29 अक्टूबर 2026
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खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को मंजूरी: लुधियाना के कारोबारियों ने किया स्वागत, ₹1,856 करोड़ की योजना से खेल उद्योग को उम्मीद

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खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को मंजूरी: लुधियाना के कारोबारियों ने किया स्वागत, ₹1,856 करोड़ की योजना से खेल उद्योग को उम्मीद

सारांश

केंद्र सरकार ने ₹1,856.67 करोड़ की खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को मंजूरी दी है। लुधियाना के कारोबारियों ने इसका स्वागत किया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि योजना का असली फायदा तभी मिलेगा जब छोटे व्यापारियों तक इसकी पहुँच सुनिश्चित हो।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 28 अक्टूबर 2026 को ₹1,856.67 करोड़ के परिव्यय से खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को मंजूरी दी।
योजना 2026 से 2033-34 तक लागू रहेगी और खेल उपकरण विनिर्माण, निर्यात व नवाचार को बढ़ावा देगी।
यूनाइटेड साइकिल पार्ट्स एंड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डीएस चावला ने योजना को 'बेहद सकारात्मक' बताया।
कारोबारी हरविंदर सिंह ने चेतावनी दी कि छोटे व्यापारियों तक लाभ न पहुँचने पर योजना का असर सीमित रहेगा।
यह योजना खेलो भारत नीति 2025 , मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

केंद्र सरकार द्वारा खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को मंजूरी मिलने पर लुधियाना के खेल उपकरण और साइकिल उद्योग से जुड़े कारोबारियों ने 29 अक्टूबर 2026 को खुशी जताई और कहा कि इस फैसले से देश में खेलों को नई ऊर्जा मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार, 28 अक्टूबर को ₹1,856.67 करोड़ के कुल परिव्यय के साथ इस योजना को हरी झंडी दी, जो 2026 से 2033-34 तक लागू रहेगी।

कारोबारियों ने किया स्वागत

यूनाइटेड साइकिल पार्ट्स एंड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डीएस चावला ने इस निर्णय के लिए सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह योजना बेहद सकारात्मक कदम है। उन्होंने कहा, 'खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को मंजूरी मिलना बहुत ही सकारात्मक है — इससे देश में खेलों को बढ़ावा मिलेगा और युवा सेहतमंद होंगे।'

चावला ने यह भी कहा कि इस क्षेत्र को काफी समय से लगातार नजरअंदाज किया जाता रहा है, लेकिन मोबाइल-केंद्रित जीवनशैली के इस दौर में खेल उद्योग को सपोर्ट करने से युवाओं की सेहत में सकारात्मक बदलाव आएगा। साइकिल उद्योग से जुड़े होने का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि साइकिलिंग स्वयं में एक सर्वोत्तम व्यायाम है, जो पूरे शरीर को सक्रिय रखती है।

छोटे व्यापारियों की चिंता भी सामने आई

साइकिल उद्योग से जुड़े कारोबारी हरविंदर सिंह ने योजना की सराहना करते हुए एक महत्वपूर्ण चिंता भी रखी। उन्होंने कहा कि विनिर्माण इकाइयों को प्रोत्साहन देने की यह पहल एक अच्छा विचार है, लेकिन इसका लाभ जमीनी स्तर तक पहुँचना जरूरी है। उनके अनुसार, फिलहाल ऐसी योजनाओं का लाभ बड़े कारोबारी ही उठा पाते हैं, जबकि छोटे व्यापारी वंचित रह जाते हैं। उन्होंने माँग की कि योजना का क्रियान्वयन इस प्रकार हो कि सूक्ष्म और लघु उद्यमों को भी समान अवसर मिले।

योजना का उद्देश्य और दायरा

केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित यह योजना मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप तैयार की गई है। योजना का लक्ष्य निवेश, प्रौद्योगिकी अंगीकार, अनुसंधान एवं नवाचार, कौशल विकास, गुणवत्ता प्रमाणन और बाजार विकास के लिए लक्षित सहायता के माध्यम से भारत के खेल उपकरण विनिर्माण आधार को सुदृढ़ करना है।

