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जम्मू-कश्मीर साइबर क्राइम विभाग की एडवाइजरी: OTP, फिशिंग और नकली कॉल से बचने की चेतावनी

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जम्मू-कश्मीर साइबर क्राइम विभाग की एडवाइजरी: OTP, फिशिंग और नकली कॉल से बचने की चेतावनी

सारांश

जम्मू-कश्मीर साइबर क्राइम विभाग ने 30 मई को एडवाइजरी जारी कर नकली कॉल, फिशिंग और OTP धोखाधड़ी से सावधान रहने की चेतावनी दी। विभाग ने व्हाट्सएप पर दो-चरणीय सत्यापन और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तत्काल रिपोर्टिंग की अपील की है।

मुख्य बातें

जम्मू-कश्मीर साइबर क्राइम विभाग ने 30 मई को ऑनलाइन धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों पर एडवाइजरी जारी की।
नकली कॉल, फिशिंग लिंक , OTP धोखाधड़ी और संदिग्ध ऑनलाइन अनुरोधों से सतर्क रहने की चेतावनी दी गई।
व्हाट्सएप सहित मैसेजिंग ऐप्स पर टू-स्टेप वेरिफिकेशन सक्रिय करने की सलाह।
साइबर धोखाधड़ी की रिपोर्ट नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल या हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत करें।
RBI और बैंक भी जमाकर्ताओं को फोन पर खाता विवरण, OTP या आधार जानकारी साझा न करने की नियमित सलाह दे रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर साइबर क्राइम विभाग ने शनिवार, 30 मई को बढ़ते ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों के मद्देनज़र आम जनता के लिए एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की, जिसमें नकली कॉल, फिशिंग लिंक, OTP धोखाधड़ी और संदिग्ध ऑनलाइन अनुरोधों से सतर्क रहने की अपील की गई है। श्रीनगर से जारी यह एडवाइजरी ऐसे समय में आई है जब पूरे क्षेत्र में साइबर शिकायतों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

एडवाइजरी में क्या कहा गया

विभाग के आधिकारिक बयान में जनता से आग्रह किया गया कि वे किसी भी अनजान या संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से परहेज करें। वन-टाइम पासवर्ड (OTP) किसी के साथ भी साझा न करें और अनजान फोन नंबरों या ऑनलाइन अनुरोधों को पहले सत्यापित करें, उसके बाद ही कोई प्रतिक्रिया दें।

विभाग ने विशेष रूप से व्हाट्सएप सहित अन्य मैसेजिंग एप्लिकेशन पर 'टू-स्टेप वेरिफिकेशन' (दो-चरणीय सत्यापन) सक्रिय करने की सलाह दी, ताकि अनधिकृत पहुँच और पहचान चोरी के प्रयासों को रोका जा सके।

धोखेबाजों के तरीके

अधिकारियों ने चेतावनी दी कि साइबर अपराधी अक्सर बैंक प्रतिनिधियों, सरकारी अधिकारियों, कस्टमर केयर अधिकारियों या परिचितों का रूप धारण कर पीड़ितों को गुमराह करते हैं। इनका उद्देश्य गोपनीय जानकारी हासिल करना या वित्तीय लेन-देन करवाना होता है।

यह ऐसे समय में आया है जब डिजिटल सेवाओं और संचार मंचों पर निर्भरता तेज़ी से बढ़ी है और धोखेबाज भ्रामक डिजिटल तरीकों से निजी जानकारी, वित्तीय विवरण तथा सोशल मीडिया खातों तक अनधिकृत पहुँच बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

तत्काल रिपोर्टिंग की अहमियत

साइबर क्राइम विभाग ने स्पष्ट किया कि धोखाधड़ी के मामलों में — विशेष रूप से जिनमें वित्तीय लेन-देन शामिल हो — तुरंत रिपोर्ट करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। त्वरित हस्तक्षेप से संदिग्ध लेन-देन को रोकने और पैसे की वसूली की संभावना बढ़ जाती है।

