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खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को कैबिनेट की मंजूरी, ₹1,856.67 करोड़ से मेरठ उद्योग को नई उम्मीद

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खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को कैबिनेट की मंजूरी, ₹1,856.67 करोड़ से मेरठ उद्योग को नई उम्मीद

सारांश

केंद्रीय कैबिनेट ने ₹1,856.67 करोड़ की खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को मंजूरी दी। मेरठ के खेल कारोबारियों ने स्वागत तो किया, लेकिन असली सवाल यह है — क्या योजना का लाभ सिर्फ बड़े नामों तक सीमित रहेगा या छोटे निर्माताओं तक भी पहुँचेगा?

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 28 अक्टूबर 2026 को 'खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम' को ₹1,856.67 करोड़ की मंजूरी दी।
योजना का लक्ष्य घरेलू खेल उपकरण उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना और निर्माण इकाइयों को सीधा लाभ पहुँचाना है।
मेरठ के खेल कारोबारियों — दीपक गोयल , विपिन भाटिया , आलोक भाटिया और गौरव महाजन — ने योजना का स्वागत किया।
कारोबारियों ने चेताया कि योजना का लाभ केवल बड़ी इकाइयों तक न रहे — छोटे निर्माताओं तक पहुँचना ज़रूरी है।
यह योजना पहले से जारी खेलो इंडिया पहल का विस्तार है, जो अब एथलीटों के साथ-साथ उत्पादन क्षेत्र को भी प्रोत्साहन देती है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 28 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 'खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम' को ₹1,856.67 करोड़ की मंजूरी दे दी, जिसका लक्ष्य भारतीय खेल उपकरण उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे ले जाना है। इस घोषणा के बाद मेरठ के खेल व्यापारियों में उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि मेरठ भारत का सबसे बड़ा खेल सामान उत्पादन केंद्र माना जाता है।

योजना की मुख्य विशेषताएँ

इस योजना का मकसद खेल उपकरण निर्माण क्षेत्र को संगठित प्रोत्साहन देना और घरेलू उत्पादन की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना है। ₹1,856.67 करोड़ के इस आवंटन से छोटे और मध्यम उत्पादन इकाइयों को वित्तीय सहयोग, तकनीकी उन्नयन और विपणन समर्थन मिलने की उम्मीद है। यह योजना पहले से चल रही खेलो इंडिया पहल का विस्तार मानी जा रही है, जो अब तक एथलीटों पर केंद्रित थी — इस बार निर्माण इकाइयों को सीधा लाभ पहुँचाने का प्रावधान किया गया है।

मेरठ के कारोबारियों की प्रतिक्रिया

गोयल स्पोर्ट्स इंडस्ट्री के मालिक दीपक गोयल ने कहा, 'खेलो इंडिया के ज़रिए हमारे व्यापार में इज़ाफा हुआ है। आज स्कूलों में हमारा सामान जा रहा है और क्लास में स्पोर्ट्स का अलग पीरियड होता है।' उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि 'अगर यह स्कीम सही तरीके से छोटे निर्माताओं तक पहुँचती है तो काम बढ़ेगा, लेकिन कई बार सरकार स्कीम लाती है और वो सिर्फ बड़े नामों तक ही पहुँचती है।'

आरएल भाटिया एंड संस के मालिक विपिन भाटिया ने कहा, 'अगर इस स्कीम का कार्यान्वयन सही तरीके से हो तो इसका काफी लाभ मिलेगा। खेल में बहुत स्कोप है, अभी गुणवत्ता में भी सुधार की जरूरत है — इसमें सरकार की मदद ज़रूरी है।' भाटिया संस के मालिक आलोक भाटिया ने कहा कि वर्तमान सरकार खेलो इंडिया के ज़रिए एथलीट्स को प्रोत्साहन देती आ रही थी और अब निर्माण इकाइयों के लिए जो नई स्कीम लॉन्च की गई है, उससे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बड़ा लाभ मिलेगा।

मिशा स्पोर्ट्स के मालिक गौरव महाजन ने कहा, 'इससे खेल उद्योग को फायदा मिला। नौकरियाँ भी बढ़ेंगी और खिलाड़ियों का भी मनोबल बढ़ेगा, क्योंकि उन्हें बेहतरीन उपकरण मिलेंगे।'

