गांवों और स्कूलों में निहित हैं भारतीय खेलों की असली ताकत: पीटी उषा

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गांवों और स्कूलों में निहित हैं भारतीय खेलों की असली ताकत: पीटी उषा

सारांश

भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा ने कहा है कि खेलों में भारत की सफलता की नींव गांवों और स्कूलों में है। उन्होंने ज़मीनी स्तर पर प्रतिभाओं को पहचानने और विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। यह महत्वपूर्ण है कि हम खेल को आगे बढ़ाने के लिए निवेश करें।

Key Takeaways

  • गांवों और स्कूलों में युवा प्रतिभाएं निहित हैं।
  • खेलों में निवेश करना आवश्यक है।
  • पीटी उषा का अनुभव प्रेरणादायक है।

नई दिल्ली, 15 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) की अध्यक्ष पीटी उषा ने रविवार को कहा कि भारत में खेलों की सफलता की असली बुनियाद गांवों, छोटे कस्बों और स्कूलों में है। उन्होंने यह भी कहा कि जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान और उनके विकास पर ध्यान देना देश के खेल के दीर्घकालिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

रविवार को राष्ट्रीय राजधानी में 'स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया' (एसजेएफआई) के स्वर्ण जयंती राष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए उषा ने कहा कि पूरे देश में कोचिंग, बुनियादी ढांचे और व्यवस्थित तरीके से प्रतिभा की पहचान में निवेश आवश्यक है, जिससे जमीनी स्तर की संरचना को मजबूत किया जा सके।

उन्होंने कहा, "भारतीय खेलों की असली ताकत गांवों, कस्बों और स्कूलों में है, जहां युवा प्रतिभाएं अवसरों का इंतजार कर रही हैं। यदि हम कोचिंग, बुनियादी ढांचे और प्रतिभा की पहचान में निवेश जारी रखते हैं, तो भारत लगातार विश्व स्तरीय एथलीट तैयार कर सकता है।" एथलेटिक्स में अपने अनुभव साझा करते हुए उषा ने बताया कि उनके करियर की शुरुआत केरल में साधारण परिस्थितियों में हुई थी, जहां सीमित सुविधाओं के बावजूद उन्होंने वैश्विक स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने का सपना पूरा किया।

उषा ने आगे कहा, "मेरी यात्रा कई दशक पहले केरल के एक साधारण ट्रैक से शुरू हुई थी। सुविधाएं सीमित थीं, लेकिन देश का प्रतिनिधित्व करने की इच्छा बहुत मजबूत थी। एक एथलीट से लेकर अब भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष बनने तक, मेरी यह यात्रा मेरे इस विश्वास को और मजबूत करती है कि भारत की खेल क्षमता बहुत विशाल है।"

भारत के विभिन्न खेलों में प्रगति की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि कई खेलों के एथलीट अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आत्मविश्वास से मुकाबला कर रहे हैं। उषा ने कहा, "एथलेटिक्स और बैडमिंटन से लेकर कुश्ती, मुक्केबाजी, हॉकी और निशानेबाजी तक, भारतीय एथलीट वैश्विक मंच पर आत्मविश्वास के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।"

उन्होंने खेल क्षेत्र में मीडिया की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया और कहा कि खेल पत्रकार एथलीटों के प्रति लोगों की सोच को आकार देने में मदद करते हैं, जिससे आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा मिलती है। उन्होंने यह भी कहा, "खेल पत्रकारों का खेल जगत में एक खास स्थान है। आप केवल परिणामों की रिपोर्ट नहीं करते, बल्कि एथलीटों की भावनाओं, संघर्षों और जीत की कहानियों को शब्दों में पिरोते हैं।"

Point of View

यह स्पष्ट है कि भारतीय खेलों का भविष्य गांवों और छोटे कस्बों में निहित है। पीटी उषा का यह बयान हमें याद दिलाता है कि हमें युवा प्रतिभाओं को पहचानने और उनका विकास करने की आवश्यकता है। यह एक दीर्घकालिक दृष्टिकोण है जो हमारे खेलों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना सकता है।
NationPress
17/03/2026

Frequently Asked Questions

पीटी उषा ने भारतीय खेलों की ताकत के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि भारतीय खेलों की असली ताकत गांवों, कस्बों और स्कूलों में है, जहां युवा प्रतिभाएं अवसरों की तलाश में हैं।
भारत में खेल विकास के लिए क्या आवश्यक है?
जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान और उनके विकास के लिए कोचिंग और बुनियादी ढांचे में निवेश करना जरूरी है।
पीटी उषा की खेल यात्रा की शुरुआत कहां से हुई?
उनकी खेल यात्रा की शुरुआत केरल के साधारण ट्रैक से हुई थी।
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