26 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

डीपफेक और सिंथेटिक आइडेंटिटी से साइबर ठगी का खतरा, गृह मंत्रालय ने जारी की एडवाइजरी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
डीपफेक और सिंथेटिक आइडेंटिटी से साइबर ठगी का खतरा, गृह मंत्रालय ने जारी की एडवाइजरी

सारांश

केंद्रीय गृह मंत्रालय की नई एडवाइजरी बताती है कि एआई-जनित डीपफेक और सिंथेटिक पहचान अब वीडियो-केवाईसी और बैंकिंग सुरक्षा को सीधे चुनौती दे रही हैं। नागरिकों को बायोमेट्रिक डेटा सुरक्षित रखने और संदिग्ध लेनदेन की तत्काल रिपोर्ट करने की सलाह दी गई है।

मुख्य बातें

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 11 जून 2026 को एआई-आधारित साइबर धोखाधड़ी को लेकर राष्ट्रीय एडवाइजरी जारी की।
साइबर अपराधी डीपफेक वीडियो और सिंथेटिक आइडेंटिटी से फेशियल ऑथेंटिकेशन , वीडियो-केवाईसी और अकाउंट रिकवरी सिस्टम को बायपास कर सकते हैं।
अपराधी सोशल मीडिया , जॉब पोर्टल और डेटिंग ऐप के ज़रिए पीड़ितों का फेशियल डेटा एकत्र करते हैं।
फिनटेक कंपनियों और वित्तीय संस्थाओं को डीपफेक डिटेक्शन सिस्टम मज़बूत करने का निर्देश दिया गया।
नागरिकों को संदिग्ध लेनदेन की रिपोर्ट नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर तुरंत करने की सलाह।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 11 जून 2026 को देशभर के नागरिकों और वित्तीय संस्थाओं के लिए एक विस्तृत साइबर सुरक्षा एडवाइजरी जारी की, जिसमें चेतावनी दी गई है कि साइबर अपराधी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग करके असली दिखने वाले डीपफेक वीडियो और सिंथेटिक आइडेंटिटी तैयार कर वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दे सकते हैं। यह एडवाइजरी ऐसे समय में आई है जब देश में एआई-आधारित साइबर अपराधों की संख्या में तेज़ी से वृद्धि दर्ज की जा रही है।

क्या है खतरा और कैसे काम करते हैं अपराधी

एडवाइजरी के अनुसार, साइबर अपराधी एआई-जनित डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल फेशियल ऑथेंटिकेशन, लाइवनेस वेरिफिकेशन, वीडियो-केवाईसी, अकाउंट रिकवरी और डिजिटल व वित्तीय सेवाओं तक अनधिकृत पहुँच प्राप्त करने के लिए कर सकते हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ये तकनीकें मौजूदा सुरक्षा प्रणालियों को बायपास करने और वित्तीय ढाँचे को निशाना बनाने में सक्षम हैं।

गौरतलब है कि अपराधी आमतौर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, जॉब पोर्टल, डेटिंग ऐप या सीधे फोन कॉल के ज़रिए पीड़ितों से संपर्क करते हैं। इसके बाद वे पीड़ितों का फेशियल डेटा एकत्र करते हैं — कभी-कभी उन्हें कैमरे के सामने पलक झपकाने, सिर घुमाने या बोलने जैसी सामान्य क्रियाएँ करवाकर — जिसका उपयोग बाद में डीपफेक बनाने में किया जाता है।

वित्तीय संस्थाओं के लिए निर्देश

मंत्रालय ने फिनटेक कंपनियों सहित सभी वित्तीय संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे अपने डीपफेक डिटेक्शन सिस्टम को मज़बूत करें और कस्टमर ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाएँ। यह कदम ऐसे समय में अहम है जब डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन केवाईसी की निर्भरता तेज़ी से बढ़ी है।

आम नागरिकों के लिए सुरक्षा उपाय

एडवाइजरी में नागरिकों को निम्नलिखित सावधानियाँ बरतने की सलाह दी गई है:

