डीपफेक और सिंथेटिक आइडेंटिटी से साइबर ठगी का खतरा, गृह मंत्रालय ने जारी की एडवाइजरी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 11 जून 2026 को देशभर के नागरिकों और वित्तीय संस्थाओं के लिए एक विस्तृत साइबर सुरक्षा एडवाइजरी जारी की, जिसमें चेतावनी दी गई है कि साइबर अपराधी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग करके असली दिखने वाले डीपफेक वीडियो और सिंथेटिक आइडेंटिटी तैयार कर वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दे सकते हैं। यह एडवाइजरी ऐसे समय में आई है जब देश में एआई-आधारित साइबर अपराधों की संख्या में तेज़ी से वृद्धि दर्ज की जा रही है।
क्या है खतरा और कैसे काम करते हैं अपराधी
एडवाइजरी के अनुसार, साइबर अपराधी एआई-जनित डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल फेशियल ऑथेंटिकेशन, लाइवनेस वेरिफिकेशन, वीडियो-केवाईसी, अकाउंट रिकवरी और डिजिटल व वित्तीय सेवाओं तक अनधिकृत पहुँच प्राप्त करने के लिए कर सकते हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ये तकनीकें मौजूदा सुरक्षा प्रणालियों को बायपास करने और वित्तीय ढाँचे को निशाना बनाने में सक्षम हैं।
गौरतलब है कि अपराधी आमतौर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, जॉब पोर्टल, डेटिंग ऐप या सीधे फोन कॉल के ज़रिए पीड़ितों से संपर्क करते हैं। इसके बाद वे पीड़ितों का फेशियल डेटा एकत्र करते हैं — कभी-कभी उन्हें कैमरे के सामने पलक झपकाने, सिर घुमाने या बोलने जैसी सामान्य क्रियाएँ करवाकर — जिसका उपयोग बाद में डीपफेक बनाने में किया जाता है।
वित्तीय संस्थाओं के लिए निर्देश
मंत्रालय ने फिनटेक कंपनियों सहित सभी वित्तीय संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे अपने डीपफेक डिटेक्शन सिस्टम को मज़बूत करें और कस्टमर ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाएँ। यह कदम ऐसे समय में अहम है जब डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन केवाईसी की निर्भरता तेज़ी से बढ़ी है।
आम नागरिकों के लिए सुरक्षा उपाय
एडवाइजरी में नागरिकों को निम्नलिखित सावधानियाँ बरतने की सलाह दी गई है:
सरकार ने कहा है कि लोग अपना बायोमेट्रिक डेटा सुरक्षित रखें और किसी अपरिचित प्लेटफॉर्म पर चेहरा, आवाज़ या आँख की पुतली से संबंधित जानकारी साझा करने से बचें। इसके साथ ही, संदिग्ध लॉगिन प्रयासों के प्रति सतर्क रहें और वित्तीय गतिविधियों से जुड़े ईमेल व एसएमएस नोटिफिकेशन पर नियमित नज़र रखें।
साइबर अपराध की रिपोर्ट कैसे करें
नागरिकों को सलाह दी गई है कि किसी भी संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की सूचना तुरंत नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से दें। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर रिपोर्टिंग से न केवल व्यक्तिगत नुकसान कम हो सकता है, बल्कि अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी में भी मदद मिलती है। आने वाले समय में एआई-आधारित धोखाधड़ी के और परिष्कृत होने की आशंका को देखते हुए यह एडवाइजरी एक ज़रूरी कदम मानी जा रही है।