31 जुलाई 2026
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खेलो इंडिया स्कीम को कैबिनेट की मंजूरी: ₹36,441 करोड़ का आवंटन, 2030-31 तक खेल इकोसिस्टम में क्रांति का लक्ष्य

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खेलो इंडिया स्कीम को कैबिनेट की मंजूरी: ₹36,441 करोड़ का आवंटन, 2030-31 तक खेल इकोसिस्टम में क्रांति का लक्ष्य

सारांश

कैबिनेट ने खेलो इंडिया स्कीम के लिए ₹36,441 करोड़ मंजूर किए — पिछली योजना से आठ गुना अधिक। स्कूल के मैदान से ओलंपिक पोडियम तक एक सुनिश्चित मार्ग, दस गुना विस्तारित एथलीट इकोसिस्टम और राष्ट्रीय कोच एक्रेडिटेशन बोर्ड — यह आज़ादी के बाद का सबसे बड़ा खेल विकास कार्यक्रम है।

मुख्य बातें

केंद्रीय कैबिनेट ने 31 जुलाई 2026 को खेलो इंडिया स्कीम के विस्तारित रूप को ₹36,441 करोड़ के बजट के साथ मंजूरी दी।
यह राशि पिछली खेलो इंडिया स्कीम से लगभग आठ गुना अधिक है; अवधि 2026-27 से 2030-31 तक।
इमर्जिंग खेलो इंडिया एथलीट श्रेणी से एथलीट विकास इकोसिस्टम लगभग दस गुना बढ़ेगा।
नेशनल कोच एक्रेडिटेशन बोर्ड (NCAB) और यूनिफाइड डिजिटल स्पोर्ट्स प्लेटफॉर्म की स्थापना की जाएगी।
NSF स्कीम को भी 2026-31 के लिए मज़बूत किया गया है — अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर, विदेशी विशेषज्ञ और देसी खेलों के प्रचार पर ध्यान।
योजना में 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स और ओलंपिक-पैरालंपिक मेजबानी की तैयारी को भी ध्यान में रखा गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने 31 जुलाई 2026 को खेलो इंडिया स्कीम के विस्तारित स्वरूप और नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन (NSF) को बढ़ी हुई सहायता देने को मंजूरी दी। 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए स्वीकृत कुल बजट ₹36,441 करोड़ है — जो पिछली खेलो इंडिया स्कीम से लगभग आठ गुना अधिक है। सरकार के अनुसार, आज़ादी के बाद यह देश का सबसे बड़ा खेल विकास कार्यक्रम है।

योजना का दायरा और नई संरचना

नई खेलो इंडिया स्कीम को स्कूल के खेल मैदानों से लेकर ओलंपिक पोडियम तक एक सुनिश्चित मार्ग बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें नेशनल सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस (NCOEs), खेलो इंडिया सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस (KICOEs), SAI ट्रेनिंग सेंटर्स (STCs), खेलो इंडिया एक्रेडिटेड अकादमीज (KIAAs), खेलो इंडिया सेंटर्स (KICs) और आर्म्ड फोर्सेज की यूथ स्पोर्ट्स कंपनियाँ (YSCs) शामिल हैं। ये सभी संस्थान मिलकर पूरे देश में विश्वस्तरीय कोचिंग, खेल विज्ञान सहायता और आधुनिक बुनियादी ढाँचा प्रदान करेंगे।

दो नई पहल — खेलो इंडिया फीडर स्कूल्स और खेलो इंडिया उत्कृष्ट विद्यालय — खेल को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ेंगी और प्रतिभाशाली बच्चों की शुरुआती पहचान व योजनाबद्ध विकास सुनिश्चित करेंगी। यह खेलो भारत नीति 2025 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विजन के अनुरूप है।

एथलीट विकास का विस्तारित ढाँचा

पहली बार, मौजूदा खेलो इंडिया एथलीट कार्यक्रम के साथ-साथ एक नई इमर्जिंग खेलो इंडिया एथलीट श्रेणी बनाई गई है। इससे एथलीट विकास का स्ट्रक्चर्ड इकोसिस्टम लगभग दस गुना बढ़ेगा और हज़ारों अतिरिक्त युवा एथलीट पेशेवर कोचिंग, वैज्ञानिक सहायता और दीर्घकालिक मेंटरिंग के दायरे में आएंगे।

एक मज़बूत देशव्यापी प्रतिभा पहचान फ्रेमवर्क में प्रतिभा पहचान विकास समितियाँ, क्षेत्रीय समितियाँ, प्रतिभा स्काउट्स, हाई परफॉर्मेंस निदेशक और हाई परफॉर्मेंस प्रबंधक शामिल होंगे। जमीनी स्तर की प्रतियोगिता से टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) तक एक स्पष्ट प्रगति मार्ग भी तैयार किया गया है।

