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खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को मंजूरी: लुधियाना साइकिल उद्योग ने किया स्वागत, PM मोदी से की अपील

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खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को मंजूरी: लुधियाना साइकिल उद्योग ने किया स्वागत, PM मोदी से की अपील

सारांश

केंद्र सरकार ने ₹1,856.67 करोड़ की खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को मंजूरी दी है। लुधियाना के साइकिल उद्योग ने इसे सराहा और PM मोदी से साइकिल इंडस्ट्री को भी इस योजना में शामिल करने की अपील की है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को ₹1,856.67 करोड़ के बजट के साथ मंजूरी दी।
योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2033-34 तक लागू रहेगी।
यूनाइटेड साइकिल पार्ट्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डी.
चावला ने PM मोदी से साइकिल इंडस्ट्री को योजना में शामिल करने की अपील की।
कारोबारी हरविंदर सिंह ने योजना का स्वागत करते हुए छोटे कारोबारियों तक लाभ पहुँचाने पर जोर दिया।
इस योजना से लुधियाना के साइकिल उद्योग, छोटे उद्यमों और पंजाब के खेल विनिर्माण क्षेत्र को फायदा मिलने की उम्मीद है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को मंजूरी दे दी है, जिसके लिए ₹1,856.67 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है। वित्त वर्ष 2026-27 से 2033-34 तक लागू रहने वाली इस योजना का उद्देश्य भारत में एक मजबूत खेल विनिर्माण इकोसिस्टम तैयार करना है। लुधियाना के साइकिल उद्योग से जुड़े कारोबारियों ने इस फैसले का स्वागत किया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से साइकिल इंडस्ट्री को भी इस योजना में शामिल करने की अपील की है।

कारोबारियों की प्रतिक्रिया

यूनाइटेड साइकिल पार्ट्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डी. एस. चावला ने कहा, 'भारत सरकार को समझ में आ गया है कि खेलों को बढ़ावा देने का मतलब है युवाओं को सेहतमंद करना। अगर युवा स्वस्थ रहेंगे, तभी वे देश की तरक्की में अपना योगदान दे सकेंगे।' उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और उनकी कैबिनेट को खेल क्षेत्र पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद दिया।

चावला ने यह भी कहा कि डिजिटल खेलों के बढ़ते चलन के बीच शारीरिक खेल बच्चों के समग्र विकास के लिए अनिवार्य हैं। उनके अनुसार, 'बच्चा अगर मोबाइल पर गेम खेलता है, तो उसका शारीरिक विकास नहीं होता। शारीरिक खेल से दिमाग का भी विकास होता है और बच्चे हर क्षेत्र में आगे जाते हैं।'

साइकिल इंडस्ट्री को शामिल करने की अपील

चावला ने PM मोदी से विशेष अपील करते हुए कहा कि खेलो इंडिया स्कीम में साइकिल इंडस्ट्री को भी जोड़ा जाए। उन्होंने तर्क दिया कि साइकिल चलाने से न केवल शारीरिक फिटनेस बढ़ती है, बल्कि ईंधन की बचत होती है और यातायात का दबाव भी कम होता है। उनके अनुसार, 'साइकिल उद्योग को बढ़ावा देने से सरकार का युवाओं को लेकर जो मिशन है, वो भी पूरा होगा।'

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को लघु और मध्यम उद्योगों को प्रोत्साहित करना चाहिए और प्रवासी भारतीयों को वापस आने का अनुकूल माहौल तैयार करना चाहिए, जिससे देश का समग्र विकास संभव होगा।

अन्य कारोबारियों की राय

साइकिल उद्योग से जुड़े हरविंदर सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री की यह योजना शानदार है, लेकिन इसका लाभ जमीनी स्तर पर छोटे कारोबारियों तक पहुँचना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा, 'अगर सरकार से सहयोग मिलता है, तो पंजाब में साइकिल इंडस्ट्री बहुत आगे बढ़ेगी।'

योजना का विवरण और संभावित असर

केंद्र सरकार ने खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के लिए ₹1,856.67 करोड़ आवंटित किए हैं, जो वित्त वर्ष 2026-27 से 2033-34 तक चलेगी। यह योजना ऐसे समय में आई है जब लुधियाना जैसे औद्योगिक केंद्र में साइकिल और खेल उत्पाद निर्माता वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दबाव में काम कर रहे हैं। इस पहल से छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिलने, रोजगार के नए अवसर सृजित होने और पंजाब के खेल उद्योग को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

गौरतलब है कि लुधियाना देश का प्रमुख साइकिल उत्पादन केंद्र है और यहाँ के उद्यमियों की यह माँग कि साइकिल को खेल उपकरण की श्रेणी में रखा जाए, नीति-निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि सरकार इस अपील पर किस तरह प्रतिक्रिया देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

856.67 करोड़ की यह योजना कागज पर ठोस दिखती है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इसके लाभ लुधियाना जैसे जमीनी औद्योगिक केंद्रों के छोटे निर्माताओं तक वास्तव में पहुँचेंगे। साइकिल को 'खेल उपकरण' की परिभाषा में शामिल करने की माँग नई नहीं है, लेकिन अब तक नीति में इसे औपचारिक मान्यता नहीं मिली है। यदि सरकार इस अपील को अनदेखा करती है, तो देश के सबसे बड़े साइकिल उत्पादन केंद्र को एक ऐसी योजना से बाहर रहने का जोखिम है जो उसी क्षेत्र की सेवा का दावा करती है। लघु और मध्यम उद्यमों के लिए क्रियान्वयन तंत्र की स्पष्टता के बिना यह घोषणा भी पिछली कई योजनाओं की तरह महज एक इरादे तक सिमट सकती है।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम क्या है?
यह केंद्र सरकार द्वारा वित्त वर्ष 2026-27 से 2033-34 तक के लिए ₹1,856.67 करोड़ के बजट के साथ मंजूर की गई एक योजना है, जिसका उद्देश्य भारत में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी खेल विनिर्माण इकोसिस्टम विकसित करना है। इससे छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने और रोजगार सृजन की उम्मीद है।
लुधियाना के साइकिल उद्योग को इस योजना से क्या फायदा हो सकता है?
लुधियाना देश का प्रमुख साइकिल उत्पादन केंद्र है और इस योजना से यहाँ के छोटे व मध्यम साइकिल निर्माताओं को सरकारी सहयोग व प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। हालाँकि, इसके लिए जरूरी है कि साइकिल को खेल उपकरण की श्रेणी में औपचारिक रूप से शामिल किया जाए।
डी. एस. चावला ने PM मोदी से क्या अपील की है?
यूनाइटेड साइकिल पार्ट्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डी. एस. चावला ने PM मोदी से अपील की है कि खेलो इंडिया स्कीम में साइकिल इंडस्ट्री को भी शामिल किया जाए। उनका कहना है कि साइकिल फिटनेस, ईंधन बचत और यातायात कमी — तीनों दृष्टियों से युवा नीति के अनुकूल है।
यह योजना कब से कब तक लागू रहेगी?
खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम वित्त वर्ष 2026-27 से शुरू होकर 2033-34 तक लागू रहेगी। इस दौरान ₹1,856.67 करोड़ का बजट खर्च किया जाएगा।
इस योजना से पंजाब के खेल उद्योग पर क्या असर पड़ेगा?
रिपोर्टों के अनुसार, इस योजना से पंजाब के खेल उद्योग को नई दिशा मिलने, रोजगार के अवसर बढ़ने और छोटे उद्यमों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। विशेष रूप से लुधियाना का साइकिल क्षेत्र इसका प्रमुख लाभार्थी बन सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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