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ऑपरेशन डिजिटल कवच: लखनऊ पुलिस की अपील — निजी फोटो-वीडियो लीक हो तो घबराएं नहीं, तुरंत शिकायत करें

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ऑपरेशन डिजिटल कवच: लखनऊ पुलिस की अपील — निजी फोटो-वीडियो लीक हो तो घबराएं नहीं, तुरंत शिकायत करें

सारांश

लखनऊ पुलिस ने 'ऑपरेशन डिजिटल कवच' से एक ज़रूरी संदेश दिया है — निजी तस्वीरें या वीडियो लीक होने पर चुप्पी अपराधियों का हथियार बनती है। शिकायत न करना डर नहीं, बल्कि जोखिम है। NCRP पोर्टल और StopNCII.org के साथ अब कानून पीड़ित के पक्ष में खड़ा है।

मुख्य बातें

लखनऊ पुलिस ने 28 अक्टूबर 2026 को 'ऑपरेशन डिजिटल कवच' अभियान शुरू किया।
निजी फोटो-वीडियो लीक या ब्लैकमेल के मामलों में पीड़ित निकटतम साइबर क्राइम थाने या NCRP पोर्टल पर शिकायत करें।
महिलाओं और बच्चों के कुछ मामलों में NCRP पर पहचान उजागर किए बिना प्रारंभिक सूचना देने की सुविधा उपलब्ध है।
निःशुल्क टूल StopNCII.org सामग्री के ऑनलाइन प्रसार को रोकने में मदद करता है — यह पुलिस शिकायत का विकल्प नहीं।
दोषियों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत कारावास व जुर्माने का प्रावधान है।
अपर पुलिस उपायुक्त (अपराध) किरण यादव ने कहा कि पीड़ित खुद को दोषी न मानें — कानून उनके साथ है।

लखनऊ पुलिस ने 28 अक्टूबर 2026 को 'ऑपरेशन डिजिटल कवच' के तहत एक विशेष जागरूकता अभियान की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य उन पीड़ितों तक पहुँचना है जिनकी निजी तस्वीरें या वीडियो बिना सहमति के ऑनलाइन प्रसारित किए जाते हैं या जिन्हें इन सामग्रियों के ज़रिए ब्लैकमेल किया जाता है। पुलिस ने नागरिकों से स्पष्ट अपील की है कि डर या सामाजिक संकोच की वजह से चुप न बैठें, बल्कि तत्काल कानूनी मदद लें।

अभियान की पृष्ठभूमि और ज़रूरत

पुलिस के अनुसार, निजी फोटो या वीडियो लीक होने के अनेक मामलों में पीड़ित सामाजिक प्रतिष्ठा, पारिवारिक प्रतिक्रिया और बदनामी के भय से शिकायत दर्ज नहीं कराते। इसी चुप्पी का फायदा उठाकर अपराधी और अधिक साहसी हो जाते हैं। अपर पुलिस उपायुक्त (अपराध) किरण यादव ने कहा, 'यदि किसी की निजी तस्वीरें या वीडियो बिना सहमति के वायरल किए जाते हैं या उनके माध्यम से ब्लैकमेल किया जाता है, तो डरें नहीं और चुप न रहें। यह पीड़ित की गलती नहीं है और कानून ऐसे मामलों में सहायता और सुरक्षा प्रदान करता है।'

गौरतलब है कि यह अभियान ऐसे समय में शुरू हुआ है जब देशभर में साइबर ब्लैकमेलिंग और बिना सहमति के अंतरंग सामग्री (NCII) के प्रसार के मामलों में तेज़ी देखी जा रही है।

डिजिटल सबूत सुरक्षित रखें — पुलिस की सलाह

लखनऊ पुलिस ने पीड़ितों को सलाह दी है कि शिकायत दर्ज कराने से पहले सभी डिजिटल साक्ष्य — जैसे संबंधित पोस्ट, यूआरएल, प्रोफाइल लिंक, स्क्रीनशॉट, चैट और धमकी भरे संदेश — सुरक्षित रखें। हालाँकि, इन सामग्रियों को किसी अन्य व्यक्ति को अग्रेषित करने से बचें। यदि कोई व्यक्ति इन सामग्रियों को वायरल करने की धमकी देकर पैसे या अन्य मांगें करता है, तो उसके दबाव में न आएं और तुरंत पुलिस को सूचित करें।

शिकायत कहाँ और कैसे करें

पीड़ित निकटतम पुलिस थाने या साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार का नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) ऑनलाइन शिकायत की सुविधा प्रदान करता है। पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के बाद मिलने वाले संदर्भ नंबर को सुरक्षित रखें, ताकि शिकायत की स्थिति पर नज़र रखी जा सके।