नागरिकों से आग्रह किया गया है कि वे साइबर धोखाधड़ी की सूचना तुरंत नज़दीकी पुलिस थाने को दें, नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें, या समर्पित साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर सहायता प्राप्त करें।

RBI और बैंकों की भूमिका

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और उसके नियंत्रण में काम करने वाले विभिन्न बैंक भी नियमित रूप से जमाकर्ताओं को सलाह दे रहे हैं कि वे अपने खाते की जानकारी, OTP, आधार कार्ड और अन्य निजी पहचान विवरण किसी भी फोन कॉल पर साझा न करें। विशेष रूप से उन लोगों से सावधान रहें जो खुद को किसी वित्तीय संस्थान का प्रतिनिधि बताते हैं।

जागरूकता अभियान का हिस्सा

यह एडवाइजरी विभाग के चल रहे जागरूकता अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य डिजिटल सुरक्षा को मज़बूत करना और ज़िम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार को बढ़ावा देना है। विशेषज्ञों के अनुसार, जागरूकता ही साइबर अपराध के विरुद्ध सबसे प्रभावी ढाल है और आने वाले समय में ऐसे अभियान और तेज़ किए जाने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि क्या बार-बार जारी होने वाली ऐसी चेतावनियाँ वाकई पहुँच बना रही हैं — खासकर ग्रामीण और कम डिजिटल-साक्षर आबादी तक। एडवाइजरी जारी करना और वास्तविक जागरूकता फैलाना दो अलग-अलग काम हैं; विभाग यह नहीं बताता कि शिकायतों की संख्या कितनी है या वसूली की दर क्या रही है। जब तक साइबर अपराध के आँकड़े सार्वजनिक नहीं होंगे, नागरिक यह नहीं जान पाएँगे कि समस्या कितनी गंभीर है और सरकारी प्रयास कितने कारगर हैं।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जम्मू-कश्मीर साइबर क्राइम विभाग ने क्या एडवाइजरी जारी की है?
विभाग ने 30 मई को नकली कॉल, फिशिंग लिंक, OTP धोखाधड़ी और संदिग्ध ऑनलाइन अनुरोधों से सावधान रहने की एडवाइजरी जारी की है। इसमें व्हाट्सएप पर दो-चरणीय सत्यापन सक्रिय करने और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत रिपोर्ट करने की अपील की गई है।
साइबर धोखाधड़ी होने पर कहाँ और कैसे शिकायत करें?
साइबर धोखाधड़ी की सूचना तुरंत नज़दीकी पुलिस थाने को दें, नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें, या समर्पित साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। विभाग के अनुसार, जितनी जल्दी रिपोर्ट होगी, पैसे की वसूली की संभावना उतनी अधिक होगी।
OTP और आधार जानकारी क्यों नहीं देनी चाहिए?
धोखेबाज बैंक प्रतिनिधि, सरकारी अधिकारी या परिचित बनकर OTP, आधार नंबर और खाते की जानकारी माँगते हैं और इसका उपयोग वित्तीय लेन-देन या पहचान चोरी के लिए करते हैं। RBI और बैंक भी स्पष्ट करते हैं कि वे कभी फोन पर ऐसी जानकारी नहीं माँगते।
व्हाट्सएप पर टू-स्टेप वेरिफिकेशन कैसे काम करता है?
टू-स्टेप वेरिफिकेशन एक अतिरिक्त सुरक्षा परत है जो व्हाट्सएप अकाउंट को पुनः सक्रिय करते समय एक PIN माँगती है। इससे अनधिकृत पहुँच और पहचान चोरी के प्रयासों को रोका जा सकता है; विभाग ने सभी उपयोगकर्ताओं से इसे तुरंत सक्रिय करने की अपील की है।
यह एडवाइजरी किस व्यापक अभियान का हिस्सा है?
यह एडवाइजरी जम्मू-कश्मीर साइबर क्राइम विभाग के चल रहे डिजिटल जागरूकता अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य इंटरनेट-आधारित सेवाओं पर बढ़ती निर्भरता के बीच डिजिटल सुरक्षा को मज़बूत करना और ज़िम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार को प्रोत्साहित करना है।
राष्ट्र प्रेस
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