ऑपरेशन डिजिटल कवच: लखनऊ पुलिस की अपील — निजी फोटो-वीडियो लीक हो तो घबराएं नहीं, तुरंत शिकायत करें
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ पुलिस ने 28 अक्टूबर 2026 को 'ऑपरेशन डिजिटल कवच' के तहत एक विशेष जागरूकता अभियान की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य उन पीड़ितों तक पहुँचना है जिनकी निजी तस्वीरें या वीडियो बिना सहमति के ऑनलाइन प्रसारित किए जाते हैं या जिन्हें इन सामग्रियों के ज़रिए ब्लैकमेल किया जाता है। पुलिस ने नागरिकों से स्पष्ट अपील की है कि डर या सामाजिक संकोच की वजह से चुप न बैठें, बल्कि तत्काल कानूनी मदद लें।
अभियान की पृष्ठभूमि और ज़रूरत
पुलिस के अनुसार, निजी फोटो या वीडियो लीक होने के अनेक मामलों में पीड़ित सामाजिक प्रतिष्ठा, पारिवारिक प्रतिक्रिया और बदनामी के भय से शिकायत दर्ज नहीं कराते। इसी चुप्पी का फायदा उठाकर अपराधी और अधिक साहसी हो जाते हैं। अपर पुलिस उपायुक्त (अपराध) किरण यादव ने कहा, 'यदि किसी की निजी तस्वीरें या वीडियो बिना सहमति के वायरल किए जाते हैं या उनके माध्यम से ब्लैकमेल किया जाता है, तो डरें नहीं और चुप न रहें। यह पीड़ित की गलती नहीं है और कानून ऐसे मामलों में सहायता और सुरक्षा प्रदान करता है।'
गौरतलब है कि यह अभियान ऐसे समय में शुरू हुआ है जब देशभर में साइबर ब्लैकमेलिंग और बिना सहमति के अंतरंग सामग्री (NCII) के प्रसार के मामलों में तेज़ी देखी जा रही है।
डिजिटल सबूत सुरक्षित रखें — पुलिस की सलाह
लखनऊ पुलिस ने पीड़ितों को सलाह दी है कि शिकायत दर्ज कराने से पहले सभी डिजिटल साक्ष्य — जैसे संबंधित पोस्ट, यूआरएल, प्रोफाइल लिंक, स्क्रीनशॉट, चैट और धमकी भरे संदेश — सुरक्षित रखें। हालाँकि, इन सामग्रियों को किसी अन्य व्यक्ति को अग्रेषित करने से बचें। यदि कोई व्यक्ति इन सामग्रियों को वायरल करने की धमकी देकर पैसे या अन्य मांगें करता है, तो उसके दबाव में न आएं और तुरंत पुलिस को सूचित करें।
शिकायत कहाँ और कैसे करें
पीड़ित निकटतम पुलिस थाने या साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार का नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) ऑनलाइन शिकायत की सुविधा प्रदान करता है। पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के बाद मिलने वाले संदर्भ नंबर को सुरक्षित रखें, ताकि शिकायत की स्थिति पर नज़र रखी जा सके।
पुलिस ने बताया कि महिलाओं और बच्चों से जुड़े कुछ मामलों में NCRP पोर्टल पर पहचान उजागर किए बिना प्रारंभिक सूचना दी जा सकती है, हालाँकि यह सुविधा सभी प्रकार के साइबर अपराधों पर लागू नहीं होती।
StopNCII.org — सामग्री प्रसार रोकने का अतिरिक्त माध्यम
लखनऊ पुलिस ने पीड़ितों को StopNCII.org के उपयोग की भी जानकारी दी है। यह एक निःशुल्क ऑनलाइन टूल है जो बिना सहमति के साझा की गई निजी तस्वीरों और वीडियो के ऑनलाइन प्रसार को रोकने में सहायता करता है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह सेवा पुलिस शिकायत का विकल्प नहीं है, बल्कि कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ अपनाया जाने वाला एक अतिरिक्त उपाय है।
कानूनी प्रावधान और दंड
लखनऊ पुलिस के अनुसार, निजी तस्वीरें या वीडियो लीक करने, प्रसारित करने या उनके ज़रिए ब्लैकमेल करने वालों के विरुद्ध सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है। मामले की प्रकृति के अनुसार दोषियों को कारावास और जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। ब्लैकमेलिंग, धमकी, पीछा करने या जबरन वसूली जैसे गंभीर मामलों में अतिरिक्त धाराएं भी लगाई जा सकती हैं।
लखनऊ पुलिस ने नागरिकों से साइबर अपराधों के खिलाफ जागरूक और सतर्क रहने की अपील की है, और इस अभियान को डिजिटल सुरक्षा की दिशा में एक सतत प्रयास बताया है।