गौरतलब है कि यह योजना खेलो भारत नीति 2025 के साथ संरेखित है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति मजबूत करने पर केंद्रित है। आँकड़ों के अनुसार, इस पहल से निवेश आकर्षित होने, रोजगार के अवसर बढ़ने और घरेलू विनिर्माण क्षमता मजबूत होने की उम्मीद है।

लुधियाना की भूमिका अहम

लुधियाना भारत का प्रमुख साइकिल और खेल उपकरण विनिर्माण केंद्र है। यहाँ से देश के साथ-साथ बड़े पैमाने पर निर्यात भी होता है। ऐसे में यह योजना इस औद्योगिक नगर के उद्यमियों के लिए विशेष महत्व रखती है। कारोबारियों का मानना है कि यदि योजना का क्रियान्वयन सही दिशा में हुआ, तो लुधियाना का खेल उपकरण उद्योग वैश्विक बाजार में और मजबूत पकड़ बना सकता है।

आगे क्या होगा

योजना के तहत विस्तृत क्रियान्वयन दिशानिर्देश और लाभार्थी चयन प्रक्रिया अभी स्पष्ट की जानी है। उद्योग जगत की नजर इस बात पर रहेगी कि छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए विशेष प्रावधान किए जाते हैं या नहीं। 2033-34 तक चलने वाली इस दीर्घकालिक योजना की सफलता काफी हद तक इसके जमीनी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

856.67 करोड़ की यह योजना कागज पर महत्वाकांक्षी है, लेकिन लुधियाना के कारोबारी हरविंदर सिंह की चेतावनी असली सवाल उठाती है — क्या यह लाभ सच में छोटे विनिर्माताओं तक पहुँचेगा या बड़े खिलाड़ी ही इसका फल उठाएंगे? भारत में अनेक केंद्रीय योजनाओं का इतिहास बताता है कि क्रियान्वयन की खाई अक्सर घोषणा और जमीनी असर के बीच चौड़ी रहती है। लुधियाना, जो देश की साइकिल और खेल उपकरण राजधानी है, इस योजना की असली परीक्षास्थली बनेगी — और वहाँ के सूक्ष्म उद्यमों की भागीदारी ही तय करेगी कि यह योजना महज एक बजटीय आँकड़ा रहती है या वास्तविक औद्योगिक बदलाव लाती है।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम क्या है?
यह केंद्र सरकार की एक दीर्घकालिक योजना है, जिसे 28 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹1,856.67 करोड़ के परिव्यय के साथ मंजूरी दी। यह योजना 2026 से 2033-34 तक लागू रहेगी और खेल उपकरण क्षेत्र में निवेश, विनिर्माण, नवाचार और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है।
इस योजना की घोषणा कब की गई थी?
इस योजना की घोषणा केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई थी। इसके बाद 28 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे औपचारिक मंजूरी दी।
इस योजना से लुधियाना के उद्योग को क्या फायदा होगा?
लुधियाना भारत का प्रमुख साइकिल और खेल उपकरण विनिर्माण केंद्र है। यहाँ के कारोबारियों को उम्मीद है कि इस योजना से निवेश, कौशल विकास और निर्यात के अवसर बढ़ेंगे। हालाँकि, छोटे व्यापारियों ने माँग की है कि योजना का लाभ केवल बड़े उद्योगों तक सीमित न रहे।
इस योजना के तहत किन क्षेत्रों को सहायता मिलेगी?
योजना के तहत निवेश, प्रौद्योगिकी अंगीकार, अनुसंधान एवं नवाचार, कौशल विकास, गुणवत्ता प्रमाणन और बाजार विकास को लक्षित सहायता दी जाएगी। यह खेलो भारत नीति 2025, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप है।
छोटे व्यापारियों को इस योजना से क्या चिंताएँ हैं?
साइकिल उद्योग से जुड़े कारोबारी हरविंदर सिंह ने कहा कि अब तक ऐसी योजनाओं का लाभ मुख्यतः बड़े व्यापारी उठाते रहे हैं, जबकि छोटे उद्यमी वंचित रह जाते हैं। उन्होंने माँग की कि योजना का क्रियान्वयन इस प्रकार हो कि सूक्ष्म और लघु उद्यमों को भी समान अवसर मिले।
राष्ट्र प्रेस
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