खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को मंजूरी: लुधियाना साइकिल उद्योग ने किया स्वागत, PM मोदी से की अपील
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को मंजूरी दे दी है, जिसके लिए ₹1,856.67 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है। वित्त वर्ष 2026-27 से 2033-34 तक लागू रहने वाली इस योजना का उद्देश्य भारत में एक मजबूत खेल विनिर्माण इकोसिस्टम तैयार करना है। लुधियाना के साइकिल उद्योग से जुड़े कारोबारियों ने इस फैसले का स्वागत किया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से साइकिल इंडस्ट्री को भी इस योजना में शामिल करने की अपील की है।
कारोबारियों की प्रतिक्रिया
यूनाइटेड साइकिल पार्ट्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डी. एस. चावला ने कहा, 'भारत सरकार को समझ में आ गया है कि खेलों को बढ़ावा देने का मतलब है युवाओं को सेहतमंद करना। अगर युवा स्वस्थ रहेंगे, तभी वे देश की तरक्की में अपना योगदान दे सकेंगे।' उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और उनकी कैबिनेट को खेल क्षेत्र पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद दिया।
चावला ने यह भी कहा कि डिजिटल खेलों के बढ़ते चलन के बीच शारीरिक खेल बच्चों के समग्र विकास के लिए अनिवार्य हैं। उनके अनुसार, 'बच्चा अगर मोबाइल पर गेम खेलता है, तो उसका शारीरिक विकास नहीं होता। शारीरिक खेल से दिमाग का भी विकास होता है और बच्चे हर क्षेत्र में आगे जाते हैं।'
साइकिल इंडस्ट्री को शामिल करने की अपील
चावला ने PM मोदी से विशेष अपील करते हुए कहा कि खेलो इंडिया स्कीम में साइकिल इंडस्ट्री को भी जोड़ा जाए। उन्होंने तर्क दिया कि साइकिल चलाने से न केवल शारीरिक फिटनेस बढ़ती है, बल्कि ईंधन की बचत होती है और यातायात का दबाव भी कम होता है। उनके अनुसार, 'साइकिल उद्योग को बढ़ावा देने से सरकार का युवाओं को लेकर जो मिशन है, वो भी पूरा होगा।'
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को लघु और मध्यम उद्योगों को प्रोत्साहित करना चाहिए और प्रवासी भारतीयों को वापस आने का अनुकूल माहौल तैयार करना चाहिए, जिससे देश का समग्र विकास संभव होगा।
अन्य कारोबारियों की राय
साइकिल उद्योग से जुड़े हरविंदर सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री की यह योजना शानदार है, लेकिन इसका लाभ जमीनी स्तर पर छोटे कारोबारियों तक पहुँचना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा, 'अगर सरकार से सहयोग मिलता है, तो पंजाब में साइकिल इंडस्ट्री बहुत आगे बढ़ेगी।'
योजना का विवरण और संभावित असर
केंद्र सरकार ने खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के लिए ₹1,856.67 करोड़ आवंटित किए हैं, जो वित्त वर्ष 2026-27 से 2033-34 तक चलेगी। यह योजना ऐसे समय में आई है जब लुधियाना जैसे औद्योगिक केंद्र में साइकिल और खेल उत्पाद निर्माता वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दबाव में काम कर रहे हैं। इस पहल से छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिलने, रोजगार के नए अवसर सृजित होने और पंजाब के खेल उद्योग को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
गौरतलब है कि लुधियाना देश का प्रमुख साइकिल उत्पादन केंद्र है और यहाँ के उद्यमियों की यह माँग कि साइकिल को खेल उपकरण की श्रेणी में रखा जाए, नीति-निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि सरकार इस अपील पर किस तरह प्रतिक्रिया देती है।