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खेलो इंडिया की नई स्कीम से ज्यादा एथलीटों को मौका मिलेगा: खेल मंत्रालय सचिव हरि रंजन राव

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खेलो इंडिया की नई स्कीम से ज्यादा एथलीटों को मौका मिलेगा: खेल मंत्रालय सचिव हरि रंजन राव

सारांश

खेल मंत्रालय सचिव हरि रंजन राव ने खेलो इंडिया की संशोधित स्कीम को ज़मीनी बदलाव का ज़रिया बताया — स्कूल से जिला स्तर तक लीग और प्रतियोगिताएँ बढ़ाकर अधिक एथलीटों को खेल से जोड़ने का लक्ष्य। अर्जुन पुरस्कार विजेता जी. साथियान ने भी सरकार के इस कदम का स्वागत किया।

मुख्य बातें

युवा मामले और खेल मंत्रालय के सचिव हरि रंजन राव ने 25 अगस्त को खेलो इंडिया की संशोधित स्कीम का विवरण साझा किया।
नई स्कीम स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और जिला — चार स्तरों पर अधिक प्रतियोगिताएँ और लीग आयोजित करेगी।
राव ने कहा कि स्कूली पाठ्यक्रम में खेल को अनिवार्य बनाना दशकों पुरानी परंपरा की वापसी है।
अर्जुन पुरस्कार विजेता टेबल टेनिस खिलाड़ी जी.
साथियान ने कहा कि सरकारी समर्थन से एथलीटों को उनकी हकदार पहचान मिली है।
साथियान ने नई पीढ़ी को 'कहीं ज्यादा बोल्ड' बताया और खेल करियर में माता-पिता की भूमिका को अहम माना।

युवा मामले और खेल मंत्रालय के सचिव हरि रंजन राव ने 25 अगस्त को कहा कि खेलो इंडिया की संशोधित योजना स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और जिला स्तर पर प्रतियोगिताओं और लीग का विस्तार करके अधिक बच्चों और एथलीटों को खेल से जोड़ेगी। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि स्कूली पाठ्यक्रम में खेल की वापसी दशकों पुरानी परंपरा को फिर से स्थापित करने का प्रयास है।

स्कूली खेल की वापसी की ज़रूरत

हरि रंजन राव ने कहा, 'स्कूल के पाठ्यक्रम में खेल को शामिल करना हमारे देश के लिए कोई नई बात नहीं है। 60 साल के ऊपर के पूर्व खिलाड़ी हमें बताते हैं कि जब वे स्कूल में थे, तो फिजिकल एजुकेशन और खेल में हिस्सा लेना जरूरी था।' उन्होंने माना कि प्राथमिकताओं में बदलाव के चलते यह परंपरा कमज़ोर पड़ी और अब इसे पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी खेल और शारीरिक शिक्षा को पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाने पर ज़ोर दिया गया था। खेलो इंडिया की नई रूपरेखा उसी दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है।

खेलो इंडिया की संशोधित योजना में क्या बदला

राव के अनुसार, संशोधित खेलो इंडिया स्कीम अब बहु-स्तरीय दृष्टिकोण पर काम करती है। स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और जिला — इन चारों स्तरों पर अधिक प्रतियोगिताएँ और लीग आयोजित की जाएँगी। उनका कहना है कि इससे न केवल एथलीटों की पहचान आसान होगी, बल्कि उन्हें खेलते रहने के अधिक अवसर भी मिलेंगे।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत 2036 ओलंपिक की मेज़बानी की दावेदारी कर रहा है और देश में खेल अवसंरचना के विस्तार पर ज़ोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ज़मीनी स्तर पर प्रतियोगिताओं की संख्या बढ़ाए बिना शीर्ष प्रदर्शन की उम्मीद करना संभव नहीं।

अर्जुन पुरस्कार विजेता साथियान की प्रतिक्रिया

अंतरराष्ट्रीय टेबल टेनिस खिलाड़ी और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित जी. साथियान ने सरकार के इस रुख का स्वागत किया। उन्होंने कहा, 'मैं सच में बहुत खुश हूँ कि हमारे प्रधानमंत्री सभी एथलीट्स के लिए बहुत बड़ा सपोर्ट रहे हैं। उन्होंने एथलीट्स से मिलने और उन्हें सम्मान देने की आदत डाल ली है। अब सभी एथलीट्स के लिए सम्मान बढ़ गया है।'

