।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश के 11 जिलों में 14 वृहद गोसंरक्षण केंद्रों का 27 जुलाई 2026 को वर्चुअल लोकार्पण हुआ।
प्रत्येक केंद्र में 400 गोवंश रखने की क्षमता; निर्माण लागत ₹160.12 लाख प्रति केंद्र।
प्रदेश में 6,510 गोआश्रय स्थलों में करीब 11.75 लाख निराश्रित गोवंश संरक्षित हैं।
सरकार गोआश्रय स्थलों पर प्रतिदिन लगभग ₹6.5 करोड़ खर्च कर रही है।
मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत 1.11 लाख से अधिक लाभार्थियों को 1.79 लाख गोवंश सुपुर्द।
वित्त वर्ष 2026-27 में ₹100 करोड़ का प्रावधान; अब तक ₹53.78 करोड़ जारी।

उत्तर प्रदेश सरकार ने 27 जुलाई 2026 को 11 जिलों में नवनिर्मित 14 वृहद गोसंरक्षण केंद्रों का वर्चुअल लोकार्पण किया, जो निराश्रित गोवंशों को सुरक्षित आश्रय देने की दिशा में राज्य सरकार का ताज़ा कदम है। पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने इस अवसर पर स्पष्ट किया कि प्रत्येक केंद्र में 400 गोवंश रखने की क्षमता है और निर्माण गुणवत्ता में किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।

किन जिलों में बने हैं नए केंद्र

पशुपालन निदेशालय में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया कि अमेठी में चार तथा चंदौली, गाजीपुर, कन्नौज, कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, प्रयागराज, अलीगढ़, प्रतापगढ़, बाराबंकी और शाहजहांपुर में एक-एक वृहद गोसंरक्षण केंद्र का निर्माण पूर्ण हो चुका है। प्रत्येक केंद्र की निर्माण लागत ₹160.12 लाख निर्धारित है।

प्रदेश में गोसंरक्षण की मौजूदा स्थिति

मंत्री के अनुसार, उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 6,510 गोआश्रय स्थलों में करीब 11.75 लाख निराश्रित गोवंश संरक्षित हैं। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों के 5,517 अस्थायी गोआश्रय स्थल, 507 वृहद गोसंरक्षण केंद्र, 213 कांजी हाउस और शहरी क्षेत्रों के 273 कान्हा गोआश्रय स्थल शामिल हैं। राज्य सरकार इन स्थलों तथा सहभागिता योजना के तहत सुपुर्द गोवंशों के भरण-पोषण पर प्रतिदिन लगभग ₹6.5 करोड़ व्यय कर रही है।

सहभागिता योजना और वित्तीय प्रावधान

मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के अंतर्गत अब तक 1.11 लाख से अधिक लाभार्थियों को 1.79 लाख निराश्रित गोवंश सुपुर्द किए जा चुके हैं। प्रदेश में कुल 632 वृहद गोसंरक्षण केंद्रों के निर्माण को स्वीकृति दी गई है, जिनमें से 507 का निर्माण पूरा हो चुका है और 480 केंद्र संचालित हो रहे हैं। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस मद में ₹100 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिसके सापेक्ष अब तक ₹53.78 करोड़ जारी किए जा चुके हैं।

आत्मनिर्भरता और सामुदायिक भागीदारी

पशुधन एवं दुग्ध विकास राज्य मंत्री कृष्णा पासवान ने बताया कि राज्य सरकार गोआश्रय स्थलों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गोबर आधारित उत्पादों और सीबीजी (Compressed Biogas) उत्पादन जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित कर रही है, जिनमें महिला स्वयं सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। अपर मुख्य सचिव (पशुधन) मुकेश कुमार मेश्राम ने कहा कि नए केंद्रों को भूसा भंडारण, हरा चारा उत्पादन, स्वच्छ पेयजल और पशु चिकित्सा सेवाओं जैसी आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है तथा इनके संचालन में स्वयं सहायता समूहों, एफपीओ, गैर-सरकारी संगठनों और कॉरपोरेट संस्थाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित की जा रही है। इस कार्यक्रम में पशुपालन विभाग के सोशल मीडिया सेल का भी उद्घाटन किया गया। आने वाले समय में शेष स्वीकृत केंद्रों के निर्माण और संचालन की गति पर सरकार की साख टिकी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये केंद्र दीर्घकालिक रूप से आत्मनिर्भर बन पाएंगे। गोबर-आधारित उत्पाद और सीबीजी उत्पादन की बात तो हो रही है, पर अब तक ऐसे मॉडलों का राजस्व प्रदर्शन सीमित रहा है। 480 संचालित केंद्रों में पशु स्वास्थ्य, मृत्यु दर और चारे की उपलब्धता के स्वतंत्र आँकड़े सार्वजनिक नहीं हैं — जब तक ये पारदर्शी नहीं होते, योजना की सफलता का दावा अधूरा रहेगा।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी के नए वृहद गोसंरक्षण केंद्र किन जिलों में बने हैं?
अमेठी में चार तथा चंदौली, गाजीपुर, कन्नौज, कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, प्रयागराज, अलीगढ़, प्रतापगढ़, बाराबंकी और शाहजहांपुर में एक-एक वृहद गोसंरक्षण केंद्र का निर्माण पूरा हुआ है — कुल 11 जिलों में 14 केंद्र।
प्रत्येक गोसंरक्षण केंद्र की क्षमता और लागत क्या है?
प्रत्येक वृहद गोसंरक्षण केंद्र में 400 गोवंश रखने की क्षमता है और इसकी निर्माण लागत ₹160.12 लाख निर्धारित है। इन केंद्रों में भूसा भंडारण, हरा चारा उत्पादन, स्वच्छ पेयजल और पशु चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।
उत्तर प्रदेश में अभी कुल कितने गोआश्रय स्थल हैं?
प्रदेश में वर्तमान में 6,510 गोआश्रय स्थल हैं जिनमें करीब 11.75 लाख निराश्रित गोवंश संरक्षित हैं। इनमें 5,517 अस्थायी ग्रामीण गोआश्रय, 507 वृहद गोसंरक्षण केंद्र, 213 कांजी हाउस और 273 कान्हा गोआश्रय स्थल शामिल हैं।
मुख्यमंत्री सहभागिता योजना क्या है और इससे कितने लोगों को फायदा मिला?
मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत निराश्रित गोवंश लाभार्थियों को सुपुर्द किए जाते हैं। अब तक 1.11 लाख से अधिक लाभार्थियों को 1.79 लाख निराश्रित गोवंश दिए जा चुके हैं।
गोसंरक्षण केंद्रों को आत्मनिर्भर बनाने की क्या योजना है?
राज्य सरकार गोबर आधारित उत्पादों और सीबीजी (Compressed Biogas) उत्पादन को बढ़ावा देकर गोआश्रय स्थलों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है। इन गतिविधियों में महिला स्वयं सहायता समूहों, एफपीओ, गैर-सरकारी संगठनों और कॉरपोरेट संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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