पुलिस ने बताया कि महिलाओं और बच्चों से जुड़े कुछ मामलों में NCRP पोर्टल पर पहचान उजागर किए बिना प्रारंभिक सूचना दी जा सकती है, हालाँकि यह सुविधा सभी प्रकार के साइबर अपराधों पर लागू नहीं होती।

StopNCII.org — सामग्री प्रसार रोकने का अतिरिक्त माध्यम

लखनऊ पुलिस ने पीड़ितों को StopNCII.org के उपयोग की भी जानकारी दी है। यह एक निःशुल्क ऑनलाइन टूल है जो बिना सहमति के साझा की गई निजी तस्वीरों और वीडियो के ऑनलाइन प्रसार को रोकने में सहायता करता है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह सेवा पुलिस शिकायत का विकल्प नहीं है, बल्कि कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ अपनाया जाने वाला एक अतिरिक्त उपाय है।

कानूनी प्रावधान और दंड

लखनऊ पुलिस के अनुसार, निजी तस्वीरें या वीडियो लीक करने, प्रसारित करने या उनके ज़रिए ब्लैकमेल करने वालों के विरुद्ध सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है। मामले की प्रकृति के अनुसार दोषियों को कारावास और जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। ब्लैकमेलिंग, धमकी, पीछा करने या जबरन वसूली जैसे गंभीर मामलों में अतिरिक्त धाराएं भी लगाई जा सकती हैं।

लखनऊ पुलिस ने नागरिकों से साइबर अपराधों के खिलाफ जागरूक और सतर्क रहने की अपील की है, और इस अभियान को डिजिटल सुरक्षा की दिशा में एक सतत प्रयास बताया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती जागरूकता से आगे की है — शिकायत दर्ज होने के बाद जाँच की गुणवत्ता और त्वरित कार्रवाई। देशभर में साइबर अपराध की शिकायतें तेज़ी से बढ़ रही हैं, पर पुलिस बलों में प्रशिक्षित साइबर जाँचकर्ताओं की भारी कमी बनी हुई है। NCRP पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराना पहला कदम है, लेकिन पीड़ितों का अनुभव अक्सर यही रहा है कि ऑनलाइन शिकायत के बाद फॉलो-अप कमज़ोर रहता है। जब तक शिकायत-से-अभियोजन की पूरी श्रृंखला मज़बूत नहीं होती, तब तक केवल हेल्पलाइन नंबर और जागरूकता अभियान पर्याप्त नहीं होंगे।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑपरेशन डिजिटल कवच क्या है?
यह लखनऊ पुलिस का एक विशेष जागरूकता अभियान है, जो 28 अक्टूबर 2026 को शुरू हुआ। इसका उद्देश्य उन पीड़ितों को प्रोत्साहित करना है जिनकी निजी तस्वीरें या वीडियो बिना सहमति के ऑनलाइन साझा की गई हों या जिन्हें इन सामग्रियों के ज़रिए ब्लैकमेल किया जा रहा हो — ताकि वे चुप न रहें और तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।
निजी फोटो या वीडियो लीक होने पर शिकायत कहाँ करें?
पीड़ित निकटतम पुलिस थाने या साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा, केंद्र सरकार के नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज की जा सकती है। शिकायत के बाद मिला संदर्भ नंबर सुरक्षित रखें।
StopNCII.org का उपयोग कैसे और क्यों करें?
StopNCII.org एक निःशुल्क ऑनलाइन टूल है जो बिना सहमति के साझा की गई निजी तस्वीरों और वीडियो के ऑनलाइन प्रसार को रोकने में मदद करता है। लखनऊ पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह सेवा पुलिस शिकायत का विकल्प नहीं, बल्कि एक अतिरिक्त माध्यम है और दोनों का एक साथ उपयोग किया जाना चाहिए।
ब्लैकमेल या लीक के दोषियों पर क्या कानूनी कार्रवाई हो सकती है?
दोषियों के विरुद्ध सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। ब्लैकमेलिंग, धमकी, पीछा करने या जबरन वसूली जैसे गंभीर मामलों में अतिरिक्त धाराएं भी लगाई जा सकती हैं।
पुलिस ने पीड़ितों को डिजिटल सबूत के बारे में क्या सलाह दी है?
लखनऊ पुलिस ने सलाह दी है कि पीड़ित संबंधित पोस्ट, यूआरएल, प्रोफाइल लिंक, स्क्रीनशॉट, चैट और धमकी भरे संदेश सुरक्षित रखें। हालाँकि, इन सामग्रियों को किसी अन्य व्यक्ति को अग्रेषित न करें, क्योंकि ऐसा करने से अपराध और फैल सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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