साथियान ने यह भी जोड़ा कि एथलीटों को वह पहचान मिली है जिसके वे हकदार थे, और इसमें सरकार की भूमिका निर्णायक रही है।

नई पीढ़ी और माता-पिता की भूमिका

साथियान ने युवा पीढ़ी के बारे में कहा, 'नई जेन जी और नई युवा पीढ़ी हमसे कहीं ज्यादा बोल्ड है। वे सच में बोल्ड कदम उठाना चाहते हैं और जो उन्हें पसंद है उसे आजमाना चाहते हैं।' उन्होंने माता-पिता की भूमिका को भी रेखांकित किया — उनके अनुसार, युवा खिलाड़ियों के करियर को दिशा देने में परिवार का मार्गदर्शन अहम होता है।

आलोचकों का कहना है कि सरकारी घोषणाओं और ज़मीनी क्रियान्वयन के बीच अंतर अक्सर बड़ा रहता है — असली परीक्षा यह होगी कि नई लीग और प्रतियोगिताएँ वास्तव में ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक पहुँचती हैं या नहीं। खेलो इंडिया की संशोधित योजना का विस्तृत ढाँचा आने वाले महीनों में स्पष्ट होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन का है। स्कूल स्तर पर खेल की अनिवार्यता की बात दशकों से होती रही है — राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी यही कहा गया था, फिर भी ज़मीनी हकीकत नहीं बदली। जब तक नई लीग और प्रतियोगिताएँ ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक नहीं पहुँचतीं, यह योजना महानगरीय प्रतिभाओं तक सीमित रह सकती है। 2036 ओलंपिक की दावेदारी के बीच ज़मीनी खेल अवसंरचना में निवेश की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खेलो इंडिया की नई संशोधित स्कीम क्या है?
खेलो इंडिया की संशोधित स्कीम एक बहु-स्तरीय खेल विकास कार्यक्रम है जो स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और जिला स्तर पर अधिक प्रतियोगिताएँ और लीग आयोजित करने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य अधिक बच्चों और एथलीटों को खेल से जोड़ना और उन्हें नियमित रूप से खेलने के अवसर देना है।
हरि रंजन राव ने स्कूलों में खेल को लेकर क्या कहा?
युवा मामले और खेल मंत्रालय के सचिव हरि रंजन राव ने कहा कि स्कूली पाठ्यक्रम में खेल और फिजिकल एजुकेशन की अनिवार्यता कोई नई अवधारणा नहीं है — यह पहले भी मौजूद थी। उनके अनुसार, बदलती प्राथमिकताओं के कारण यह परंपरा कमज़ोर पड़ी और अब इसे वापस लाने की ज़रूरत है।
जी. साथियान ने खेलो इंडिया और सरकारी समर्थन पर क्या कहा?
अर्जुन पुरस्कार विजेता टेबल टेनिस खिलाड़ी जी. साथियान ने कहा कि सरकार के सक्रिय समर्थन से एथलीटों को वह सम्मान और पहचान मिली है जिसके वे हकदार थे। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा एथलीटों से नियमित मुलाकात और उनके सम्मान की परंपरा को सकारात्मक बदलाव बताया।
नई खेलो इंडिया स्कीम से किसे फायदा होगा?
इस स्कीम का लाभ मुख्य रूप से स्कूल और कॉलेज स्तर के युवा खिलाड़ियों को मिलेगा, विशेष रूप से उन्हें जो अब तक प्रतियोगिताओं तक पहुँच न होने के कारण खेल से दूर रहते थे। जिला स्तर पर लीग शुरू होने से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के एथलीटों को भी अवसर मिलने की उम्मीद है।
खेलो इंडिया स्कीम में माता-पिता की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण मानी गई?
जी. साथियान ने कहा कि युवा खिलाड़ी अपने माता-पिता की राय को बहुत महत्व देते हैं और वे ही उन्हें करियर की दिशा दिखाते हैं। इसलिए खेल को एक व्यवहार्य करियर विकल्प के रूप में स्थापित करने के लिए परिवारों की सोच बदलना भी उतना ही ज़रूरी है जितना सरकारी नीतियाँ बनाना।
राष्ट्र प्रेस
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