छोटे निर्माताओं तक पहुँच की चुनौती

हालाँकि व्यापारियों में उत्साह है, लेकिन कई कारोबारियों ने एक महत्वपूर्ण चिंता भी सामने रखी — क्रियान्वयन की पारदर्शिता। दीपक गोयल और विपिन भाटिया, दोनों ने आलोचकों के स्वर में कहा कि अक्सर इस तरह की सरकारी योजनाएँ 'गिनती के बड़े नामों' तक ही सीमित रह जाती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब मेरठ के खेल उद्योग में छोटी और असंगठित इकाइयाँ बड़ी संख्या में हैं, जिन तक योजना का लाभ पहुँचाना प्रशासनिक रूप से जटिल है।

व्यापक संदर्भ और आगे की राह

गौरतलब है कि भारत सरकार की खेलो इंडिया पहल पहले से ही एथलीटों, युवा प्रतिभाओं और खेल बुनियादी ढाँचे पर केंद्रित रही है। ₹1,856.67 करोड़ की यह नई मैन्युफैक्चरिंग योजना उस ढाँचे का स्वाभाविक विस्तार है — जो आपूर्ति शृंखला के उत्पादन छोर को मजबूत करती है। यदि क्रियान्वयन समावेशी रहा तो मेरठ जैसे उद्योग केंद्रों में रोज़गार और निर्यात दोनों बढ़ सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

856.67 करोड़ की यह योजना कागज़ पर बड़ी लगती है, लेकिन मेरठ के व्यापारियों की एक ही चिंता बार-बार सामने आती है — क्रियान्वयन। भारत में खेल उपकरण उद्योग की रीढ़ छोटे और असंगठित निर्माता हैं, और अधिकांश सरकारी औद्योगिक योजनाओं का ऐतिहासिक रिकॉर्ड रहा है कि लाभ बड़ी, स्थापित कंपनियों तक ही पहुँचता है। असली परीक्षा यह है कि सरकार इस बार एक पारदर्शी और सुलभ वितरण तंत्र बनाती है या नहीं। बिना उस ढाँचे के, यह योजना भी उन कई घोषणाओं की तरह बन सकती है जिन्होंने मेरठ जैसे औद्योगिक केंद्रों की ज़मीनी तस्वीर नहीं बदली।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम क्या है?
यह केंद्र सरकार की एक नई योजना है जिसे 28 अक्टूबर 2026 को कैबिनेट ने ₹1,856.67 करोड़ की मंजूरी दी। इसका उद्देश्य भारतीय खेल उपकरण निर्माण उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना और छोटी-बड़ी उत्पादन इकाइयों को प्रोत्साहन देना है।
इस योजना से मेरठ के खेल कारोबारियों को क्या फायदा होगा?
मेरठ भारत का सबसे बड़ा खेल सामान उत्पादन केंद्र है और यहाँ की इकाइयों को वित्तीय सहायता, गुणवत्ता उन्नयन और विपणन समर्थन मिलने की उम्मीद है। स्थानीय कारोबारियों के अनुसार इससे रोज़गार बढ़ेंगे और खिलाड़ियों को बेहतर उपकरण मिलेंगे।
कारोबारियों ने योजना के बारे में क्या चिंता जताई?
मेरठ के कई व्यापारियों ने कहा कि अक्सर ऐसी सरकारी योजनाएँ केवल बड़ी और स्थापित कंपनियों तक पहुँचती हैं। उनका कहना है कि जब तक छोटे निर्माताओं तक यह योजना सुलभ नहीं होगी, तब तक इसका व्यापक लाभ नहीं मिल पाएगा।
यह योजना खेलो इंडिया की पुरानी पहल से कैसे अलग है?
पहले खेलो इंडिया पहल मुख्य रूप से एथलीटों और युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने पर केंद्रित थी। नई मैन्युफैक्चरिंग स्कीम उत्पादन इकाइयों को सीधा लाभ देने पर जोर देती है, यानी अब आपूर्ति शृंखला के निर्माण छोर को भी सरकारी समर्थन मिलेगा।
इस योजना के लिए कितना बजट आवंटित किया गया है?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस योजना के लिए ₹1,856.67 करोड़ की मंजूरी दी है। यह राशि खेल उपकरण निर्माण क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए निर्धारित की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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