खेलो इंडिया की नई स्कीम से ज्यादा एथलीटों को मौका मिलेगा: खेल मंत्रालय सचिव हरि रंजन राव
सारांश
मुख्य बातें
युवा मामले और खेल मंत्रालय के सचिव हरि रंजन राव ने 25 अगस्त को कहा कि खेलो इंडिया की संशोधित योजना स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और जिला स्तर पर प्रतियोगिताओं और लीग का विस्तार करके अधिक बच्चों और एथलीटों को खेल से जोड़ेगी। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि स्कूली पाठ्यक्रम में खेल की वापसी दशकों पुरानी परंपरा को फिर से स्थापित करने का प्रयास है।
स्कूली खेल की वापसी की ज़रूरत
हरि रंजन राव ने कहा, 'स्कूल के पाठ्यक्रम में खेल को शामिल करना हमारे देश के लिए कोई नई बात नहीं है। 60 साल के ऊपर के पूर्व खिलाड़ी हमें बताते हैं कि जब वे स्कूल में थे, तो फिजिकल एजुकेशन और खेल में हिस्सा लेना जरूरी था।' उन्होंने माना कि प्राथमिकताओं में बदलाव के चलते यह परंपरा कमज़ोर पड़ी और अब इसे पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी खेल और शारीरिक शिक्षा को पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाने पर ज़ोर दिया गया था। खेलो इंडिया की नई रूपरेखा उसी दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है।
खेलो इंडिया की संशोधित योजना में क्या बदला
राव के अनुसार, संशोधित खेलो इंडिया स्कीम अब बहु-स्तरीय दृष्टिकोण पर काम करती है। स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और जिला — इन चारों स्तरों पर अधिक प्रतियोगिताएँ और लीग आयोजित की जाएँगी। उनका कहना है कि इससे न केवल एथलीटों की पहचान आसान होगी, बल्कि उन्हें खेलते रहने के अधिक अवसर भी मिलेंगे।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत 2036 ओलंपिक की मेज़बानी की दावेदारी कर रहा है और देश में खेल अवसंरचना के विस्तार पर ज़ोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ज़मीनी स्तर पर प्रतियोगिताओं की संख्या बढ़ाए बिना शीर्ष प्रदर्शन की उम्मीद करना संभव नहीं।
अर्जुन पुरस्कार विजेता साथियान की प्रतिक्रिया
अंतरराष्ट्रीय टेबल टेनिस खिलाड़ी और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित जी. साथियान ने सरकार के इस रुख का स्वागत किया। उन्होंने कहा, 'मैं सच में बहुत खुश हूँ कि हमारे प्रधानमंत्री सभी एथलीट्स के लिए बहुत बड़ा सपोर्ट रहे हैं। उन्होंने एथलीट्स से मिलने और उन्हें सम्मान देने की आदत डाल ली है। अब सभी एथलीट्स के लिए सम्मान बढ़ गया है।'
साथियान ने यह भी जोड़ा कि एथलीटों को वह पहचान मिली है जिसके वे हकदार थे, और इसमें सरकार की भूमिका निर्णायक रही है।
नई पीढ़ी और माता-पिता की भूमिका
साथियान ने युवा पीढ़ी के बारे में कहा, 'नई जेन जी और नई युवा पीढ़ी हमसे कहीं ज्यादा बोल्ड है। वे सच में बोल्ड कदम उठाना चाहते हैं और जो उन्हें पसंद है उसे आजमाना चाहते हैं।' उन्होंने माता-पिता की भूमिका को भी रेखांकित किया — उनके अनुसार, युवा खिलाड़ियों के करियर को दिशा देने में परिवार का मार्गदर्शन अहम होता है।
आलोचकों का कहना है कि सरकारी घोषणाओं और ज़मीनी क्रियान्वयन के बीच अंतर अक्सर बड़ा रहता है — असली परीक्षा यह होगी कि नई लीग और प्रतियोगिताएँ वास्तव में ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक पहुँचती हैं या नहीं। खेलो इंडिया की संशोधित योजना का विस्तृत ढाँचा आने वाले महीनों में स्पष्ट होने की उम्मीद है।