सरकार ने कहा है कि लोग अपना बायोमेट्रिक डेटा सुरक्षित रखें और किसी अपरिचित प्लेटफॉर्म पर चेहरा, आवाज़ या आँख की पुतली से संबंधित जानकारी साझा करने से बचें। इसके साथ ही, संदिग्ध लॉगिन प्रयासों के प्रति सतर्क रहें और वित्तीय गतिविधियों से जुड़े ईमेल व एसएमएस नोटिफिकेशन पर नियमित नज़र रखें।

साइबर अपराध की रिपोर्ट कैसे करें

नागरिकों को सलाह दी गई है कि किसी भी संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की सूचना तुरंत नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से दें। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर रिपोर्टिंग से न केवल व्यक्तिगत नुकसान कम हो सकता है, बल्कि अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी में भी मदद मिलती है। आने वाले समय में एआई-आधारित धोखाधड़ी के और परिष्कृत होने की आशंका को देखते हुए यह एडवाइजरी एक ज़रूरी कदम मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल बना रहता है कि क्या केवल परामर्श पर्याप्त है — जबकि नियामकीय ढाँचा अभी भी एआई-जनित धोखाधड़ी के लिए विशिष्ट दंड-प्रावधानों से रहित है। भारत में डिजिटल केवाईसी की व्यापकता और करोड़ों उपयोगकर्ताओं की बायोमेट्रिक निर्भरता को देखते हुए, यह खतरा महज़ तकनीकी नहीं, बल्कि प्रणालीगत है। फिनटेक कंपनियों को 'सलाह' देना और उन पर अनुपालन की क़ानूनी बाध्यता लागू करना — इन दोनों के बीच की खाई ही असली कमज़ोरी है। जब तक डीपफेक डिटेक्शन को अनिवार्य नियामकीय मानक नहीं बनाया जाता, एडवाइजरियाँ केवल कागज़ी सावधानी बनकर रह जाएँगी।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीपफेक साइबर ठगी क्या होती है और यह कैसे काम करती है?
डीपफेक साइबर ठगी में अपराधी एआई तकनीक से किसी व्यक्ति का नकली वीडियो या चेहरा बनाकर उसकी पहचान चुराते हैं। इसका उपयोग वीडियो-केवाईसी, फेशियल ऑथेंटिकेशन और बैंक अकाउंट रिकवरी जैसी प्रक्रियाओं को धोखा देने के लिए किया जाता है।
गृह मंत्रालय की एडवाइजरी में नागरिकों को क्या सलाह दी गई है?
एडवाइजरी में नागरिकों को अपना बायोमेट्रिक डेटा सुरक्षित रखने, संदिग्ध लॉगिन प्रयासों पर नज़र रखने और वित्तीय लेनदेन से जुड़े ईमेल व एसएमएस नोटिफिकेशन की नियमित जाँच करने की सलाह दी गई है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की रिपोर्ट नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर तुरंत करें।
साइबर अपराधी फेशियल डेटा कैसे चुराते हैं?
अपराधी सोशल मीडिया, जॉब पोर्टल, डेटिंग ऐप या फोन कॉल के ज़रिए संपर्क करके पीड़ितों को कैमरे के सामने पलक झपकाने, सिर घुमाने या बोलने जैसी सामान्य क्रियाएँ करवाते हैं। इस डेटा का उपयोग बाद में डीपफेक वीडियो बनाने के लिए किया जाता है।
वित्तीय संस्थाओं और फिनटेक कंपनियों को क्या निर्देश दिए गए हैं?
गृह मंत्रालय ने फिनटेक कंपनियों समेत सभी वित्तीय संस्थाओं को अपने डीपफेक डिटेक्शन सिस्टम को मज़बूत करने और कस्टमर ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने की सलाह दी है। यह कदम डिजिटल केवाईसी की बढ़ती निर्भरता को देखते हुए ज़रूरी माना जा रहा है।
साइबर ठगी होने पर शिकायत कहाँ दर्ज करें?
साइबर ठगी या संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की सूचना तुरंत नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज करानी चाहिए। समय पर रिपोर्टिंग से व्यक्तिगत नुकसान कम करने और अपराधियों की पहचान में मदद मिलती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 सप्ताह पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 1 साल पहले