समावेशिता और सामाजिक लक्ष्य

योजना में महिला एथलीटों, पैरा-एथलीटों और देसी खेलों के प्रोत्साहन पर विशेष जोर दिया गया है। फिट इंडिया मूवमेंट को और विस्तार दिया जाएगा, जिसमें सक्रिय जीवनशैली, सीमावर्ती और दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुँच, तथा नशे की लत के विरुद्ध खेल-आधारित पहल शामिल हैं। गौरतलब है कि यह योजना खेल को केवल प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव के माध्यम के रूप में स्थापित करने का प्रयास करती है।

तकनीक, कोचिंग और निजी भागीदारी

सरकार नेशनल कोच एक्रेडिटेशन बोर्ड (NCAB) स्थापित करेगी, जो कोचिंग योग्यता के पेशेवर मानक तय करेगा। एक यूनिफाइड डिजिटल स्पोर्ट्स प्लेटफॉर्म एथलीट डेटाबेस, प्रतियोगिता प्रबंधन, फंडिंग ट्रैकिंग और फिट इंडिया सहभागिता को एकीकृत करेगा — जिससे डेटा-आधारित नीति निर्माण और पारदर्शी शासन संभव होगा। निजी अकादमियों, कॉर्पोरेट भागीदारों और अन्य संस्थाओं के साथ सहयोग को और गहरा किया जाएगा।

NSF योजना और अंतरराष्ट्रीय लक्ष्य

खेलो इंडिया के साथ-साथ कैबिनेट ने 2026-31 के लिए नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन स्कीम को भी मज़बूत करने की मंजूरी दी है। यह स्कीम भारतीय एथलीटों और टीमों को कोचिंग, खेल विज्ञान, आधुनिक उपकरण, अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर, विदेशी विशेषज्ञों की नियुक्ति और बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भागीदारी के लिए वित्त पोषण उपलब्ध कराएगी। यह दक्षिण के देशों के साथ खेल सहयोग और भारत के देसी खेलों के अंतरराष्ट्रीय प्रचार को भी समर्थन देगी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी और ओलंपिक एवं पैरालंपिक गेम्स की संभावित मेजबानी की दिशा में काम कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

441 करोड़ का यह आँकड़ा प्रभावशाली है, लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी। खेलो इंडिया के पिछले चरणों में बुनियादी ढाँचे के निर्माण और एथलीट परिणामों के बीच की खाई बार-बार उजागर हुई है। 'दस गुना विस्तार' का दावा तब तक अधूरा है जब तक कि प्रतिभा पहचान फ्रेमवर्क और डिजिटल प्लेटफॉर्म ज़मीन पर जवाबदेही सुनिश्चित न करें। यह भी ध्यान देने योग्य है कि ओलंपिक में भारत की पदक तालिका अभी भी जनसंख्या और निवेश के अनुपात में बेहद कम है — बिना स्वतंत्र प्रदर्शन मापन के, यह भी पिछली घोषणाओं की तरह सुर्खियों तक सीमित रह सकती है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खेलो इंडिया स्कीम का नया बजट कितना है और यह पहले से कितना अलग है?
केंद्रीय कैबिनेट ने 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए खेलो इंडिया स्कीम के लिए ₹36,441 करोड़ मंजूर किए हैं, जो पिछली स्कीम से लगभग आठ गुना अधिक है। सरकार के अनुसार यह आज़ादी के बाद का सबसे बड़ा खेल विकास कार्यक्रम है।
इमर्जिंग खेलो इंडिया एथलीट श्रेणी क्या है?
यह मौजूदा खेलो इंडिया एथलीट कार्यक्रम के साथ-साथ बनाई गई एक नई श्रेणी है, जो एथलीट विकास इकोसिस्टम को लगभग दस गुना बढ़ाएगी। इससे हज़ारों अतिरिक्त युवा एथलीट पेशेवर कोचिंग, वैज्ञानिक सहायता और दीर्घकालिक मेंटरिंग के दायरे में आएंगे।
नेशनल कोच एक्रेडिटेशन बोर्ड (NCAB) का क्या काम होगा?
NCAB कोचिंग योग्यता के पेशेवर मानक तय करेगा और देशभर में कोचों व सहायक स्टाफ की क्षमता को मज़बूत करेगा। यह सुनिश्चित करेगा कि एथलीटों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण सहायता मिले।
नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन स्कीम में क्या नया है?
2026-31 के लिए मज़बूत की गई NSF स्कीम भारतीय एथलीटों और टीमों को कोचिंग, खेल विज्ञान, आधुनिक उपकरण, विदेशी विशेषज्ञों की नियुक्ति और बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भागीदारी के लिए वित्त पोषण देगी। यह दक्षिण के देशों के साथ खेल सहयोग और देसी खेलों के अंतरराष्ट्रीय प्रचार को भी समर्थन देगी।
इस योजना से भारत के ओलंपिक लक्ष्यों पर क्या असर पड़ेगा?
योजना जमीनी प्रतियोगिता से टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) तक एक स्पष्ट प्रगति मार्ग बनाती है। इसमें 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी और ओलंपिक-पैरालंपिक गेम्स की संभावित मेजबानी की तैयारी भी शामिल है, जो भारत को शीर्ष वैश्विक खेल राष्ट्रों में स्थापित करने का लक्ष्य रखती है।
राष्ट्र प्रेस
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